The Kashmir Files: न्यूजीलैंड में रिलीज पर लगी रोक तो पूर्व उप प्रधानमंत्री उतरे समर्थन में, कह डाली ये बात

नई दिल्ली, 20 मार्च। जम्मू कश्मीर से विस्थापित कश्मीरी पंडितों के विस्थापन पर बनी फिल्म द कश्मीर फाइल्स लगातार सुर्खियों में बनी ही है। फिल्म को एक तरफ जहां बड़ी संख्या में लोग पसंद कर रहे हैं तो दूसरी तरफ फिल्म पर धार्मिक हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है। फिल्म को लेकर अब न्यूजीलैंड में भी विवाद सामने आया है। दरअसल फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने आरोप लगाया था कि न्यूजीलैंड सेंसर बोर्ड पर दबाव है कि वह कश्मीर फाइल्स पर प्रतिबंध लगाए। विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि कुछ कम्युनल गुट सेंसर बोर्ड पर दबाव बना रहे हैं कि वह फिल्म को रिलीज ना होने दें।

 फिल्म के समर्थन में उतरे पूर्व उप प्रधानमंत्री

फिल्म के समर्थन में उतरे पूर्व उप प्रधानमंत्री

वहीं अब इस पूरे विवाद पर न्यूजीलैंड के पूर्व उप प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म को अगर रिलीज नहीं किया जाता है तो यह न्यूजीलैंड के निवासियों की आजादी पर हमला होगा। न्यूजीलैंड के पूर्व उपप्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि कश्मीर फाइल्स पर प्रतिबंध लगाया गया, यह न्यूजीलैंड के निवासियों की आजादी पर हमला है। कश्मीर फाइल्स को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और दुनिया के कई हिस्सों में रिलीज किया गया है। इस फिल्म को 1.1 बिलियन लोगों ने देख लिया है।

4 लाख कश्मीरी पंडित विस्थापित

उप प्रधानमंत्री ने कहा कि यह फिल्म सच्ची और असल घटनाओं पर आधारित है जोकि 1990 में हुई, जब वहां पर धर्म के आधार पर हिंदुओं का कश्मीर से विस्थापन किया गया और आज चार लाख से अधिक कश्मीरी पंडित 32 साल के बाद भी विस्थापितों का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाना न्यूजीलैंड में 15 को हुई घटना को प्रतिबंध करने के समान ही है। जैसे 9/11 हमले के बाद उसकी तमाम तस्वीरों को सार्वजनिक जगहों से हटा दिया गया था।

 आतंकी घटनाओं को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए

आतंकी घटनाओं को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए

मुख्य धारा के मुसलमानों ने न्यूजीलैंड और दुनियाभर के हिस्सों में इस तरह की घटना और आतंकी हमलों की निंदा की है। मुसलमानों ने इस्लाम के नाम पर होने वाली आतंकी घटनाओं की निंदा की है और कहा है कि इस्लाम के नाम पर हिंसा करना मुस्लिम नहीं है। इस्लाम के नाम पर जो आतंकी अपने किए को जायज ठहराते हैं उन्हें किसी भी तरह की शरण नहीं मिलनी चाहिए। आतंकवाद के हर रूप और स्रोत का खुलकर पर्दाफाश करना चहिए और उसका विरोध होना चाहिए। एक खास तरह के प्रतिबंध से न्यूजीलैड के लोगों की आजादी को नहीं छीना जा सकता है।

फिल्म के समर्थन में शुरू हुई पेटिशन

फिल्म के समर्थन में शुरू हुई पेटिशन

बता दें कि न्यूजीलैंड में द कश्मीर फाइल्स फिल्म को रिलीज करने के लिए एक अभियान की शुरुआत की गई है। इसके लिए एक पेटिशन को शुरू किया गया है। जिसमे कहा गया है कि फिल्म में जो ग्राफिक्स हैं, हिंसा को दिखाया गया है वह सच्ची घटनाओं पर आधारित है जोकि दस्तावेजों में दर्ज हैं। फिल्म लोगों के दर्दभरे अनुभवों को दुनिया के सामने रखने का माध्यम है।

 क्या कहना है न्यूजीलैंड के सेंसर बोर्ड का

क्या कहना है न्यूजीलैंड के सेंसर बोर्ड का

रिपोर्ट के अनुसार न्यूजीलैंड सेंसर बोर्ड ने फिल्म को बैन नहीं किया है बल्कि कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने फिल्म को लेकर आपत्ति जताई ती, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जा रही है। न्यूजीलैंड सेंसर बोर्ड के चीफ डेविड शैंक्स ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हमसे संपर्क किया था और कहा कि फिल्म में मुस्लिम विरोधी तत्व हैं, जिससे नफरत फैल सकती है। आरोप है कि फिल्म से तनाव फैल सकता है और न्यूजीलैंड में इस्लामोफोबिया को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन जो पेटिशन शुरू की गई है उसमे कहा गया है कि हम इस तरह के आरोपों को खारिज करते हैं क्योंकि लाखों लोगों ने इस फिल्म को देखा है और इस तरह की एक भी घटना नहीं घटी है।

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