इस मशहूर अभिनेता के पास थे 10 रुपए, पत्नी का स्पेशल दिन भी नहीं कर पाए थे सेलिब्रेट, आज हैं करोड़ों के मालिक
Pankaj Tripathi Struggle: बॉलीवुड इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों में शुमार किए जाने वाले अभिनेताओं में पंकज त्रिपाठी का भी नाम शामिल है। बिहार के गोपालगंज ज़िले से ताल्लुक रखने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने काफी संघर्ष के बाद कामयाबी की बुलंदियों को छुआ है।
पंकज त्रिपाठी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि एक वक्त ऐसा भी उनकी ज़िंदगी में आया था, जब उनके पास जेब में सिर्फ़ 10 रूपये का नोट था। इस वजह से वह अपनी पत्नी का जन्मदिन भी नहीं मना सके थे।

अपनी मेहनत और लगन से ख़ुद की अलग पहचान बना चुके अभिनेता पंकज त्रिपाठी के बारे संघर्ष की कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। इसे पढ़कर आप भी कहेंगे कि जज्बा हो तो पंकज त्रिपाठी जैसा, जिन्होंने मुश्किल को मात देते हुए इस मुकाम को हासिल किया।
पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसांद गांव में हुआ था। उन्होंने पेड़ के नीचे बैठकर अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। गांव में हर साल छठ पूजा में नाटक कार्यक्रम में उन्हें लड़की का किरदार दिया जाता था।
10वीं की पढ़ाई मुकम्मल करने के बाद परिवार के लोगों ने उन्हें पटना भेज दिया। बहुत ही तंगी में उन्होंने एक साल तक दाल, चावल और खिचड़ी खाकर पढ़ाई की। एक छोटे से कमरे में, टीन की छत में रात गुजारते हुए उन्होंने 12वीं पास की।

12वीं पास करने के बाद दोस्तों और परिवार वालों के कहने पर होटल मैनेजमेंट का शॉर्ट टर्म कोर्स में दाखिला लिया। इसी दौरान वह RSS से जुड़े, और ABVP के सदस्य बन गए। लालू सरकार की छात्र विरोधी नीति का साल 1993 में विरोध हो रहा था। पंकज त्रिपाठी भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
आंदोलन कारी छात्र विधानसभा का घेराव करने गए। उनके के साथ पंकज भी थे, पुलिस ने आंदोलनकारियों को जेल में डाल दिया। पंकज त्रिपाठी को भी सात दिनों तक जेल में रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने जेल की पुस्तकालय में विभिन्न साहित्यकारों की किताबों का मुआयना किया। इससे उनकी साहित्य में रुचि बढ़ी।

पटना में एक नाटक 'अंधा कुआं' से काफ़ी प्रेरित हुए। इसके बाद थियेटर से उनकी दिलचस्पी बढ़ती गई। पंकज त्रिपाठी कालीदास रंगालय से जुड़े, फिर वह दो साल तक बिहार आर्ट थिएटर से जुड़े रहे। इसी बीच उन्हें होटल मैनेजममेंट की ट्रेनिंग के लिए होटल मौर्या (पटना) में किचन सुपरवाइजर की नाइट शिफ्ट में जॉब भी मिल गई। लेकिन, वह बिहार आर्ट थिएटर से भी जुड़े रहे।
तीसरी कोशिश में उनका सेलेक्शन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में हुआ। पंकाज त्रिपाठी ने अपने पिता से कहा कि ड्रामा टीचर या फिर प्रोफेसर की नौकरी मिल जाएगी। इसके बाद पंकज ने होटल की नौकरी छोड़ी और दिल्ली रवाना हो गए। वहां कोर्स खत्म किया।
पैसों की तंगी की वजह से फिर से उन्हें पटना का रुख करना पड़ा। साल 2004 में उनकी शादी मृदुला से हुई, शादी के बाद दोनों कुछ महीने पटना रहे। इसके बाद फिर से मुंबई पहुंचे औक वन बीएचके मकान किराये पर लिया, और रोज़गार की तलाश में चक्कर लगाना शुरू किया।
पंकज त्रिपाठी की ज़िंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया जब उनकी पत्नी के जीवन का सबसे ख़ास दिन (जन्मदिन) था। पंकज की जेब में सिर्फ़ 10 रुपये थे, कैसे तोहफ़ा देते और कहां से केक लाते। इसके बाद पंकज उन्होंने सोचा ऐसी ज़िंदगी से बेहतर है कि वापस अपने गांव ही चला जाऊं।
पंकज त्रिपाठी की पत्नी मृदुला ने बीएड कोर्स कर रखा था, इसलिए उन्हें एक स्कूल में शिक्षिका की नौकरी मिल गई। फिर पंकज और उनकी पत्नी ने तय किया कि अब वाप, नहीं लौटेंगे। धीरे-धीरे पंकज को भी छोटे मोटे रोल मिले और कामयाबी की बुलंदियों को छूते चले गए।

आज की तारीख में वह एक अच्छे कलाकारों में शुमार किये जाते हैं। इसके साथ ही करोड़ों की संपत्ति के मालिक भी बन चुके हैं। पंकज त्रिपाठी बिहार के काफी युवाओं के लिए आदर्श हैं, जो बॉलीवुड में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।












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