स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर बनेंगे रणदीप हुड्डा, फैंस को दिखाया फर्स्ट लुक
मुंबई, 23 मार्च: फिल्म 'सरबजीत' की सफलता के बाद प्रोड्यूसर संदीप सिंह अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'स्वतंत्र वीर सावरकर' बनाने जा रहे हैं। इस फिल्म में रणदीप हुड्डा अब स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के किरदार में नजर आएंगे। इस फिल्म की शूटिंग जून 2022 से शुरू होने जा रही है। इस फिल्म की शूटिंग लंदन, महाराष्ट्र और अंडमान-निकोबार में होगी। फिल्म का डायरेक्शन महेश मांजरेकर करने जा रहे हैं।

बड़े पर्दे पर वीर सावरकर बनेंगे रणदीप हुड्डा
बेहतरीन अदाकारी से फैंस के दिलों पर राज़ करने वाले रणदीप अब एक ऐतिहासिक किरदार करने जा रहे हैं। रणदीप उनकी अमर गाथा को अपने अभिनय के जरिए जीवंत करेंगे। रणदीप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट मेकर्स के साथ वाली और फिल्म से अपने लुक की तस्वीरें शेयर की हैं। इस महत्वाकांक्षी फिल्म की शूटिंग इसी साल 2022 जून से शुरू हो जाएगी। रणदीप हुड्डा इस किरदार को निभाने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
ये है फर्स्ट लुक
प्रोजेक्ट और अपनी भूमिका के बारे में मिड-डे से बात करते हुए रणदीप हुड्डा ने कहा, 'ऐसे बहुत से हीरो हैं जिन्होंने आजादी पाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हालांकि हर किसी को उतना महत्व नहीं दिया गया। विनायक दामोदर सावरकर को सबसे ज्यादा गलत समझा गया। ऐसे हीरोज की कहानी जरूर बताई जानी चाहिए।' फिल्म एक अलग स्पेक्ट्रम से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को उजागर करेगी।

महेश मांजरेकर ने सवारकर को लेक कही ये बात
वीर सावरकर की इस अनकही कहानी का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता महेश वी मांजरेकर करेंगे। इस बायोपिक के बारे में निर्देशक महेश वी मांजरेकर कहते हैं, 'यह उन कहानियों को बताने का सही समय है, जिन्हें हमने नजर अंदाज किया था। स्वतंत्र वीर सावरकर एक नुकीला सिनेमाई आख्यान होगा जो हमें अपने इतिहास को फिर से देखने के लिए मजबूर करेगा। मैं संदीप सिंह के साथ काम करना चाहता था और मुझे खुशी है कि हम इस फिल्म को एक साथ कर रहे हैं।'

रणदीप की हो रही है तारीफ
संदीप ने भी रणदीप की तारीफ करते हुए कहा कि भारत में कुछ ही ऐसे एक्टर हैं जो ऐसे विवादित ऐतिहासिक किरदार को निभा सकते हैं। 'भारत में बहुत कम अभिनेता हैं जो अपनी प्रतिभा से जादू बिखेर सकते हैं, और रणदीप उनमें से एक हैं। वीर सावरकर को भारतीय इतिहास के सबसे विवादास्पद पात्रों में से एक मानते हुए, मैं केवल रणदीप के बारे में सोच सकता था। वीर सावरकर के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, मुझे आश्चर्य है कि हमारी इतिहास की किताबों में वीर सावरकर का कभी उल्लेख क्यों नहीं किया गया?'












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