'मैं जलूं तो मेरी अस्थियां यहां लाकर रख देना..',फूट-फूट कर रोते हुए क्यों ऐसा बोलीं रतन राजपूत, भावुक है Video

'मैं जलूं तो मेरी अस्थियां यहां लाकर रख देना...',फूट-फूट कर रोते हुए क्यों ऐसा बोलीं रतन राजपूत, भावुक है वीडियो

पटना, 12 जुलाई: ''जब मैं जलूं तो मेरी अस्थियां यहां लाकर रख देना....'' ये बात टीवी एक्ट्रेस रतन राजपूत ने अपनी एक पुरानी दोस्त से मिलने के बाद कही है। रतन राजपूत का ये यूट्यूब ब्लग वीडियो बहुत वायरल हो रहा है। असल में रतन राजपूत इन दिनों बिहार गई हुई हैं। रतन पिछले कई दिनों से बिहार में घर पर हैं। गांव घूमने, खेती करने के बाद रतन बिहार के आरा गईं, जहां उनका बचपन बीता है। जिसका ब्लॉग उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किया है। रतन का ये वीडिया बेहद भावुक है। रतन ने इस वीडियो में दिखाया है कि उनका बचपन कहां और कैसे बीता है।

बचपन वाले घर में पहुंच इमोशनल हो गईं रतन राजपूत

बचपन वाले घर में पहुंच इमोशनल हो गईं रतन राजपूत

रतन राजपूत का बचपन बिहार के शहर आरा में बीता है। अपने ब्लॉग में रतन राजपूत ने उस घर को भी दिखाया है, जहां उनका बचपन बीता है। रतन के पिता जी सरकारी अधिकारी थे, इसलिए रतन का बचपन सरकारी घर में बीता है। रतन ने वो सरकारी घर दिखाया, जहां पहुंचकर वो एकदम इमोशनल हो गईं। इस कोठी के अंदर कदम रखते ही रतन ने सारी चीजों के बारे में बताई।

ये है रतन की खास बचपन की सहेली

ये है रतन की खास बचपन की सहेली

इस सरकारी बंगले के बाहर एक पाकड़ का पेड़ है और वही पेड़ रतन की खास सहेली है। रतन ने बताया कि इसी पेड़ के नीचे उनका पूरा बचपन गुजरा है। यहां वो घटों बैठकर अपने भाई-बहनों के साथ बात किया करती थीं। रतन ने कहा कि ये पेड़ उनका दोस्त, गुरु और ना जाने क्या-क्या है। रतन ने यहां अपने पिता की वो पुरानी गाड़ी भी देखी, जिसमें बैठकर वो घूमने जाती थीं। रतन ने वो गाड़ी भी दिखाई, जिसकी हालत आज खस्ताहाल है।

'ये पहचान गया होगा मुझे, बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा है..'

'ये पहचान गया होगा मुझे, बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा है..'

रतन राजपूत पाकड़ के पेड़ के नीचे बैठकर बोलती हैं,''मैं बड़ी हो गई हूं... ये पेड़ मुझे देखकर सोच रहा होगा कितनी बड़ी हो गई है ये। (रोते हुए) हम इंसानों के साथ-साथ इनकी भी मोमॉरी होती है। पहचान गया होगा ये। बहुत वक्त बिताया है, यहां। गांडी को देखकर तो मेरी हालात ही खराब हो गई है। बर्दाश्त नहीं हो रहा है। सारी पुरानी यादें फ्लैश हो रही हैं। पता नहीं जब हम 6 भाई-बहन एक साथ आएंगे यहां, तो कितना एक साथ मिलकर रोएंगे, क्योंकि यहां पर सबका बेस्ट टाइम और याद है।''

'जब मैं जलूं तो मेरी जो थोड़ी सी अस्थियों, यहां लाकर रख देना..'

'जब मैं जलूं तो मेरी जो थोड़ी सी अस्थियों, यहां लाकर रख देना..'

रतन ने आगे कहा, ''मैं यहां और देर नहीं रहने वाली हूं...ऐसा लग रहा है, मेरे अंदर बाढ़ आ रही है। मैं कितनी बड़ी हो जाऊं..एक होता है ना लोग नदी में बहना चाहते हैं, जलने के बाद। मुझे लगता है कि मैं जब जलूं तो मेरी जो थोड़ी सी अस्थियों हो, वो यहां लाकर रख दें। बहुत जरूरी है ये जगह मेरे लिए...बहुत...खासकर ये पेड़।''

'कोई नहीं समझ पाएगा...मेरा क्या रिश्ता है...'

'कोई नहीं समझ पाएगा...मेरा क्या रिश्ता है...'

रतन राजपूत ने आगे कहा, ''कोई नहीं समझ पाता या कोई समझ नहीं पाएगा। ये कनेक्शन शायद, हम दोनों का है। (रोते हुए),जो कोई नहीं समझ पाएगा। पता नहीं हम दोनों का कौन सा रिश्ता है, मां बेटे का, भाई-बहन का, या प्रेमी-प्रेमिका का...गुरु शिष्य का, मुझे नहीं पता लेकिन कुछ तो है...जो बहुत गहरा है। शायद ये मेरा पहला टीचर है ये। चलो चलो यहां से चलते हैं...।''

रतन राजपूत फिलहाल किसी टीवो शो में नहीं आ रही हैं। रतन राजपूत ने कहा है कि वो अगले साल से टीवी में फिर से वापसी करने का प्लान बना रही हैं।

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