Heeramandi की असली तवायफ कौन? खूबसूरती पर मर मिटते थे नवाब साहब, फिर एक दिन पति ने...

Heeramandi Tawaif Nargis Begum: बीते कुछ दिनों से संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज 'हीरामंडी' सेंसेशन बनी हुई है। 8 एपिसोड वाली इस सीरीज को नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया गया है, जिसकी फैंस तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। सीरीज में मनीषा कोइराला, सोनाक्षी सिन्ही, अदिति राव हैदरी, रिचा चड्ढा जैसी हसीनाओं ने तवायफों का किरदार निभाया है। मगर क्या आप जानते हैं कि 'हीरामंडी' की असली तवायफ कौन थी?

हीरामंडी में जन्मी 'निग्गो'
आज हम आपको उस असली तवायफ की कहानी बताएंगे, जिसका हीरामंडी में सिक्का चलता था। ये पाकिस्तान की एक मशहूर एक्ट्रेस थी, जिनका नाम था निग्गो उर्फ नरगिस बेगम। पर्दे पर तो निग्गो खूब चमकीं मगर पर्सनल लाइफ उनकी काफी दर्दनाक रही। चलिये जानते हैं लाहौर के सबसे बदनाम एरिया हीरामंडी में जन्मीं निग्गो की कहानी....

Nargis Begam

मां के नक्शेकदम पर चलीं
लाहौर के रेड लाइट एरिया हीरामंडी में निग्गो का जन्म हुआ था। उनकी मां एक तवायफ थीं, जो परिवार का गुजर बसर करती थीं। बड़ी होकर मां की तरह ही निग्गो भी तवायफ बनीं। निग्गो को देखने के लिए महफिलें फुल हो जाती थीं। 40 के दशक में राजशाही जब खत्म होने को आई तो सिनेमा शुरू होने लगा।

निग्गो पर फिदा हुआ प्रोड्यूसर
तब प्रोड्यूसर तवायफों के ठिकानों का रुख करते थे, ताकि वहां से फिल्म के लिये हीरोइन मिल सके। ऐसा कहा जाता है कि निग्गो की महफ़िल में एक बार काफी भीड़ जमा हुई थी। तभी एक प्रोड्यूसर हीरोइन खोजने निकल पड़ा। निग्गो की खूबसूरती पर वो इस कदर फिदा हुआ कि एक फिल्म का ऑफर उन्हें दे डाला।

ऐसे रखा पाकिस्तानी सिनेमा में कदम
नरगिस उर्फ निग्गो भी हीरामंडी से निकलना चाहती थीं। ऐसे में उन्होंने इस ऑफर को स्वीकर कर लिया और वे हीरोइन बनने केलिए तैयार हो गईं। इसके बाद निग्गो ने साल 1964 में पाकिस्तानी फिल्म इशरत से अपना शानदार डेब्यू किया। उसके बाद निग्गो ने शहंशाह-ए-जहांगीर, नई लैला नया मजनूं, अंदालिब, लव इन जंगल, अफसाना, मोहब्बत जैसी 100 फिल्में कीं।

तवायफ से बन गई हीरोइन
70 का दशक ऐसा था, जब निग्गो का पाकिस्तानी सिनेमा में सिक्का चलता था। एक फिल्म के दौरान उन्हें प्रोड्यूसर ख्वाजा मजहर से प्यार हो गया और दोनों ने शादी भी कर ली। इस शादी से कईयों को आपत्ति थी क्योंकि निग्गो एक तवायफ थीं। मगर निग्गो ने हीरामंडी से अपने सारे नाते खत्म कर लिये। इतना ही नहीं शादी केबाद निग्गो ने फिल्मों से भी दूरी बना ली।

हीरामंडी से क्यों तोड़ा नाता?
जैसा कि बताया गया कि तवायफ कल्चर खत्म होने लगा था और सिनेमा की शुरुआत होने लगी थी। ऐसे में शाही मोहल्ले में एक रिवाजभी शुरू हुआ। रिवाज ये कि अगर कोई शाही शख्स कोठे की लड़की से शादी करेगा तो उसे लड़की के परिवार वालों को एक रकम चुकानी होगी। निग्गो ने हीरामंडी से नाता तोड़ दिया था। ऐसे में परिवार की रोजी रोटी का जरिया भी खत्म हो चुका था।

तबाह होने को आई शादी
परिवार चाहता था कि निग्गो हीरामंडी लौट आएं मगर निग्गो ने इंकार कर दिया। ऐसे में परिवार उस रिवाज के तहत पैसे मांगने लगा। निग्गो की तरफ से जब कोई मैसेज नहीं मिला तो उसे वापस हीरामंडी बुलाने के लिए मां की तबीयत का बहाना किया गया। घर पहुंचकर निग्गो के कान भर दिये गए। ऐसे में निग्गो ससुराल नहीं लौटी तो उधर पति भी परेशान हुआ।

पति ने क्यों उतारा मौत के घाट?
लाख कोशिशों के बावजूद निग्गो ससुराल नहीं गई। इसके बाद ऐसी बेरुखी देख मजहर ख्वाजा ने गुस्से में अपनी बंदूक निकाली और निग्गो को गोलियों से भून डाला। निग्गो ने हीरामंडी में ही दम तोड़ दिया। इस हत्या के बाद मजहर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

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