'बच्चियों ने रोते हुए फिल्म छोड़ दी...' संसद में महिला सांसद ने 'एनिमल' को लेकर किया ऐसा खुलासा, कह दी ये बात
Animal In Parliament: बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर की हालिया रिलीज फिल्म 'एनिमल' इस समय बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। इस फिल्म ने रिलीज होने के 6 दिनों के अंदर ही 300 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। लोगों को ये फिल्म बहुत पसंद आ रही है। हालांकि किछ लोग इसे लेकर नकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। एक तरफ सोशल मीडिया पर कुछ लोग बेबाकी से इस फिल्म में दिखाई गई हिंसा की जमकर आलोचना कर रहे हैं, वहीं अब इस फिल्म के विरोध में संसद में आवाज सुनाई दे रही है। आज यानी 7 दिसंबर को कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन ने 'सिनेमा का युवाओं पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव' विषय पर अपनी बात रखी है। इस मामले में उन्होंने फिल्म 'एनिमल' को लेकर भी बात की है।
'सिनेमा समाज का आईना होता है'
कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन ने कहा- सिनेमा समाज का आईना होता है। हम लोग फिल्म देखकर ही बड़े हुए हैं और ये हम सभी को प्रभावित करता है, खासकर युवाओं की जिंदगी को तो ये बहुत प्रभावित करता है। आजकल की फिल्मों में महिलाओं के प्रति असम्मान को फिल्मों के जरिए सही ठहराया जा रहा है। इस मामले पर बात करते हुए रंजीत रंजन ने संसद में तीन गंभीर मुद्दे उठाए हैं।

नकारात्मक किरदारों को बच्चे आदर्श मानने लगे हैं
रंजीत रंजन ने कहा- आजकल कुछ अलग तरह की फिल्में दिखाई जा रही हैं। 'कबीर सिंह' से लेकर साउथ की 'पुष्पा' तक। आजकल एक 'एनिमल' फिल्म सिनेमाघरों में चल रही है। मैं आपको बता नहीं सकती... मेरी बेटी के साथ बहुत सारी बच्चियां थीं, जो कॉलेज में पढ़ती हैं। 'एनिमल' फिल्म को वो लोग आधा देखकर ही सिनेमाघर से निकल गए। वो लोग रोते हुए फिल्म का आधा देखकर ही बाहर निकल गए। रंजीत रंजन ने आगे कहा- दरअसल उस फिल्म में इतनी हिंसा दिखाई गई है कि बच्चियां उसे अपना ही नहीं पाईं। आजकल महिलाओं के प्रति असम्मान को फिल्मों के जरिए सही ठहराया जा रहा है।
हिंसा को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है
रंजीत रंजन ने कहा- 'कबीर सिंह' और 'एनिमल' में जिस तरह हीरो अपनी पत्नी के साथ सलूक करता है, लोग आजकल उसे सही ठहरा रहे हैं। ये बहुत ही सोचने वाला विषय है। बहुत सारे ऐसे उदाहरण हैं कि इन फिल्मों या उसमें दिखाई जा रही हिंसा के जरिए हीरो को गलत और नकारात्मक तरीके से पेश किया जा रहा है। बच्चे इन्हें अपना आदर्श मानने लगे हैं। इस वजह से इस तरह की हिंसा आजकल समाज में देखने को मिल रही है।
'एनिमल' के गाने पर रंजीत रंजन ने कही ये बात
रंजीत रंजन ने आगे कहा- उच्च कोटि का इतिहास रहा है पंजाब का, हरि सिंह नलवा का। फिल्म 'एनिमल' में एक गाना है- अर्जन वेल्ली ने जोर के गंडासी मारी, फिल्म का हीरो इस गाने में दो परिवारों के बीच नफरत की लड़ाई में बड़े-बड़े हथियार लेकर सरेआम हिंसा करता नजर आता है और कोई कानून उसे रोकता या सजा देता दिखाई नहीं देता। जहां तक अर्जुन वेल्ली गाने का सवाल है, हरि सिंह नलवा कमांडर इन चीफ थे। उन्होंने मुगलों-अंग्रेजों के खिलाफ उनकी बढ़ती हुई सत्ता को रोकने के लिए लड़ाई लड़ी थी। उनका बेटा था अर्जुन सिंह नलवा।
'धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं'
रंजीत रंजन ने कहा- उन्होंने कई मुसलमानों को 1947 में बचाने का काम किया था। इस उच्च कोटि के इतिहास से जुड़े गाने को बैकग्राउंड में गैंगवार के साथ दिखाया जा रहा है। इससे हमारी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी जब मुगलों से लड़ाई लड़ रहे थे, तब वह एक लोकगीत के जरिए अपनी फौज में जोश पैदा करते थे। सांसद ने आगे कहा- मुझे समझ नहीं आता सेंसर बोर्ड ऐसी हिंसात्मक फिल्मों को कैसे बढ़ावा दे सकता है। किस तरह से ऐसी फिल्में पास होकर सिनेमाघरों में रिलीज हो जाती हैं। ये हमारे समजा को बीमार बना रही हैं।












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