आदिपुरुष की छपरी भाषा पर महाभारत के 'धृतराष्ट्र' Girija Shankar बोले,'ये आने वाली जेनरेशन के लिए...'
महाभारत में धृतराष्ट्र बने गिरिजा शंकर ने फिल्म आदिपुरुष विवाद पर मेकर्स की क्लास लगाई। उन्होंने कहा कि, ओम राउत की फिल्म में दिखाए गए किरदार से बेहतर काम कर सकते थे।
Adipurush Controversy: ओम राउत के डायरेक्शन में बनी फिल्म आदिपुरुष को लेकर हो रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सोशल मीडिया पर भी फैंस फिल्म मेकर्स और एक्टर्स को जमकर ट्रोल कर रहे हैं। वहीं रामायण और महाभारत के एक्टर्स में भी आदिपुरुष को लेकर काफी नाराजगी है।
आदिपुरुष विवाद पर बोले महाभारत के धृतराष्ट्र
इससे पहले महाभारत के युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान ने फिल्म आदिपुरुष को लेकर आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि जल्द से जल्द इस फिल्म को बैन कर देना चाहिेए। वहीं अब महाभारत में धृतराष्ट्र का रोल निभाने वाले गिरिजा शंकर ने भी मेकर्स की क्लास लगाई और कहा कि ये आने वाली जेनरेशन के लिए ठीक नहीं है।

महाभारत से आदिपुरुष की तुलना पर बोले गिरीजा
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में गिरीजा शंकर ने कहा कि, ओम राउत की फिल्म में दिखाए गए किरदार से बेहतर काम हो सकता था। इसके अलावा उन्होंने अपने हिट टीवी शो महाभारत की तुलना इस फिल्म से करने से साफ मना कर दिया और दावा किया कि इसमें बहुत ही विद्वान कलाकार थे। उन्होंने यह भी कहा है कि अगर भाषा बेहतर होती तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण स्थापित कर सकती थी।
'मुझे नहीं पसंद आई आदिपुरुष'
गिरिजा शंकर ने आगे सोशल मीडिया पर आदिपुरुष के देखे गए छोटे-छोटे क्लिप पर अपना विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि, "मैंने आदिपुरुष नहीं देखी है, लेकिन मैंने फिल्म के कुछ छोटे क्लिप्स, टीज़र और ट्रेलर देखा है। सच कहूं तो, मुझे यह फिल्म पसंद नहीं आई क्योंकि फिल्म में बहुत ज्यादा कंप्यूटर ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन मैं फिल्म पर टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि मैंने उसे नहीं देखा है'।
फिल्म के छपरी डायलॉग्स पर कही ये बात
गिरिजा शंकर ने आगे फिल्म इस्तेमाल की गई छपरी भाषा पर कहा कि, "मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं इस पर क्या प्रतिक्रिया दूं। हनुमान या कोई अन्य पात्र इस भाषा को कैसे बोल सकते हैं, जिस तरह से इस फिल्म में हनुमान जी बोलते हैं। मुझे लगता है कि वे इस फिल्म को और बेहतर कर सकते थे। अगर फिल्म के मेकर्स चाहते तो फिल्म का बनाने का बेहतर तरीका ढुंढ़ सकते थे। ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए ये एक उदाहरण बने।"












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