Tu Meri Poori Kahani: भट्ट कैंप ने फिर खेला नए चेहरे पर दांव, सुहृता दास और अनु मलिक ने बिखेरा जादू
Tu Meri Poori Kahani Movie Review in Hindi: महेश भट्ट और अनु मलिक की जोड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटी है। लेकिन इस बार महेश डायरेक्शन की कमान नहीं संभाल रहे हैं। उनकी इस फिल्म 'तू मेरी पूरी कहानी' है, इसके वो क्रिएटर हैं। इस फिल्म में फिर उन्होंने फिर नए चेहरों पर दांव खेला है। भट्ट कैंप इसी के लिए जाना जाता है।

फिल्म की हीरोइन अनिका एक बागी और निडर लड़की है। जो दुनिया में छा जाना चाहती है और दुनिया भर में नाम कमाना चाहती है। फिल्मों में खुद को चमकाना चाहती है। यही चाहत लिए वो अपने सफर में निकल पड़ती है। इसमें उसकी मुलाकात रोहन से होती है। जो एक सिंगर है, उसकी आवाज में जादू है। कुल मिलाकर कहानी एक पारिवारिक टकराव को दिखाती है। जिसमें पिता का ठंडा व्यवहार है, मां की चिंता का साया है और अनिका का जुनून है। जो उसे सपने के पास ले जाता है। यही है फिल्म की मोटा माटी कहानी।
नए चेहरों पर भट्ट कैंप का फिर दांव
हिरण्या ओझा ने अच्छा काम किया है। कभी बागी, कभी टूटी-सी और अपनी सक्सेस के सीन में भी उनका काम ठीक है। अर्हन पटेल ने अपने रोल में मासूमियत और संवेदनशीलता भरी हुई है। एक्टिंग अच्छी है। पिता की याद्दाश्त खोने वाली बीमारी का सीन बेहद शानदार है। तिग्मांशु धूलिया एक डायरेक्टर हैं, लेकिन एक्टिंग में भी उनका कोई जवाब नहीं है। पिता, जो अपने प्यार को छुपाए रखते हैं। कम संवाद, लेकिन असरदार काम किया है। जूही बब्बर का काम भी अच्छा है।
अनु मलिक की संगीतमय दुनिया
सुहृता दास ने अपने पहले ही प्रयास में साबित किया कि वह रिश्तों की कच्ची गिरहों को भी संवेदनशीलता को अपने डायरेक्शन में अच्छे तरीके से दिखाया है। महेश भट्ट की फिल्मों में कभी नजर आती थी। अनु मलिक का संगीत इस फ़िल्म की धड़कन है। उनके म्यूजिक में ताज़गी है, जो कहानी को और गहराई भर देता है।
फिल्म में है महेश भट्ट का असर
फिल्म में बार-बार वह पुराना भट्ट अंदाज़ झलकता है। टूटे हुए रिश्ते, महत्वाकांक्षा और मोहब्बत का संघर्ष। सायरा की यादें ताज़ा होती हैं, जहाँ संगीत और कहानी एक-दूसरे में घुलमिलकर कुछ नया रचते थे।
मुख्य सवाल : प्यार या शोहरत?
फिल्म का सबसे अहम सवाल है - इंसान प्यार चुने या शोहरत? अनिका की यात्रा इस सवाल को बड़े मार्मिक ढंग से सामने रखती है। क्लाइमैक्स में जब वह राज (शम्मी दुहान) के सामने खड़ी होती है, तो यह सिर्फ़ जीत नहीं, आत्म-सम्मान और साहस का इज़हार है।
तू मेरी पूरी कहानी एक फ़िल्म नहीं, एक अनुभव है। नए कलाकारों की ताज़गी, सुहृता दास का संवेदनशील निर्देशन, महेश और विक्रम भट्ट का अनुभव, और अनु मलिक का संगीत - सब मिलकर इसे एक यादगार सफ़र बना देते हैं।












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