The Kerala Story: निमिषा और सोनिया की रियल स्टोरी से काफी हद तक मिलती है 'द केरला स्टोरी'
The Kerala Story: निमिषा और सोनिया वो दो लड़कियां हैं, जिनकी हूबहू आप-बीती बयां कर रही है 'द केरला स्टोरी'

बॉलीवुड फिल्म 'द केरला स्टोरी' 5 मई को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के रिलीज से पहले इसको लेकर काफी विवाद शुरू हो गया है। फिल्म 'द केरल स्टोरी' का ट्रेलर सामने आने के बाद देशभर में विवाद बढ़ता ही जा रहा है, फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग हो रही है। इस फिल्म की कहानी 32 केरलवासियों के धर्मांतरण पर आधारित है। जिसकी वजह से फिल्म को एक वर्ग कॉन्टोवर्सी बता रहे हैं।

इस फिल्म के ट्रेलर के आने के बाद फिल्म में बताई गई केरल की उन लड़कियों की संख्या को लेकर बहस हो रही है जिनका इस्लाम में परिवर्तित करके उन्हें जबरन इस्लामिक स्टेट में शामिल किया गया है। हालांकि केरल पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच किए गए कुछ लिखित मामले रिकार्ड में हैं, जिसमें केरल की महिलाओं को बरगला कर या फंसाकर और फिर इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए मजबूर करने की बात दर्ज है। द केरल स्टोरी में दिखाई गई लड़कियों की कहाी से काफी हद तक ये मिलती जुलती रियल स्टोरी है।

केरल की निमिशा उर्फ फातिमा की भी ये कहानी
ऐसा ही मामला केरल की निमिषा का है जिनके बारे में एजेंसियों का कहना है कि उनका जबरन धर्मांतरण किया गया और फिर उसे अफगानिस्तान भेज दिया गया। ये मामला 2017 का है। निमिशा उर्फ फातिमा को 2020 में अफगानिस्तान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने जब पूछताछ की थी तब उसने कहा कि उसे पाकिस्तान समर्थित एक समूह द्वारा फंसाया गया था जो धर्मांतरण करता था।
निमिषा ने कबूली थी ये बात
निमिषा उर्फ फातिमा ने अपने कबूलनामे बताया था कि निमिषा की शादी गर्भावस्था के सातवें महीने में हुई थी, जिसके बाद वह अफगानिस्तान चली गई थी। उसने ये भी कहा था कि एक बार अफगानिस्तान में वह वास्तव में इस्लामी जीवन व्यतीत करेगी। उसने कहा था मुझे जिहाद के लिए प्रशिक्षित किया गया था और पूछताछ के दौरान ये भी उसने ये भी कबूला था कि वहां मेरा काम खिलाफत की स्थापना करना होगा।
सोनिया सेबेस्टिन की भी ऐसी ही है कहानी
वहीं केरल का दूसरा मामला सोनिया सेबेस्टिन का है। जिसका नाम बदलकर बाद में आयशा रखा गया था। उसके द्वारा जारी एक वीडियो में जिसे स्ट्रैट न्यूज ग्लोबल द्वारा चलाया गया था। इस वीडियो में उसने बयान दिया था कि वो और उसका पति अब्दुल्ला रशीद इस्लामिक स्टेट से परेशान थे। उसने कहा कि वह खिलाफत के शासन के तहत विशुद्ध रूप से इस्लामी जीवन शैली का नेतृत्व करने के लिए अफगानिस्तान चली गई थी। हालांकि वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि लोग मस्जिदों में भी नहीं जा रहे हैं।
भारत ही नहीं बाहरी देशों में भी मौजूद है ये समस्या
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने वनइंडिया को दिए इंटरव्यू में ये स्वीकार किया है न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ये समस्या मौजूद है । इस्लामिक स्टेट सेक्स-स्लेव्स की भर्ती के एक पैटर्न का पालन करता है और उनसे जनसंख्या बढ़ाने की उम्मीद करता है। यह काफी हद तक इराक में यजीदी लड़कियों के मामले में देखा गया था।
महिलाओं को सेक्स स्लेव के रूप में लिया जाता है
यजीदी संगठन की सचिव लैला खौदेइदा ने बताया कि इस्लामिक स्टेट उनके समुदाय को शैतानों की पूजा करने वाले के रूप में देखता है। उन्होंंने खुलासा किया कि महिलाओं को सेक्स स्लेव के रूप में लिया जाता है और इस्लामिक स्टेट के बढ़ने के साथ ही संख्या बढ़ी है। हालांकि इराक और सीरिया में भारी नुकसान का सामना करने के बाद इस्लामिक स्टेट ने अब अपना रास्ता बदल लिया है।












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