I Want To Talk Review: दिल को छू लेगी अभिषेक बच्चन की 'आई वॉन्ट टू टॉक', नहीं देखेंगे तो मिस कर देंगे
फिल्म- आई वॉन्ट टू टॉक
स्टारकास्ट- अभिषेक बच्चन, अहिल्या बमरू
डायरेक्टर- शूजीत सरकार
स्टार- ****
I Want To Talk Review: बॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर शुजीत सरकार की फिल्म 'आई वॉन्ट टू टॉक' इस समय सोशल मीडिया पर छाई हुई है। ये फिल्म आगामी 22 नबंबर 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी लेकिन इसका इंपैक्ट काफी बढ़िया होने वाला है।
गहराई वाली फिल्म है 'आई वॉन्ट टू टॉक'
कई बार ऐसी फिल्में देखने को मिलती है, जिन्हें देखते हुए आपकी चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ जाती है और आंखों में आंसू आ जाते हैं। साथ ही आप जिंदगी को और ज्यादा जीने की कोशिश करने लगते हैं। अगर आप एक हल्के-फुल्के ढंग से पेश की गई बेहतरीन और गहराई वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो अभिषेक बच्चन स्टारर फिल्म 'आई वॉन्ट टू टॉक' जरूर देखें।

'आई वॉन्ट टू टॉक' की कहानी
-फिल्म की कहानी अर्जुन (अभिषेक बच्चन) की है जो आईआईटीएन और एमबीए डिग्री होल्डर है। वह अमेरिका में अपने सपनों को पूरा कर रहा है। लाइफ में बहुत कुछ अचीव कर चुका है और आगे भी बहुत कुछ करना चाहता है।
-वह खूब मेहनत कर रहा है लेकिन अचानक से उसकी लाइफ में एक तूफान आता है। डॉक्टर्स उसे बताते हैं कि उसे 'लाइरेंजियल कैंसर' है और उसके पास जीने के 100 दिन से भी कम दिन बचे हैं।
-इसके बाद अर्जुन की नौकरी छूट जाती है। उसकी जिंदगी में उथल-पुथल मच जाती है। उसे एक के बाद एक सर्जरी से गुजरना पड़ता है। अर्जुन एक बच्ची का बाप भी है। इसी बीच उसकी जिम्मेदारी भी निभानी है। ये कहानी उसी अर्जुन की है जिसके पास 100 से कम दिन बचे हैं लेकिन वो जिंदा रहने के लिए मौत को भी कन्फ्यूज करता है।
वह 20 से ज्यादा सर्जरी करवाता है लेकिन हार नहीं मानता। कहानी सीधी है लेकिन आपको बांधकर रखती है। अर्जुन की जिंदगी की इस पेंच को समझने के लिए फिल्म को देखना होगा।
कैसी है फिल्म 'आई वॉन्ट टू टॉक'
-फिल्म बहुत ही कमाल है। फिल्म का हर एक डायलॉग आपको बहुत कुछ समझाता है। हर सीन आपको बहुत कुछ सिखाता है।
-फिल्म की कहानी की जरूरत के हिसाब से उसमें गाने दिए गए हैं। कहानी को पुश देने के लिए बैकग्राउंड में गाने बजते हैं और वो बेहतरीन लगते हैं।
-फिल्म ने मौत को लेकर बेहद गहराई से बात की है। किसी डॉक्टर के लिए कोई कैंसर पीड़ित या बहुत बीमार आदमी सिर्फ सब्जेक्ट हो सकता है, लेकिन उस सब्जेक्ट के मन में क्या गुजरती है, ये बात फिल्म में बताई गई है।
-पूरी फिल्म मौत के डर से भरी होने के बावजूद जाते-जाते जीने की उम्मीद दे जाती है। फिल्म में एक सर्वाइवर की कहानी को दिखाया गया है जिसका 90 प्रतिशत से ज्यादा पेट ऑपरेट करके निकाल दिया गया है।
-गले की नली सिकुड़ गई है। पूरा चेहरा बिगड़ गया है, लेकिन उसके जीने की इच्छा मौत के डर पर भारी पड़ती है और दर्शकों को ये बहुत ही अच्छा लगेगा।
फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी एक्टिंग
-अभिषेक बच्चन हर फिल्म में खुद को अलग साबित करते नजर आते हैं लेकिन इस बार उन्होंने कुछ अलग कर ही दिया है। इस फिल्म को देखकर आप उनकी एक्टिंग के दीवाने हो जाएंगे। उनकी एक्टिंग में इस बार कुछ नयापन दिखा है, जो उन्हें पहले से और बेहतर बनाता है।
-अभिषेक बच्चन ने इस फिल्म में 10 से ज्यादा लुक्स अपनाएं हैं जो उनकी एक्टिंग को और निखारती नजर आती है।
-अभिषेक बच्चन की बेटी के रूप में अहिल्या बमरू ने बहुत ही अच्छा काम किया है। उन्होंने अपने फ्रेश टैलेंट को कैमरे पर अच्छे से साबित किया है।
फिल्म का डायरेक्शन और राइटिंग
-फिल्म के डायरेक्टर शुजीत सरकार हैं। उन्होंने इसके पहले 'अक्टूबर' और 'पीकू' जैसी फिल्में भी बनाई हैं। ये फिल्म उनकी हर मूवी की तरह फुल ऑफ लाइफ है।
-इस फिल्म में भी डायरेक्टर ने अपनी पुरानी फिल्मों की हल्की सी सुगंध रखी है, जो कि आपको एक अलग मजा दे सकती है। फिल्म के राइटर रितेश शाह ने भी कमाल की स्टोरी लिखी है। इस फिल्म को एक बार जरूर देखें।












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