'अंग्रेजों की असंख्य अपराधों के लिए आजाद भारत में मुकदमा क्यों नहीं चला', कंगना फिर बरसीं- बताइए कहां गलत हूं
'अंग्रेजों की असंख्य अपराधों के लिए आजाद भारत में मुकदमा क्यों नहीं चला', कंगना फिर बोलीं- बताइए मैं कहां गलत हूं
मुंबई, 14 नवंबर: बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कंगना रनौत इन दिनों भारत की आजादी को लेकर दिए अपने बयान को लेकर चर्चाओं में हैं। कंगना रनौच ने कहा था कि 1947 में देश को जो आजादी मिली थी, वो भीख में मिली हुई आजादी थी। असल में देश को आजादी को 2014 में मिली है। कंगना रनौत का ये बयान उनके पद्मश्री सम्मान लेने के कुछ दिनों बाद आया था। कंगना के इस बयान के बाद उनसे पद्मश्री वापल लेने और देशद्रोह लगाकर गिरफ्तारी की मांग की जा रही है। कंगना ने अब इस पुरे मामले पर फिर से सफाई दी है। कंगना ने कहा है कि अंग्रेजों की असंख्य अपराधों के लिए आजाद भारत में मुकदमा क्यों नहीं चला गया था? कंगना ने रविवार (14 नवंबर) को किए अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा है कि यदि हम भारत में किए गए असंख्य अपराधों के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार नहीं ठहराते हैं, तब भी हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों का अनादर कर रहे हैं। कंगना ने इससे पहले शनिवार को कहा था कि वो अपना पद्मश्री वापस कर देंगी और माफी भी मांग लेंगी, अगर कोई उन्हें बताए कि आखिर 1947 में आदाजी के लिए कौन सी जंग लड़ी गई थी।

'अंग्रेजों ने स्वतंत्रता सेनानियों को बेरहमी से मारा और हमने क्या किया?'
कंगना रनौत ने रविवार (14 नवंबर) की सुबह एक इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर फिर से विपक्षी पार्टी और उनके बयान की आलोचना करने वालों पर तीखा हमला किया है। कंगना रनौत ने ब्रिटिश मीडिया संस्था बीबीसी के 2015 का एक लेख का स्क्रीनशॉट साझा किया है। कंगना ने लिखा है, ''यह 2015 में बीबीसी द्वारा प्रकाशित एक लेख है, जिसमें तर्क दिया गया है कि ब्रिटेन भारत के लिए कोई प्रतिपूर्ति नहीं करता है। अब आप बताइए कि ये गोरे उपनिवेशवादी या उनके हमदर्द आज के जमाने में इस तरह की बकवास से क्यों और कैसे दूर हो सकते हैं? अगर आप इसका पता लगाने की कोशिश करते हैं, तो इसका जवाब मेरे टाइम्स नाउ समिट स्टेटमेंट (जहां कंगना ने आजादी भीख वाला बयान दिया था) में है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने भारत में किए गए अनगिनत अपराधों के लिए, हमारे देश के धन को लूटने से लेकर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को बेरहमी से मारने से लेकर हमारे देश को दो भागों में विभाजित करने के लिए, स्वतंत्रता के समय में किए गए अनगिनत अपराधों के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।''

'क्या अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्र भारत की अदालतों में मुकदमा चला'
कंगना रनौत ने आगे लिखा, ''द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, अंग्रेजों ने अपनी शर्तों पर भारत को छोड़ दिया। विंस्टन चर्चिल को युद्ध नायक के रूप में उस वक्त सम्मानित किया गया। वह वही व्यक्ति था जो बंगाल के अकाल के लिए जिम्मेदार था। क्या उनके (अंग्रेजों) अपराधों के लिए स्वतंत्र भारत की अदालतों में कभी उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया था? जवाब मिलेगा नहीं।''

'भारत-पाकिस्तान के बंटवारे में मारे गए 10 लाख लोगों को आजादी मिली'
कंगना रनौत ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, '' एक अंग्रेज श्वेत व्यक्ति सिरिल रैडक्लिफ, जो पहले कभी भारत नहीं आया था, केवल 5 सप्ताह में विभाजन की रेखा खींचने के लिए अंग्रेजों द्वारा भारत लाया गया था। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ही उस समिति के सदस्य थे, जिसने अंग्रेजों द्वारा खींची गई विभाजन रेखा की शर्तों को तय किया। जिसके परिणामस्वरूप लगभग दस लाख लोग मारे गए। क्या दुखद रूप से मरने वालों को आजादी मिली?''

'क्या ब्रिटिश या कांग्रेस विभाजन के बाद हुए नरसंहार के लिए जिम्मेदार नहीं थे?'
कंगना रनौत ने आगे कहा, क्या ब्रिटिश या कांग्रेस, जो विभाजन रेखा से सहमत थे, विभाजन के बाद हुए नरसंहार के लिए जिम्मेदार नहीं थे? हमारे प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू की ओर से 28 अप्रैल 1948 को ब्रिटिश सम्राट को एक पत्र है, जिसमें भारत के गवर्नर जनरल के रूप में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन गवर्नर की नियुक्ति के लिए ब्रिटिश स्वीकृति का अनुरोध किया गया है। (पत्र मेरी पोस्ट की दूसरी छवि में पाया जा सकता है) यदि ऐसा कोई पत्र मौजूद है, तो क्या आप मानते हैं कि कांग्रेस ने अंग्रेजों को उनके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराने का प्रयास किया? यदि हां, तो कृपया बताएं कि मेरा कहना कैसे गलत है।''

'अगर हम अंग्रेजों को जिम्मेदार नहीं ठहराते हैं तो हम स्वतंत्रता सेनानियों का अनादर कर रहे हैं'
कंगना रनौत ने अपने पोस्ट के आखिर में कहा, ''स्वतंत्र भारत के लिए अपनी जान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को क्या पता था कि ब्रिटिश और हमारे राष्ट्र निर्माता अविभाजित भारत को दो हिस्सों में बांट देंगे, जिसके परिणामस्वरूप दस लाख लोगों का नरसंहार होगा? आखिर मैं यह कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहती हूं कि यदि हम भारत में किए गए असंख्य अपराधों के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार नहीं ठहराते हैं, तब भी हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों का अनादर कर रहे हैं।''












Click it and Unblock the Notifications