ममता कुलकर्णी की वो गलतियां जिसके कारण किन्रर अखाड़े ने छीन लिया महामंडलेश्वर का पद, निकाल बाहर किया
Mamta Kulkarni: महाकुंभ के मौके पर संन्यास लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस ने पिछले हफ्ते खूब सुर्खिंया बटोरी थी। 24 जनवरी को सबको हैरान करते हुए एक्ट्रेस ने महाकुंभ में अपना पिंडदान किया ओर संन्यास लेकर किन्नर अखाड़े में शामिल हो गई थीं।
ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े में शामिल होते ही महामंडलेश्वर का पद सौंपा गया था लेकिन शुक्रवार को उन्हें बड़ा झटका लगा है। इसकी वजह है कि किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने ममता कुलकर्णी से महामंडलेश्वर का पद छीन कर उन्हें किन्नर अखाड़े से बाहर निकाल दिया है।

किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ये ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निस्काषित करते हुए एक्ट्रेस की गलतियों पर पर जमकर गुस्सा भी जताया है। आइए जानते हैं 90 के दशक की सबसे हॉट एक्ट्रेस में शुमार संन्यासी बनी ममता बनर्जी ने आखिर क्या गलतियां कर दी जिसके कारण उनसे महामंडलेश्वर का पद छीन कर किन्नर अखाड़े से निष्काषित कर दिया गया?
जल्द मिलेगा नया महामंडलेश्वर
बता दें किन्नर अखाड़े के संस्थापक ने ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर का पद देने वाले लक्ष्मी नारायण को भी अखाड़े से निकाल बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा मैं बिना मन के लक्ष्मी नारायण को पद से हटा रहा हूं और जल्द ही अखाड़े का पुर्नगठन होगा और नए आचार्य महामंडलेश्वर के नाम की घोषणा की जाएगी।
देशद्रोही स्त्री को महामंडलेश्वर की पदवी दे डाली
किन्नर अखाड़े के संस्थापक ने कहा इन लोगों ने जो गलतियां की वो सनातन धर्म और अखाड़े के नियमों के विरुद्ध है। लक्ष्मीनारायण पर गुस्सा निकालते हुए ऋषि अजय दास ने कहा इतने सालों में लक्ष्मी नारायण ने अखाड़ें में कोई धार्मिक कर्मकांड नहीं किया जिसे मैंने बर्दास्त कर लिया लेकिन इसने जब देशद्रोही स्त्री के अखाड़े में शामिल होते ही महामंडलेश्वर की पदवी दे डाली। जो बहुत गलत था।
ममता कुलकर्णी ने मुंडन नहीं करवाया
किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास ने संन्यास धारण करते समय पूरे सिर के बादल मुडवाना होता हैं। बिना मुंडन के संन्यास नहीं होता लेकिन ममता कुलकर्णी ने ये भी गलती की। उन्होंने संन्यास लेते हुए अपना मुंडन नहीं करवाया।
ममता कुलकर्णी ने गले में वैजन्ती की माला नहीं धारण की
किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास ने कहा इन लोगों ने ना तो जूना अखाड़े के निमयों का और ना ही किन्नर अखाड़े के नियमों का पालन किया। किन्नर अखाड़े के गठन के साथ ही वैजन्ती की माला गले में धारण करवाई जाती है, जो श्रृंगार का प्रतीक है। लेकिन ममता कुलकर्णी ने इसे तयाकर रुद्दाक्ष की माला गले में धारण कर ली।
ममता कुलकर्णी को वैराग्य पर नहीं भेजा गया
किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास जिन्होंने 2015 में धार्मिक उद्देश्य से किन्नर अखाड़े की स्थापना की थी, उन्होंने कहा लक्ष्मी नारायण ने ममता कुलकर्णी जैसी देशद्रोह के मामले में लिप्त महिला जिसका संबंध फिल्मी दुनिया से है, उसे अखाड़े का नियमों का उल्लंघन करते हुए वैराग्य की दिशा में भेजने के बजाय सीधे महामंडलेश्वर की उपाधि देकर पट्टा अभिषेक कर दिया गया।












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