Saif Ali Khan का ‘रॉयल’ मोमेंट! ‘पटौदी स्टाइल’ में जीत – 15,000 करोड़ की संपत्ति केस में SC से राहत

Saif Ali Khan News: भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की करीब 15,000 करोड़ रुपये की शाही संपत्ति को लेकर चल रहा दशकों पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें इस मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस भेजा गया था।

इस फैसले से बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर, और बहनें सोहा अली खान व सबा अली खान को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और अतुल चंदुरकर की बेंच ने नवाब के बड़े भाई के वंशज उमर फारुक अली और राशिद अली की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। आइए जानते हैं इस हाई-प्रोफाइल संपत्ति विवाद की पूरी कहानी...

Saif Ali Khan News


क्या है मामला?

यह विवाद भोपाल रियासत के अंतिम नवाब मोहम्मद हमीदुल्लाह खान की निजी संपत्तियों से जुड़ा है, जिनकी कीमत करीब 15,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। इनमें फ्लैग स्टाफ हाउस, नूर-उस-सबाह पैलेस, दार-उस-सलाम, हबीबी का बंगला, अहमदाबाद पैलेस, और कोहेफिजा की प्रॉपर्टी शामिल हैं। नवाब की तीन बेटियां थीं-आबिदा सुल्तान, साजिदा सुल्तान, और राबिया सुल्तान। आबिदा सुल्तान 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद पाकिस्तान चली गईं और वहां की नागरिकता ले ली, जबकि साजिदा सुल्तान भारत में रहीं। साजिदा ने नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी से शादी की, जिनके बेटे मंसूर अली खान पटौदी (पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान) और उनकी पत्नी शर्मिला टैगोर के बच्चे सैफ, सोहा, और सबा हैं।

1960 में नवाब हमीदुल्लाह की मृत्यु के बाद, भारत सरकार ने 10 जनवरी 1962 को एक प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 366(22) के तहत साजिदा सुल्तान को नवाब की निजी संपत्ति की एकमात्र उत्तराधिकारी माना गया। 2000 में भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने भी साजिदा, उनके बेटे मंसूर अली खान, और उनके उत्तराधिकारियों (सैफ, सोहा, सबा, और शर्मिला) को संपत्ति का वैध हकदार घोषित किया था।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

नवाब के अन्य वंशजों, जिनमें बेगम सुरैया राशिद (अब स्वर्गीय), उनके बच्चे (महाबानो, नीलोफर, नादिर, यावर), और नवाबजादी कमर ताज राबिया सुल्तान शामिल हैं, ने 1999 में ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने दावा किया कि संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट, 1937 के तहत सभी वैध उत्तराधिकारियों के बीच होना चाहिए, न कि केवल साजिदा सुल्तान को मिलना चाहिए। उनका तर्क था कि ट्रायल कोर्ट ने गलत तरीके से यह मान लिया कि संपत्तियां सिंहासन का हिस्सा हैं और स्वतः साजिदा को हस्तांतरित हो गईं।

इसके अलावा, केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के तहत इन संपत्तियों को 'दुश्मन संपत्ति' घोषित कर दिया, क्योंकि आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गई थीं। इस कानून के अनुसार, विभाजन के समय पाकिस्तान जाने वाले व्यक्तियों की भारत में संपत्तियां सरकार के नियंत्रण में आ जाती हैं। सैफ अली खान ने 2015 में इस आदेश के खिलाफ स्थगन प्राप्त किया था, लेकिन 13 दिसंबर 2024 को यह स्थगन हट गया।


मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला

जुलाई 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने ट्रायल कोर्ट के 14 फरवरी 2000 के फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 1997 के फैसले पर भरोसा किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के अन्य पहलुओं, जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ और संवैधानिक प्रावधानों, पर विचार नहीं किया। इसलिए, कोर्ट ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट को वापस भेज दिया और एक साल में फैसला सुनाने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट की ताजा कार्रवाई

सैफ अली खान के चचेरे भाइयों उमर फारुक अली और राशिद अली ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने तर्क दिया कि 50 साल पुराने मामले को दोबारा ट्रायल कोर्ट भेजना सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के नियम 23 से 25 के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि न तो याचिकाकर्ताओं ने और न ही प्रतिवादियों ने दोबारा ट्रायल की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी और नोटिस जारी किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख का इंतजार है।

क्यों है यह मामला अहम?

यह विवाद न केवल संपत्ति का मसला है, बल्कि इसमें शाही विरासत, मुस्लिम पर्सनल लॉ, संवैधानिक प्रावधान, और शत्रु संपत्ति अधिनियम जैसे जटिल कानूनी पहलू शामिल हैं। सैफ अली खान का परिवार इस संपत्ति को अपनी ऐतिहासिक विरासत मानता है, जबकि अन्य वंशज इसे सभी उत्तराधिकारियों में बांटने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार का 'दुश्मन संपत्ति' का तर्क इस मामले को और पेचीदा बनाता है।

संपत्तियों में भोपाल और आसपास की हजारों एकड़ जमीन, ऐतिहासिक महल, और अन्य प्रॉपर्टी शामिल हैं, जो सैफ और उनके परिवार के लिए भावनात्मक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश पटौदी परिवार के लिए राहत की सांस लेकर आया है, लेकिन इस कानूनी जंग का अंत अभी बाकी है।

क्या होगा आगे?

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब ट्रायल कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगी रहेगी, जब तक कि शीर्ष अदालत इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुना देती। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सैफ अली खान और उनका परिवार इस शाही विरासत को बरकरार रख पाएंगे, या फिर संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत होगा, या सरकार इसे 'दुश्मन संपत्ति' के रूप में अपने नियंत्रण में ले लेगी। इस मामले की अगली सुनवाई और कोर्ट का अंतिम फैसला इस ऐतिहासिक विवाद की दिशा तय करेगा।

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