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Prem Sagar Net Worth: प्रेम सागर का पाकिस्तान से क्या कनेक्शन? ‘रामायण’ के वारिस की संपत्ति कितनी?

Prem Sagar Net Worth: भारतीय टेलीविजन के इतिहास में 'रामायण' की गूंज आज भी कायम है, और इसके पीछे पद्मश्री डॉ. रामानंद सागर के साथ उनके बेटे प्रेम सागर का भी अहम योगदान था। 31 अगस्त 2025 को 84 साल की उम्र में प्रेम सागर का निधन हो गया, लेकिन उनकी सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन की दुनिया में छोड़ी गई छाप अमर है।

सवाल यह है कि सागर आर्ट्स के इस दिग्गज की नेटवर्थ कितनी थी? लाहौर से उनका क्या कनेक्शन था? और उनकी कमाई का स्रोत क्या रहा? आइए, प्रेम सागर की संपत्ति, लाहौर से उनके परिवार की जड़ें, और सागर आर्ट्स की चमक को करीब से देखते हैं...

Prem Sagar Net Worth

Prem Sagar Net Worth- प्रेम सागर की नेटवर्थ कितनी?

प्रेम सागर (1941 - 31 अगस्त 2025), रामानंद सागर के चार बेटों (आनंद, प्रेम, मोती, सुभाष) और एक बेटी (सरीता) में से एक थे। रामानंद सागर की विरासत 'सागर आर्ट्स प्रोडक्शंस हाउस' को आगे बढ़ाने में अन्य 4 बच्चों में से प्रेम सागर की अहम भूमिका रही। प्रेम सागर ने 1968 में पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से सिनेमैटोग्राफी की पढ़ाई की और अपने पिता के साथ सागर आर्ट्स में काम शुरू किया।

प्रेम सागर की सटीक नेटवर्थ पर कोई पक्का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि उन्होंने हमेशा सादगी भरा जीवन जिया और अपनी संपत्ति को पब्लिकली जाहिर नहीं किया। प्रेम सागर ने अपने पिता रामानंद सागर के प्रोडक्शन हाउस 'सागर आर्ट्स' को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सागर आर्ट्स की वैल्यूएशन करोड़ों में है, और 'रामायण' की 2020 में री-टेलीकास्ट ने इसकी ब्रांड वैल्यू को और बढ़ाया। अनुमान है कि सागर आर्ट्स की कुल वैल्यू 10-20 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है, जिसमें प्रेम सागर की हिस्सेदारी अहम थी।

Prem Sagar Pakistan-Lahore Connection:लाहौर से गहरा कनेक्शन: सागर परिवार की जड़ें

प्रेम सागर का लाहौर से कनेक्शन उनके पिता रामानंद सागर के जरिए था। रामानंद सागर का जन्म 29 दिसंबर 1917 को लाहौर के पास असल गुरु के गांव में हुआ था। उनके परदादा लाला शंकर दास चोपड़ा लाहौर से कश्मीर चले गए थे। रामानंद ने 1932 में लाहौर में मूक फिल्म 'रेडर्स ऑफ द रेल रोड' में क्लैपर बॉय के तौर पर काम शुरू किया। 1944 में उन्होंने पंजाबी फिल्म 'कोयल' में एक्टिंग की, जो लाहौर में शूट हुई।

1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद रामानंद मुंबई चले आए, लेकिन लाहौर में उनकी कुछ संपत्ति होने की बात कही जाती है, जिसके दस्तावेज आज तक साफ नहीं हुए। प्रेम सागर का जन्म मुंबई में हुआ, लेकिन उनके परिवार की जड़ें लाहौर से जुड़ी रहीं। रामानंद ने 1948 में विभाजन के अनुभवों पर आधारित किताब और इंसान मर गया लिखी, जो हिंदी-उर्दू में छपी और उस दौर की क्रूरता को बयां करती है। प्रेम सागर ने अपने पिता की इस विरासत को आगे बढ़ाया और सागर आर्ट्स को ग्लोबल ब्रांड बनाया। लाहौर से शुरू हुई यह कहानी मुंबई के 'सागर विला' तक पहुंची, जो आज भी सागर परिवार की शान है।

लाहौर से शुरू हुई यह कहानी मुंबई के 'सागर विला' तक

लाहौर से शुरू हुई रामानांद सागर की कहानी मुंबई के 'सागर विला' तक पहुंची, जो आज भी सागर परिवार की शान है। इससे पहले वे नेशनल हाईवे 11 के पीछे एक फ्लैट में रहते थे। सूत्रों के मुताबिक, प्रेम सागर के पास मुंबई के जुहू में 'सागर विला' में हिस्सेदारी थी, जो सागर परिवार का पुश्तैनी घर है। इसके अलावा, सागर आर्ट्स के प्रोडक्शन स्टूडियो और डबिंग स्टूडियो की वैल्यू भी उनकी संपत्ति का हिस्सा थी। प्रेम सागर की नेटवर्थ का बड़ा हिस्सा सागर आर्ट्स के प्रोजेक्ट्स से आया, जो टीवी और सिनेमा में मील का पत्थर बने। 'रामायण' की री-टेलीकास्ट (2020) ने भी सागर आर्ट्स की वैल्यू बढ़ाई। अब प्रेम सागर के बाद उनके बेटे शिव सागर अब सागर आर्ट्स को संभाल रहे हैं।

प्रेम सागर के सफर पर नजर

  • सागर आर्ट्स प्रोडक्शंस: पिता रामानंद सागर ने अपने प्रोडक्शन हाउस 'सागर आर्ट्स' के तहत कई हिट फिल्में और टीवी सीरियल्स बनाए। इनमें 'रामायण', 'विक्रम और बेताल', 'श्री कृष्णा', और 'अलिफ लैला' शामिल हैं। इस दौरान प्रेम सागर ने सिनेमैटोग्राफी की।
  • सिनेमैटोग्राफी: प्रेम ने 'ललकार' (1972), 'चरस' (1976), और 'आंखें' (1968) जैसी फिल्मों में सिनेमैटोग्राफर के तौर पर काम किया। 'चरस' 1976 की टॉप-5 ग्रॉसिंग फिल्मों में शामिल थी।
  • निर्देशन: 'हम तेरे आशिक हैं' (1979) को डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया।

प्रेम सागर की मेहनत ने सागर आर्ट्स को एक ब्रांड बनाया, जिसका वैल्यूएशन करोड़ों में माना जाता है। उनके बेटे शिव सागर ने भी 'महिमा शनि देव की' और 'रामायण 2008' जैसे शोज बनाकर इस विरासत को आगे बढ़ाया। प्रेम सागर भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन 'रामायण', 'विक्रम और बेताल', और 'अलिफ लैला' जैसे शोज उनकी अमर कहानी बयां करते हैं।

(नोट- खबर मीडिया सोर्स के हवाले से है, जानकारी पर वनइंडिया दावा नहीं करता है। )

ये भी पढ़ें- Prem Sagar :'चरस' बनाने वाले ने क्यों बनाई Ramayan? सालों बाद प्रेम सागर ने खोला था राज

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