'कान', 'कैन' और 'कांस', आखिर क्या है सही उच्चारण? कब और क्यों हुई फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत, जानिए सबकुछ
Cannes Film Festival Interesting Facts and History: फ्रांस सुनकर दिमाग में पहला ख्याल क्या आता है? एफिल टावर। हां, क्योंकि ये दुनियाभर में फेमस है। लेकिन फ्रांस 1946 में ये एक और चीज के लिए फेमस होना शुरू हो गया। वो है हर साल होने वाला Cannes Film Festival, जहां दुनियाभर की बेस्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्रीज देखने को मिलती हैं। फिल्ममेकर्स और सिनेरसिकों के लिए ये एक प्रकार का महाकुंभ है। जैसा भक्ति का महाकुंभ भारत के प्रयागराज (इलाहबाद) में लगता है।
आखिर इस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत कब हुई और क्यों हुई? लेकिन इसे जानने से पहले ये जानिए कि इसको बोलते और लिखते क्या हैं? अंग्रेजी में इसे Cannes लिखते हैं। लेकिन हिंदी में इसे कान या कैन बोला जाता है। कांस नहीं? क्यों? क्योंकि ये फ्रेंच भाषा का शब्द है और कई जगहों पर एस साइलेंट होता है। इसलिए इसी कान या कैन बोलते हैं। यही सही उच्चारण है।

#1939 में अनाउंस हुए इस फेस्ट की शुरुआत 1946 में क्यों हुई?
बात 1932 की है जब दुनिया का पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 'वेनिस इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल' की शुरुआत हुई। ये इटली में शुरू हुआ था। लेकिन उस समय इटली में तानाशाही चलती थी, जिसका नाम मुसोलिनी था। वो हिटलर का पक्का दोस्त था। इस फेस्टिवल में उसकी ही मर्जी ही चलती थी। इसलिए फ्रांस ने खुद का फिल्म फेस्टिवल चालू करने का फैसला किया। इसकी अनाउंसमेंट 1939 में पेरिस में हुई थी। इसे 1 सितंबर को शुरु होना था। सब तैयारी हो चुकी थी। लेकिन इसी बीच दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया। जब 6 साल बाद ये खत्म हुआ, तब फ्रांस ने कान फिल्म फेस्टिवल शुरू किया। इसके बाद 20 सितंबर 1946 को पहली बार कान फिल्म फेस्टिवल हुआ। ये फेस्टिवल फ्रांस के कान शहर में होता है। जो हर साल मई के महीने में आयोजित होता है।
#दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फिल्म फेस्टिवल
दुनिया में तीन फिल्म फेस्टिवल होते हैं। वेनिस, बर्लिन और कान। ये तीनों ही यूरोप में होते हैं। इनके अलावा दुनिया में तकरीबन 3000 फिल्म फेस्टिवल होते हैं। लेकिन ये तीनों सबसे प्रतिष्ठित माने जाते हैं। हालांकि इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर्स के लिए सनडांस बड़ा फेस्ट माना जाता है। ये अमेरिका में आयोजित होता है।
#कान में मिलने वाले अवॉर्ड
- लों मेत्राज़/Longs Métrages
- अं सर्त्रां रगा/Un Certain Regard
- कैमेहा दॉर/Caméra d'or)
- सिनेफाउंडेशन एको मेत्राज़/Cinéfoundation et courts métrages
लेकिन सबसे ज्यादा जिन अवॉर्ड्स की चर्चा होती है वो पाम दॉर Palme d'Or और ग्रां प्री Grand Prix हैं। बता दें, पाम दॉर कान का सबसे बड़ा अवॉर्ड माना जाता है। दूसरा सबसे बड़ा अवॉर्ड ग्रां प्री होता है।
#भारत को अब तक कौन से प्राइज/ पुरुस्कार मिले हैं?
कान फिल्म फेस्टिवल का नाता भारत से बहुत पुराना है। 1946 में जब फेस्टिवल की शुरुआत हुई, तभी से भारत की फिल्मों की स्क्रीनिंग वहां हो रही है। सबसे पहले डायरेक्टर चेतन आनंद की फिल्म 'नीचा नगर' दिखाई गई थी। जिसने पाम दॉर Palme d'Or पुरुस्कार मिला था। इसके बाद किसी भी भारतीय फिल्म ने ये पुरुस्कार नहीं जीता। वहीं, 2024 में पायल कपाड़िया की फिल्म ऑल वी इमेजिन एज लाइट (All We Imagine as Light) ने कान का दूसरा बड़ा पुरुस्कार ग्रां प्री (Grand Prix - Jury Prize) जीता। वो पहली भारतीय महिला फिल्ममेकर भी हैं। इस फिल्म को 2024 में स्क्रीनिंग के दौरान 8 मिनट लंबा स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला था। लेकिन इन सबके अलावा हर साल भारत की कई फिल्मों को कान में इनवाइट किया जाता है। जिनकी स्क्रीनिंग भी होती है।
अगली बार आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल और उनके इतिहास से रूबरू करवाएंगे।












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