सोनू निगम सक्सेस स्टोरी: फरीदाबाद से पद्मश्री तक, मिलेगा राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान, नेटवर्थ कर देगी हैरान
Sonu Nigam Success Story: संगीत की दुनिया के सुरसम्राट कहे जाने वाले सोनू निगम (52) इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। वजह है मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उन्हें वर्ष 2025 का राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान पार्श्व गायन के लिए प्रदान करने की घोषणा। बचपन में स्कूल की बेंच पर बैठकर रियाज करने वाला हरियाणा का यह लड़का आज देश-विदेश में अपनी आवाज़ का जादू बिखेर रहा है, लेकिन यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।

फरीदाबाद से सुरों का सफर
दिल्ली से सटे हरियाणा के फरीदाबाद में 30 जुलाई 1973 को जन्मे सोनू निगम के पिता अगम कुमार निगम और मां शोभा निगम, दोनों ही स्टेज सिंगर थे। घर की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन माहौल पूरी तरह संगीतमय था। बचपन में सोनू अक्सर पिता के साथ शादी-ब्याह और स्थानीय आयोजनों में गाने जाते थे। संगीत सीखने की ललक इतनी थी कि वे स्कूल की बेंच पर बैठकर भी रियाज कर लेते।
मुंबई में शुरुआती संघर्ष
1991 में, 18 साल की उम्र में, सोनू अपने पिता के साथ मुंबई पहुंचे। सपनों के इस शहर में उन्हें कई बार कड़वे अनुभव मिले। म्यूजिक डायरेक्टर्स के दफ्तरों में घंटों इंतजार, कभी चपरासी द्वारा बाहर निकाल दिया जाना, तो कभी यह सुनना कि किसी मशहूर गायक की नकल करो। लेकिन सोनू ने अपनी मौलिक पहचान से समझौता करने से साफ मना कर दिया।
पहला बड़ा मौका और पहचान
करीब चार साल के संघर्ष के बाद 1995 में उनकी किस्मत बदली, जब गुलशन कुमार ने उन्हें फिल्म बेवफा सनम का गाना ''अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का'' गाने का मौका दिया। यह गाना सुपरहिट हुआ और सोनू की आवाज़ लोगों के दिलों में बस गई। फिर साल 1997 में फिल्म बॉर्डर का गाना ''संदेशे आते हैं...'' उनकी लोकप्रियता को नए आयाम तक ले गया।
सफलता और सम्मान
इसके बाद सोनू निगम ने कल हो न हो, अभी मुझमें कहीं, साथिया जैसे अनगिनत हिट गाने दिए। 2004 में उन्हें कल हो न हो के टाइटल सॉन्ग के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 2022 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। आज उनकी नेटवर्थ लगभग 370 करोड़ रुपये है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी हमेशा संगीत रहा।
अब मिलेगा राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान
मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही घोषणा की है कि 2025 का राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान पार्श्व गायन के लिए सोनू निगम को मिलेगा। यह सम्मान 28 सितंबर को इंदौर में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। वर्ष 2024 का यह सम्मान संगीत निर्देशन के लिए शंकर-एहसान लॉय को मिलेगा। साथ ही, 2024 का राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान गीत लेखन के लिए प्रसून जोशी को और 2025 का यह सम्मान निर्देशन के लिए संजय लीला भंसाली को दिया जाएगा।












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