The Kerala Story 2 Review: कमजोर कहानी पर दमदार एक्टिंग, 'द केरल स्टोरी 2' देखने से पहले पढ़ें ये रिव्यू
फिल्म- द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड
निर्देश- कामख्या नारायण सिंह
स्टारकास्ट- उल्का गुप्ता,ऐश्वर्या ओझा,अदिति भाटिया
मूवी रनटाइम- 2 घंटे 11 मिनट
स्टार- **
The Kerala Story 2 Review: साल 2023 में भारी विवादों के बीच रिलीज हुई फिल्म 'द केरल स्टोरी' ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी। अब निर्माता विपुल अमृतलाल शाह इसका सीक्वल 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' मूवी लेकर आए हैं। इस बार फिल्म का निर्देशन कामख्या नारायण सिंह ने किया है।

कानूनी और राजनीतिक बहस में घिर गई थी फिल्म
टीजर लॉन्च के साथ ही फिल्म एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस में घिर गई थी। मामला केरल हाई कोर्ट तक पहुंच या था, जहां शुरुआती सुनवाई में फिल्म को सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की आशंका बताते हुए रिलीज पर 15 दिनों की रोक लगा दी गई थी।
27 फरवरी 2026 की देर शाम रिलीज हुई फिल्म
हालांकि बाद में डिवीजन बेंच ने इस फैसले पर रोक हटाई और फिल्म गत 27 फरवरी 2026 की देर शाम सिनेमाघरों में रिलीज कर दी गई। आपको बता दें कि करीब 2 घंटे 11 मिनट लंबी ये फिल्म अपने विषय को जोरदार तरीके से पेश करने की कोशिश करती है लेकिन कहानी की गहराई और संतुलन कई जगह कमजोर पड़ते नजर आते हैं।
क्या है 'द केरल स्टोरी 2' की कहानी?
-फिल्म का नाम भले केरल पर आधारित हो लेकिन इसकी कहानी देश के अलग-अलग शहरों की तीन युवतियों की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है। सुरेखा (उल्का गुप्ता), कोच्चि की रहने वाली लड़की है, जो एक शादीशुदा पत्रकार सलीम से प्यार कर बैठती है। वहीं नेहा (ऐश्वर्या ओझा)- ग्वालियर की जेवलिन खिलाड़ी है, जो बेहतर भविष्य के सपने देखती है और फैजान पर भरोसा कर लेती है।
-इसके अलावा दिव्या (अदिति भाटिया)- जोधपुर की डांसर है, जो आजादी की तलाश में एक नए रिश्ते में कदम रखती है। तीनों की जिंदगी शादी के बाद अचानक बदल जाती है और उन्हें कठोर धार्मिक नियमों व व्यक्तिगत संघर्षों का सामना करना पड़ता है। फिल्म इसी बदलाव और उसके परिणामों को दिखाने की कोशिश करती है।
फिल्म का विषय गंभीर लेकिन कहानी कमजोर
-फिल्म शुरुआत से ही बेहद गंभीर और ऊंचे भावनात्मक टोन में चलती है। हालांकि कथानक धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और कई हिस्सों में कहानी दोहराव का शिकार लगती है।
-मूवी की रनटाइम का बड़ा हिस्सा एक ही मुद्दे पर केंद्रित रहता है, जिससे दर्शकों को कहानी में नया मोड़ या गहराई कम महसूस होती है। क्लाइमेक्स तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म का संदेश स्पष्ट जरूर हो जाता है लेकिन तब तक दर्शक थकान महसूस कर सकते हैं।
फिल्म के स्क्रीनप्ले और प्रस्तुति पर सवाल
-फिल्म का नैरेटिव एक खास दृष्टिकोण को मजबूती से सामने रखता है। विजुअल ट्रीटमेंट और कलर टोन के जरिए अलग-अलग समुदायों को अलग अंदाज में दिखाने की कोशिश की गई है जो कई जगह बेहद स्पष्ट और प्रतीकात्मक लगती है।
-बैकग्राउंड म्यूजिक लगातार हाई इंटेंसिटी बनाए रखता है जिससे कई सीन जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक महसूस होते हैं। कहानी में सूक्ष्मता और संतुलित प्रस्तुति की कमी साफ नजर आती है।
एक्टिंग बनी फिल्म की मजबूत कड़ी
-जहां स्क्रिप्ट कमजोर पड़ती है, वहां कलाकारों की मेहनत फिल्म को संभालने की कोशिश करती है। उल्का गुप्ता ने सुरेखा के किरदार में भावनात्मक संघर्ष को प्रभावी ढंग से निभाया है।
-वहीं अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा भी शादी के बाद के डर और मानसिक दबाव को स्क्रीन पर विश्वसनीय तरीके से दिखाने में सफल रही हैं। हालांकि सीमित स्क्रिप्ट उन्हें अपने किरदारों को पूरी तरह विस्तार देने का मौका नहीं देती।
-फिल्म इंटरफेथ रिश्तों और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित है और बिना किसी झिझक के अपना नजरिया पेश करती है। कहानी में कई कठोर और परेशान करने वाले दृश्य शामिल हैं, जिनमें हिंसा और मानसिक उत्पीड़न को विस्तार से दिखाया गया है। फिल्म खुद को वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताती है लेकिन इसका ट्रीटमेंट कई जगह एकतरफा नजर आता है।
क्यों देखें या न देखें 'द केरल स्टोरी 2'
अगर आप सामाजिक मुद्दों पर आधारित गंभीर सिनेमा की उम्मीद लेकर जा रहे हैं तो ये फिल्म शायद आपकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी न उतरे। मजबूत कहानी और संतुलित लेखन की कमी इसे प्रभावशाली बनने से रोकती है।












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