Housefull 5 Review: अझेल, उबाऊ, थकेली और छिछोरी कॉमेडी से है लैस, दर्शकों को बचाने आए लॉर्ड बॉबी
Housefull 5 Review: आज सुबह सुबह हम बॉलीवुड के एक इतिहास का हिस्सा बनने सिनेमाघर पहुंच गए। दरअसल, साल 2010 में रिलीज हुई हाउसफुल फ्रेंचाइज की पांचवीं किश्त रिलीज हुई है। ये पहली फ्रेंचाइज है जिसके पांच पार्ट बने हैं। फिल्म का ट्रेलर हमने देखा था, फिर भी मन में हिलोरें उठवा रखीं थीं। क्योंकि रिव्यू भी लिखना था और इसके दो वर्जन वाला प्रयोग भी देखना था। जैसे ही सिनेमाघर पहुंचे, देखा सुबह के शोज में 20-26 लोग बैठे हुए हैं। मन में और उत्साह बढ़ा, लेकिन वो लंबे समय तक रह नहीं पाया। ख़ैर आज आप इसे रिव्यू की जगह व्यथा भी कह सकते हैं।
फिल्म की कहानी में जॉली ही जॉली हैं। एक बहुत असामी यानी बिजनेसमैन की मौत हो जाती है। तलाश उसके असली वारिस की होती है। जिसका नाम जॉली है। इस नाम से तीन लोग सामने आते हैं, वो अपने आपको जॉली बताते हैं। लेकिन असली जॉली कौन हैं इसका पता नहीं चल पाता है। इसी कहानी में मर्डर वाला एंगल आता है। जिसके बाद फिल्म मर्डर मिस्ट्री बन जाती है। फिर कहानी पूरी तरह से 360 डिग्री घूमती है और खूनी का पता लगाने के लिए दो पुलिस वाले को बुलाया जाता है। बात यहां नहीं रुकती, इंटरपोल तक पहुंच जाती है। ये मोटा माटी फिल्म की कहानी है। इसे आप खिचड़ी भी समझ सकते हैं। वर्जन ए और बी में अंतर ये है कि विलेन अलग-अलग हैं। इसके अलावा कुछ भी खास नहीं है।

परफॉर्मेंस ऐसी, जिसे देख मन खट्टा हो जाए
फिल्म में दो दर्जन से ज्यादा एक्टर हैं। लेकिन हीरो तीन हैं, अक्षय, रितेश देखमुख और अभिषेक बच्चन। पहले बात इनकी करते हैं, तो दंतनिपोर टाइप फिल्म में छिछोरी कॉमेडी में सिर्फ अक्षय कुमार फबते हैं। बाकी दो के डायलॉग्स किसने लिखे हैं। उनसे पूछना चाहिए कि आखिर किस चीज का सेवन कर उन्होंने ये रचना रची। फिर हिरोइनों की बात करें तो इसमें जैकलीन फर्नांडीज, सोनम बाजवा और नरगिस फाखरी हैं। तीनों ने वैसा ही काम किया है, जिसकी आप उम्मीद कर सकते हैं।
सोनम उर्दू बोलते हुए उतनी ही गंदी लगती हैं, जैसे गुलाब जामुन में नींबू निचोड़ दिया हो। अब साइड हीरो की बात करें तो फरदीन खान डायलॉग बोलते हुए पूरी जान लगाते नजर आ रहे हैं। जैकी श्रॉफ और संजय दत्त के एंट्री में खलनायक टोन बजती है। दोनों को लेना का भी सेंस नहीं समझ आता है। सौंदर्या शर्मा को तो फिल्म में ऐसे दिखाया है, जिसे यहां लिखना उचित नहीं है। उनका बार बार जैकी श्रॉफ से चिपकना भी बहुत गंदा लगता है। इन दर्जनों एक्टर्स में से अक्षय के बाद नाना ठीक लगते हैं। उनका काम भी अच्छा है। उनकी एंट्री के बाद फिल्म में जान आती है, लेकिन फिल्म तबतक थकाऊ बन जाती है। लेकिन एक न एक दिन फिल्म को खत्म होना था और इसके लिए लॉर्ड बॉबी का सहारा लेना पड़ा।
सब इतना लचर है कि चूं-चूं की आवाज आती है
इसकी स्टोरी और स्क्रीनप्ले साजिद नाडियाडवाला ने लिखी है। साजिद प्रोड्यूसर अच्छे हो सकते हैं, लेकिन लेखक तो कतई नहीं। हालांकि प्रैक्टिस मेक्स मैन परफेक्ट, ये कहावात तो खूब सुनी होगी। साजिद के ऊपर ये बात कब सच होगी पता नहीं। हो सकता है उन्होंने हिट फिल्म की झुंझलाहट में ये कदम उठा लिया हो। क्योंकि उनकी पिछली हिट फिल्म हाउसफुल 4 ही थी। ख़ैर ऊपर लिखी हुईं बातों से समझ आ गया होगा कि साजिद ने कितनी मेहनत की है।
तरुण मनसुखानी ने इसका डायरेक्शन किया है। उन्होंने 6 साल बाद फिर से किसी फिल्म का डायरेक्शन किया है। इसके पहले सुशांत सिंह राजपूत की ड्राइव को डायरेक्ट किया था। भले ही वो डायरेक्टर हैं, लेकिन निर्माता का फैलाया हुआ रायता वो समेट नहीं पाए। क्योंकि रायता भी काफी पतला (पनियल) था। क्योंकि फिल्म को बॉलीवुड के बड़े प्रोड्यूसर ने बनाई है,तो झामा और ग्लैमर तो खूब दिखा। लेकिन जिस तरह फिल्म के क्रूज के बैकड्रॉप में सेट है, पूरी फिल्म में ये नहीं पता चल पाया कि आखिर क्रूज कहां से निकला था और कहां पहुंचना चाहता है। वही हाल कहानी का था। कॉमेडी फिल्म बनाने की फिराक में इसमें मर्डर मिस्ट्री का तड़का लगया फिर बैकग्राउंड म्यूजिक हॉरर कर दिया। तो ये क्या बनी मुझे नहीं पता चल पाई। हालांकि मेकर्स ने इसे कॉमेडी-थ्रिलर बताया है।
सभ्य समाज में बने रहने की कोशिश
खैर, मैं अब कुछ कहूंगा तो ये सभ्य समाज निकाल देगा। बीते दिनों समय रैना पर केस हो गया था। उनके पास तो कोर्ट कचहरी करने के पैसे भी थे। मेरी बातों से आपको समझ आ गया होगा कि फिल्म कितनी शानदार है। जैसे कि मैंने पहले ही बताया था कि वर्जन ए और बी में अंतर ये है कि विलेन अलग-अलग हैं। इसके अलावा कुछ भी खास नहीं है। अगर आप कोई एक वर्जन भी देख लेते हैं तो मेरी सहानुभूति आपके साथ सदैव रहेगी। मेरी बात यहीं तक, आप भी देखें और अपनी राय बनाएं। अगर आपको फिल्म देखते वक्त हंसी आती है, तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताइएगा।
फिल्म: हाउसफुल 5
निर्देशक: तरुण मनसुखानी
कहां देखें: सिनेमाघर
अवधि: 2 घंटे 43 मिनट
रेटिंग्स: 1 स्टार
स्टारकास्ट: अक्षय कुमार, रितेश देशमुख, अभिषेक बच्चन, सोनम बाजवा, जैकलीन फर्नांडीज़, नरगिस फाखरी, जैकी श्रॉफ, संजय दत्त, नाना पाटेकर सहित अन्य












Click it and Unblock the Notifications