बड़ी दिलचस्प थी दिलीप कुमार से लता मंगेशकर की पहली मुलाकात, मौलाना से पढ़ना शुरू कर दिया था उर्दू
मुंबई, 06 फरवरी। लता मंगेशकर के निधन से देश शोक में डूबा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। 92 साल की उम्र में भारत की स्वर कोकिला ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद करीब एक महीने तक उनका इलाज चला। लता मंगेशकर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती थीं, वह अपनी पुरानी यादें साझा करती रहती हैं। 13 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत करने वाली लता दीदी ने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को निजी रखा था और अपनी राय को हमेशा खुलकर बात करती थीं।

नहीं बनना चाहती लता मंगेशकर
एक बार एक इंटरव्यू के दौरान जब लता मंगेशकर से पूछा गया कि वह अगले जन्म में क्या बनना चाहेंगी तो उन्होंने कहा, 'अगला जन्म न हो तो अच्छा है। अगर मुझे अगला जन्म मिला तो मैं कभी भी लता मंगेशकर नहीं बनना चाहूंगी। लता मंगेशकर होने की परेशानी सिर्फ मैं ही जानती हूं।' आज 92 साल की उम्र में जब लता मंगेशकर ने दुनिया को अलविदा कहा तो उनकी आवाज बार-बार हमारे कानों में गूंज रही है।

लोकल ट्रेन में जाया करती थीं गाना गाने
फैंस का कहना है कि दूसरी लता मंगेशकर कभी नहीं हो सकतीं। उनकी मृत्यु एक युग का अंत है। अब वह हमारे बीच भले ही नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगी जैसे उन्होंने 'मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे' गाया था। लता मंगेशकर ने 1942 में मराठी फिल्म 'किटी हसाल' के लिए पहला गाना गाया था, लेकिन यह गाना कभी रिलीज नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें कई रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर गाना गाने के लिए लोकल ट्रेन से जाया करती थीं।

ऐसे हुई थी दिलीप कुमार से मुलाकत
एक इंटरव्यू में लता मंगेशकर ने खुलासा किया, 'मैंने 13 साल की उम्र में काम करना शुरू कर दिया और एक फिल्म में एक्ट्रेस की बहन की भूमिका निभाई। इस तरह शोबिज में मेरा सफर शुरू हुआ। हम पांच भाई-बहन थे और मुझे जिम्मेदारी उठानी पड़ी मेरे पिता की मृत्यु के बाद पुणे में हमारा घर भी बिक गया और हमें किराए के घर में रहना पड़ा।' लता मंगेशकर के मुताबिक मुंबई आने के बाद उन्हें लोकल ट्रेन से सफर करना था और यहीं उनकी मुलाकात दिलीप कुमार से भी हुई थी।

दिलीप कुमार ने किया था मजाक
लता दीदी ने बताया था, 'उस वक्त जितने भी स्ट्रगलिंग ऐक्टर्स थे, वहां अनिल विश्वास (म्यूजिक डायरेक्टर) भी हमारे साथ थे। उन्होंने मुझे दिलीप कुमार से मिलवाया और कहा कि ये लड़की बहुत अच्छा गाती है। दिलीप साहब ने पूछा, 'कौन है वो?' तो अनिल विश्वास ने बताया कि वह मराठी हैं। दिलीप कुमार सब कुछ सुनते रहे और अचानक बोले- 'वो मराठी है, तो वह अच्छी उर्दू कैसे बोलेगी?' दिलीप ने मजाक में कहा, 'कुमार ने मजाक में कहा कि महाराष्ट्रीयन उर्दू के अच्छे जानकार नहीं हैं।'

लता ने सीखी थी उर्दू भाषा
दिलीप की इस बात से लता हैरत में पड़ गईं और उन्होंने घर आकर उर्दू पढ़ने का फैसला किया। लता ने बताया, 'मेरा एक भाई शफीक था, इसलिए मैंने उससे उर्दू भाषा सीखनी शुरू की। वहां से मैंने उर्दू पढ़ना शुरू किया, फिर हिंदी का अध्ययन किया और समय के साथ सब कुछ सीखा।' आपको जानकर हैरानी होगी कि लता मंगेशकर ने 36 भाषाओं में 50 हजार से अधिक गाने गाए हैं, उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।
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