Dharmendra Death: धर्मेंद्र को लग गई थी शराब की लत! एक दिन में पी गए थे 12 बोतल, पिता की पकड़ ली थी कॉलर
Dharmendra Death: बॉलीवुड के "ही-मैन" धर्मेंद्र का करिश्मा और उनकी गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सितारों में से एक बनाती थी। सोमवार को जब उनके निधन की खबर आई तो पूरा बॉलीवुड शोक में चला गया। इस मौके पर उनके कई किस्से एक बार फिर से चर्चा में आ रहे हैं। उनकी ईमानदारी और आत्म-जागरूकता दशकों बाद भी प्रशंसकों को प्रभावित करती थी, खासकर जब वे अपने शराब पीने के दिनों के बारे में बात करते थे।
हमेशा खुलकर बोलने वाले धर्मेंद्र
धर्मेंद्र ने हमेशा अपने जीवन के बारे में खुलकर बात की है। युवावस्था में शराब की लत उनके करियर के चरम पर भी हावी रही। उन्होंने स्वीकार किया है कि एक समय यह लत उन पर इतनी हावी हो गई थी कि नशे की हालत में उन्होंने अपने पिता का कॉलर पकड़ लिया था, जिसका उन्हें आज भी गहरा अफसोस है।

बीती गलती पर धर्मेंद्र का विनम्र स्वीकार
धर्मेंद्र ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा था, "मैं युवा और मूर्ख था। लेकिन जीवन आपको विनम्र बनना सिखाता है। मैंने मुश्किल से सबक सीखा।" उनकी शराब से जुड़ी एक प्रसिद्ध कहानी 1975 की कल्ट क्लासिक 'शोले' के सेट से आती है।
'शोले' के सेट पर 12 बोतलें शराब पीने का किस्सा
धर्मेंद्र ने बताया कि 'शोले' की शूटिंग के दौरान उन्होंने एक ही दिन में 12 बोतलें शराब पी ली थीं। उन्होंने कहा, "मैं कैमरामैन के पीछे बैठकर चुपचाप उसकी स्टॉक से पीता था। जब प्रोडक्शन स्टाफ ने उसे बताया कि उसने 12 बोतलें पी ली हैं, तो वह हैरान रह गया।" कैमरामैन आमतौर पर सेट पर पाँच-छह बोतलें बीयर रखता था, लेकिन धर्मेंद्र की प्यास उस दिन कहीं ज़्यादा थी।
यह किस्सा क्यों बना बॉलीवुड की लोककथा
यह किस्सा बॉलीवुड लोककथाओं का हिस्सा बन गया, न केवल इसकी असाधारणता के लिए, बल्कि धर्मेंद्र की अद्भुत ईमानदारी के लिए भी। अपनी पीढ़ी के अधिकांश सितारों के विपरीत, उन्होंने अपनी कमियों को कभी भी ग्लैमर के पीछे छिपाने की कोशिश नहीं की। उनकी कहानियों में हमेशा हास्य और विनम्रता का पुट रहता था, जो एक दुर्लभ संयोजन है जिसने प्रशंसकों को उन्हें और भी अधिक पसंद किया।
शराब पर पूछे सवाल का काव्यात्मक जवाब
जब सार्वजनिक रूप से उनकी शराब पीने की आदतों के बारे में पूछा गया, तो धर्मेंद्र ने रक्षात्मक होने के बजाय, अपने ही अंदाज़ में जवाब दिया। उन्होंने दर्द और कविता को एक साथ पिरोते हुए कहा, "प्यार ने मुझे मार डाला, शराब ने मुझे मार डाला, और मुझे कोई ऐसा नहीं मिलेगा जो आपकी बराबरी कर सके।" उन्होंने आगे कहा, "अगर शराब न होती, तो प्यार न होता; यह जीवन एक अलग जीवन होता।"
धर्मेंद्र का शानदार करियर और आज का प्रभाव
1960 में अपने करियर की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र ने 'फूल और पत्थर', 'सत्यकाम', 'चुपके-चुपके' और 'शोले' जैसी फिल्मों में यादगार प्रदर्शन दिए। 89 साल की उम्र में भी, अभिनेता आज भी लोगों का दिल जीत रहे हैं, हाल ही में वे शाहिद कपूर की फिल्म 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' (2024) में नजर आए थे।
ईमानदारी-धर्मेंद्र की सबसे बड़ी पहचान
धर्मेंद्र की candid बातें यह याद दिलाती हैं कि महान कलाकार भी अपने अनुभवों के निशानों को गरिमा के साथ जीते हैं, और शायद ईमानदारी ही धर्मेंद्र का सबसे स्थायी गुण है।
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