The Kashmir Files: कश्मीरी पंडितों का कत्ल-ए-आम करने वाले बिट्टा कराटे पर आ गया था इस सरकारी अफसर का दिल
The Kashmir Files: कश्मीरी पंडितों का कत्ल-ए-आम करने वाले बिट्टा कराटे पर आ गया था इस सरकारी अफसर का दिल
नई दिल्ली, 25 मार्च। द कश्मीर फाइल्स फिल्म की चर्चा देश और दुनिया भर में हो रही है। कश्मीर के मुद्दे पर, वहां के कश्मीरी पंडितों के पलायन पर, उनपर हुए अत्याचारों की कहानी बयां कर रही इस फिल्म में 200 करोड़ की कमाई कर ली है। दूसरे हफ्ते में फिल्म भी फिल्म की कमाई का सिलसिला जारी है। द कश्मीर फाइल्स फिल्म के कारण बिट्टा कराटे की चर्चा फिर से होने लगी है। अलगाववादी नेता फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ आतंक का सबसे बड़े चेहरा बन गया था। उनसे खुद एक इंटरव्यू में कबूला कि उसने करीब 20 कश्मीरी पंडितों की हत्या की।

बिट्टा कराटे की लव स्टोरी
द कश्मीर फाइल्स फिल्म के आने के बाद जहां बट्टा कराटे की चर्चा होने लगी है तो वहीं उसकी बेगम असबाह आरज़ूमंद खान का नाम भी चर्चा में आ गया है। असबाह ने नवंबर 2011 में बट्टा कराटे से शादी की। असबाह एक सरकारी प्रशासनिक अफसर थी। जब उन्होंने अपने परिवार वालों को बताया कि वो फारूख अहमद डार उर्प बिट्टा कराटे से शादी करना चाहती हैं तो घरवालों के पैरों तले जमीन खिसक गई। हालांकि असबाह के जिद के सामने सबको झुकना पड़ा और नवंबर 2011 में बिट्टा से उन्होंने निकाह कर लिया।

सरकारी अफसर रही असबाह
असबाह कश्मीर प्रशासनिक सेवा (KAS) की अधिकारी थी। असबाह ने इंटरव्यी के दौरान कहा था कि बिट्टा कराटे से निकाह करना उसके लिए फ़र्क की बात है। उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात बिट्टा से साल 2008 में एक दोस्त के घर पर हुई थी। दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और फरि कुछ महीनों के बाद बिट्टा ने असबाह के सामने प्यार का इजहार किया। डेढ़ साल एक दूसरे को समझने के बाद दोनों ने शादी का फैसला किया। जब असबाह ने इस शादी के लिए अपने परिवार से बात की तो उन्होंने इस रिश्ते से इंकार कर दिया। वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी एक पूर्व आतंकी के साथ रिश्ता रखें और उससे निकाह करें, लेकिन असबाह ने जिद ठान ली कि वो शादी करेगी तो बिट्टा से ही। असबाह के जिद के सामने परिवार झुक गया और 1 नवंबर 2011 को फारूक अहमद डार और असबाह ने निकाह कर लिया।

16 साल की जेल
कश्मीरी पंडितों की निर्मम हत्या करने वाले आतंकी बिट्टा कराटे ने खुद इस बात को कबूला था कि उसने कम से कम 20 कश्मीरी पंडितों की हत्या अपने हाथों से की थी। उसने पंडितों की हत्या की शुरुआत अपने दोस्त से ही की। उस दोस्त से जिसके साथ वो खेलता था, जो उसे स्कूल जाने के लिए पैसे देते थे। JKLF का एरिया कमांडर रहते हुए बिट्टा कराटे ने घाटी में हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू किया। उसने इसकी शुरुआत अपने दोस्त सतीश कुमार टिक्कू से की और अपने करीबी दोस्त की हत्या कर दी। फिर उसने एक के बाद एक कर कई कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतारता चला गया। 2008 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया। अगर अगर धाराओं में आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में एनआईए ने भी उसे आरोपी बनाया। उसपर आरोप लगे कि अलगाववादियों की मदद और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उसने देश-विदेश से हवाला और अन्य अवैध चैनल के जरिए पैसा जुटाए।

टाडा कोर्ट से मिली जमानत
अलगाववादी नेता बट्टा कराटे पर निर्दोष लोगों की हत्या, घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसे करीब 19 से अधिक मामले दर्ज किए गए। साल 2008 में उसे सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत भी गिरफ्तार किया गया था। अमरनाथ विवाद के दौरान भी उसे गिरफ्तार किया गया, लेकिन 16 साल सलाखों के पीछे रहने के बाद 23 अक्टूबर, 2006 को उसे टाडा अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया।












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