Oscar 2024: 67 साल पुराना है ऑस्कर में भारतीय फिल्मों का इतिहास, कुछ को मिली सफलता तो कुछ रहे नाकाम

Oscar Indian Cinema: 96वें एकेडमी पुरस्कार अब कुछ ही घंटों में शुरू होने वाला है। इस समारोह को आज यानी 10 मार्च को लॉस एंजिल्स में हॉलीवुड के प्रेसटिजियस डॉल्बी थिएटर में आयोजित किया गया है। इस समारोह को भारत में आगामी 11 मार्च 2024 की सुबह 4 बजे से ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी पलास हॉटस्टार पर लाइव देखा जा सकेगा।

ऑस्कर और भारतीय सिनेमा का इतिहास
ऑस्कर अवॉर्ड 2024 समारोह को स्टार मूवीज, स्टार मूवीज एचडी और स्टार वर्ल्ड जैसे चैनल्स पर भी लाइव देखा जा सकेगा। इस साल ऑस्कर में भारत की ओर से बेस्ट डाक्यूमेंट्री कैटेगरी में 'टू किल ए टाइगर' को भेजा गया है। आपको बता दें कि ऑस्कर से भारतीय सिनेमा का इतिहास काफी पुराना है।

Oscar Indian Cinema

एआर रहमान ने ऑस्कर अवॉर्ड अपने नाम किया
साल 1957 से लेकर 2023 तक आयोजित हुए ऑस्कर में भारतीय सिनेमा का सफर ज्यादातर नाकाम रहा है। हालांकि साल 2023 में भारत का सपना पूरा हुआ और फिल्म 'आरआरआर' के गाने 'नाटू-नाटू' ने ऑस्कर जीता था। इसके पहले एआर रहमान ने भी ऑस्कर अवॉर्ड अपने नाम किया है।

ऑस्कर के इतिहास में भारतीय सिनेमा का सफर
साल 1929 में शुरू हुए ऑस्कर अवॉर्ड में पहली भारतीय फिल्म मदर इंडिया (1957) थी। 30वें अकादमी पुरस्कारों में पहली बार निर्देशक महबूब खान की फिल्म मदर इंडिया भेजी गई थी। ये बॉलीवुड की शानदार फिल्मों में से एक है। ये फिल्म ऑस्कर गैलरी तक तो पहुंची लेकिन जीत नहीं सकी। इसके बाद करीब 55 फिल्में ऑस्कर में पहुंची जिनका सफर एक-एक कदम आगे बढ़ा लेकिन अंत में जीत कुछ को ही मिली।

भारत की कई फिल्मों को ऑस्कर के लिए भेजा गया था
38वें ऑस्कर में हिंदी भाषा की फिल्म 'गाइड' (1965), 45वें ऑस्कर में 'उपहार' (1971), 46वें ऑस्कर में 'सौदागर' (1991), 60वें ऑस्कर में तमिल भाषा की 'नयाकन' (1987), 67वें ऑस्कर में हिंदी भाषा की 'बैंडिट क्वीन (1994), 75वें ऑस्कर में हिंदी भाषा की 'देवदास' (2002), 85वें ऑस्कर में हिंदी भाषा की 'बर्फी' (2012), 93वें ऑस्कर में मलयालम भाषा की 'जल्लीकट्टू' (2019), 96वें ऑस्कर में मलयालम भाषा की '2018' जैसी फिल्मों का नाम शामिल है।

फिल्म मेकर्स ऑस्कर की दावेदारी पेश करते हैं
भारत से हिंदी भाषा के अलवा तेलुगु, मराठी, बंगाली, उर्दू और गुजराती फिल्में भी ऑस्कर में शामिल हुई थीं। हर साल फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की ज्यूरी कई फिल्मों को ऑस्कर के लिए भेजती है। दूसरी तरफ कुछ मेकर्स भी अपनी फिल्मों को लेकर ऑस्कर की दावेदारी पेश करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक 56 में से सिर्फ 4 फिल्में ही हैं जो ऑस्कर अवॉर्ड में काफी आगे तक जा पाई हैं।

साल 1957 में आई फिल्म 'मदर इंडिया ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुई थी। साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म 'सलाम बॉम्बे' भी नॉमिनेट हुई थी। इसके बाद साल 2001 में आई फिल्म 'लगान' को भी नॉमिनेशन मिला था। वहीं साल 2022 में आई फिल्म 'छेल्लो शो' को शॉर्ट लिस्ट किया गया था। हालांकि इन फिल्मों का सफर बस इन्हीं नतीजों के साथ थम गया।

फिल्ममेकर सत्यजीत रे को मिला था ऑस्कर अवॉर्ड
साल 1983 में आई फिल्म 'गांधी' के लिए भानु अथैया ने कॉस्ट्यूम डिजाइन किया था और इसके लिए उन्हें ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। साल 1991 में भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर सत्यजीत रे को 'ऑनरेरी लाइफटाइम अचीवमेंट' ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

एआर रहमान और 'नाटू-नाटू' ने रचा था इतिहास
साल 2009 में आई फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के 'जय हो' गाने के लिए गीतकार गुलजार को ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वहीं इस गाने को कंपोज करने के लिए एआर रहमान को भी ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसी फिल्म के रेसु पोक्कुट्टी को 'बेस्ट साउंड मिक्सिंक' कैटेगरी में ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इस तरह से 5 बार ऑस्कर भारत आया था।

फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा ने भी जीता अवॉर्ड
साल 2023 में 95वें अकादमी अवॉर्ड में साउथ की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' के फेमस गाने 'नाटू-नाटू' को बेस्ट ओरिजनल सॉन्ग के लिए एम एम किरवानी और चंद्रबोस को ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा को 'द एलिफेंट व्हिस्पर्स' के लिए बेस्ट डॉक्यूमेंट्री के लिए ऑस्कर से सम्मानित किया गया।

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