Me 2 Row: तनुश्री दत्ता को कोर्ट से झटका, नाना पाटेकर को मिली राहत
मुंबई की एक अदालत ने 2018 में दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के खिलाफ उनकी सह-कलाकार तनुश्री दत्ता द्वारा लगाए गए "मीटू" आरोपों का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है, क्योंकि अदालत ने पाया कि शिकायत "सीमा अवधि से परे" दर्ज की गई थी, जिसमें देरी का कारण नहीं बताया गया था।
यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 509 के तहत दर्ज किया गया था। हालांकि, यह ध्यान दिया गया कि शिकायत कथित घटना के एक दशक से भी अधिक समय बाद 2019 में दर्ज की गई थी।

कानूनी कार्यवाही और अवलोकन
अदालत ने कहा कि कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि शिकायत आवश्यक समय सीमा के भीतर दर्ज नहीं की गई थी। न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "यदि कोई शिकायत सीमा अवधि के बाद दर्ज की जाती है, तो उसे कानून द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता है।"
पुलिस ने 'बी-समरी' रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं था। इस प्रकार की रिपोर्ट का उपयोग तब किया जाता है जब कोई मामला झूठा पाया जाता है या आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं होते हैं।
कानूनी नतीजों पर देरी का प्रभाव
न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी कार्यवाही के लिए समय पर रिपोर्ट करना महत्वपूर्ण है। न्यायाधीश ने कहा, "अगर इतनी देरी के बाद रिपोर्ट की जाती है तो घटना की सत्यता स्थापित नहीं की जा सकती।"












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