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'पत्‍नी को पीटना तब तक जायज, जब तक हड्डी न टूटे', तालिबानी कानून पर आगबबूला हुए जावेद अख्‍तर, क्‍या बोले?

Javed Akhtar reacts to taliban code of conduct: तालिबन ने कथित तौर पर घरेलू हिंसा को कानूनी मान्यता दे दी है। तालिबान शासन ने जिस नए पीनल कोड को लागू किया है उसमें महिलाओं को लगभग गुलाम का दर्जा दे दिया है। इसमें पतियो को पत्नियों को पीटने और शारीरिक यातना देने की खुली छूट दे दी है बशर्ते इससे "हड्डियों का फ्रैक्चर" न हो। यानी ऐसा मारो कि जिससे कोई हड्डी न टूटे या खुला घाव न हो।

इस रिपोर्ट पर पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) ने इसे "चौंकाने वाला और खतरनाक" बताते हुए "दुर्व्यवहार को वैध बनाना" करार दिया है। वहीं पुरस्कार विजेता गीतकार जावेद अख्तर ने भी तालिबान के इस कानून पर आगबबूला हो गए हैं। जावेद अख्तर ने इसे भयावह बताते हुए भारतीय मुफ्ती और मौलानाओं की चुप्पी पर सवाल उठाया।

Javed Akhtar

जावेद अख्‍तर बोले- भारत के मुफ्ती और मुल्ला निंदा करें

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 21 फरवरी, 2026 को अपनी बात रखते हुए जावेद अख्तर ने लिखा, "तालिबान ने अब पत्नी की पिटाई को कानूनी रूप दे दिया है, बस शर्त इतनी है कि कोई हड्डी न टूटे। अगर कोई महिला अपने पति की मर्जी के बिना अपने मायके भी जाती है, तो उसे तीन महीने की जेल भुगतनी होगी।" उन्होंने आग्रह किया कि भारत के मुफ्ती और मुल्ला इसकी बिना शर्त निंदा करें, क्योंकि यह सब धर्म की आड़ में किया जा रहा है।

'बदतमीज बर्बर तालिबानों को हमें कोई...'

जावेद अख्तर ने उसी दिन एक और पोस्ट में तालिबान को "बदतमीज बर्बर" करार दिया। उन्होंने लिखा, "चाहे जो भी पॉलिटिकल फायदा हो, इन बदतमीज बर्बर तालिबानों को हमें कोई भरोसा या इज्जत नहीं देनी चाहिए। वे दुनिया का मैल हैं।"

तालिबान का क्‍या है ये कानून?

गौरतलब है कि तालिबान ने अपने सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा हस्ताक्षरित 90-पृष्ठ की आपराधिक संहिता को औपचारिक रूप दिया। 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान की नई दंड संहिता पति द्वारा कुछ शर्तों के तहत घरेलू हिंसा की अनुमति देती है।

संहिता के अनुसार, पति अपनी पत्नी को पीट सकता है, लेकिन दंड तभी लागू होगा जब हमला छड़ी से किया गया हो और गंभीर चोट लगे। सबूत का बोझ महिला पर होगा और अधिकतम दंड केवल 15 दिन की कैद है।

पति का घर छोड़ने पर महिला को होगी तीन महीने की जेल

इसके साथ ही, यदि कोई महिला पति की अनुमति के बिना घर छोड़ती है या उसके लौटने के अनुरोध को अस्वीकार करती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने तक की जेल हो सकती है। रिश्तेदारों को भी अपराध का दोषी माना जाएगा यदि वे उसे शरण देते हैं, जिससे महिलाओं की स्वायत्तता और कानूनी सुरक्षा गंभीर रूप से सीमित हो जाती है।

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