Son of Sardaar 2 Movie Review: देसी स्वैग, हंसी-मजाक और इमोशनल जर्नी है अजय देवगन की फिल्म
Son of Sardaar 2 Movie Review: ज़िंदगी की भागदौड़, तनाव और रोजमर्रा की उलझनों के बीच जब दिल और दिमाग थक जाए। तब एक कॉमेडी फिल्म इस थकान को मिटाने का काम कर सकती है। कुछ देर के लिए ही सही, लेकिन जब हंसी आपके चेहरे पर खिलती है, तो सारे गम हल्के भी लगने लगते हैं। ऐसी ही फिल्म विजय कुमार अरोड़ा लेकर आए हैं। "सन ऑफ सरदार 2" जिसमें कहानी तो खिचड़ी है, लेकिन हंसाती है।

फ़िल्म की शुरुआत होती है जसविंदर "जस्सी" सिंह रंधावा (अजय देवगन) से, जो लंदन पहुंचता है। अपनी पत्नी डिंपल (नीरू बाजवा) के साथ फिर से एक नई शुरुआत की उम्मीद लेकर। लेकिन वहीं एक झटका मिलता है जब डिंपल बताती है कि उसका किसी और से दिल लग चुका है। वह तलाक चाहती है। जस्सी अपना आत्मविश्वास खो देता है, और इस टूटे मन के साथ एक नया अध्याय शुरू होता है। इस उलझी हुई ज़िंदगी में जस्सी की राह राबिया (मृणाल ठाकुर) से टकराती है। एक होनहार पाकिस्तानी महिला, जो शादी-ब्याह के इवेंट्स में डांस कंपनी चलाती है। जस्सी की मदद करने से शुरू हुई यह मुलाकात धीरे-धीरे एक मजबूत दोस्ती में बदल जाती है।
दूसरी कहानी पिरोती है दानिश (चंकी पांडे) और उसकी बेटी सबा (रॉशनी वालिया) के इर्द-गिर्द। सबा को प्यार हो जाता है गोग्गी (साहिल मेहता) से। लेकिन गोग्गी के माता-पिता, विशेष रूप से राजा संधू (रवि किशन), चाहते हैं कि बहू पूरी तरह भारतीय संस्कारों वाली हो। क्योंकि सबा पाकिस्तानी है और पारंपरिक सोच वाले परिवार से आती है, रिश्ता मंजूर करवाना संभव नहीं लगता। यहां से शुरू होता है फिल्म का सबसे मजेदार और दिलचस्प ट्विस्ट-जस्सी को झूठा "संस्कारी फौजी पिता" बनना पड़ता है। वह खुद को राजा संधू के सामने एक भारतीय पूर्व सैनिक के रूप में पेश करता है, ताकि ग्रुप की पाकिस्तानी पहचान गुप्त रहे । धीरे-धीरे यह झूठ एक नए रिश्ते की नींव बन जाता है। इसके बाद फिल्म में मजेदार घटनाएं शुरू होती हैं - जहां झूठ बोलकर सच्चाई छुपाई जाती है, मेहमानों की खातिरदारी होती है, प्यार पनपता है और डांस का तड़का लगता है।
अजय देवगन ने जस्सी के किरदार में जबरदस्त जान डाल दी है। उनकी कॉमिक टाइमिंग, भावनात्मक दृश्यों में गहराई और देसी स्वैग फिल्म की जान बन जाता है। हर सीन में उनका अंदाज़ देखने लायक है और वो पूरी कहानी को मजबूती से संभालते हैं।मृ णाल ठाकुर ने राबिया के किरदार में बेहद सहज और आत्मविश्वासी अभिनय किया है। उनकी अदाकारी में एक सादगी है, जो जस्सी के साथ उनकी केमिस्ट्री को और भी गहरा और असरदार बनाती है। वहीं रवि किशन ने राजा संधू के किरदार में अपने खास अंदाज़ को एक नया रंग दिया है। अपने चिर-परिचित बिहारी ठाठ में इस बार उन्होंने सिख सरदार का स्वैग भी जोड़ दिया है, जो हर फ्रेम में मज़बूती से नजर आता है।
दीपक डोबरियाल इस फिल्म की सबसे बड़ी सरप्राइज़ पैकेज हैं। उन्होंने ट्रांसजेंडर किरदार 'गुल' को जिस संवेदनशीलता, गरिमा और ह्यूमर के साथ निभाया है, वह काबिल-ए-तारीफ़ है। न तो किरदार को मज़ाक बनाया गया है, और न ही उस पर अतिरिक्त दया जताई गई है-बल्कि गुल एक ऐसा किरदार बनकर सामने आता है जो दिल को छू जाता है और कहानी में गहराई जोड़ता है। बाक़ी कलाकार-संजय मिश्रा, कुब्रा सैत, नीरू बाजवा, विंदू दारा सिंह, चंकी पांडे, अश्विनी कालेसेकर- सभी ने संतुलित और दमदार अभिनय दिया है। दिवंगत मुकुल देव ने भी अपनी छोटी सी भूमिका से गहरा प्रभाव छोड़ा है।
विजय कुमार अरोड़ा का काम बढ़िया है। लेकिन इसकी कहानी में अभी और भी काम किया जा सकता था। क्योंकि कहानी में कई जगह बिखराव दिखता है। हालांकि इसे क्लाइमैक्स में संभालने की कोशिश की गई है। लेकिन तबतक थोड़ी देर हो जाती है। लेकिन कॉमेडी फिल्म अगर आपको हंसाते हुए सिनेमाघर से निकले पर मजबूर करती है, तो उसका उद्देश्य पूरा हो जाता है। सन ऑफ सरदार 2 के साथ भी यही हुआ है। क्लाइमैक्स से लेकर एंडिंग तक आप हंसते हैं। फिर वो कहवात तो है ही, अंत भला तो सब भला।
फिल्म रिव्यू- सन ऑफ सरदार 2
निर्देशक - विजय कुमार अरोड़ा
कलाकार - अजय देवगन, रवि किशन, मृणाल ठाकुर औप दीपक डोबरियाल
रेटिंग- 4 स्टार्स












Click it and Unblock the Notifications