Dada Saheb Phalke Award: साल 1969 से हुई थी 'दादासाहब फाल्के अवॉर्ड'की शुरुआत, जानिए कितनी मिलती है धनराशि?

मनोरंजन डेस्क, 27 सितंबर। बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में शामिल आशा पारेख को आज भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान 'दादा साहेब फाल्के अवार्ड' देने का ऐलान हुआ है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। आपको बता दें कि ये अवार्ड दिग्गज अभिनेत्री को 30 सिंतबर को दिया जाएगा।

इस अवार्ड को 1969 में शुरू किया गया था

इस अवार्ड को 1969 में शुरू किया गया था

अपने लंबे फिल्मी करियर में आशा पारेख ने कभी चुलबुले अंदाज से तो कभी सादगी से, कभी कातिलाना डांस से तो कभी दिल छू लेने वाली अदायगी से हमेशा लोगों को मनोरंजित किया है। आशा पारेख को 52 वां 'दादासाहब फाल्के अवॉर्ड' दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 'दादासाहब फाल्के अवॉर्ड' को फिल्म इंडस्ट्री का बेहद प्रतिष्ठित अवार्ड माना जाता है। इस अवार्ड को 1969 में शुरू किया गया था।

आइए जानते हैं इस पुरस्कार के बारे में खास बातें

आइए जानते हैं इस पुरस्कार के बारे में खास बातें

दरअसल 'दादा साहेब फाल्के अवार्ड' भारत सरकार की ओर से हर साल भारतीय सिनेमा में अहम योगदान देने वाले कलाकार को दिया जाता है। इस पुरस्कार का प्रारंभ दादा साहब फाल्के के जन्म शताब्दि-वर्ष 1969 से किया गया था।

10 लाख रुपये ,स्वर्ण कमल, प्रशस्ति पत्र

10 लाख रुपये ,स्वर्ण कमल, प्रशस्ति पत्र

पहली बार यह सम्मान अभिनेत्री देविका रानी को प्रदान किया गया था। वर्तमान में इस पुरस्कार में 10 लाख रुपये ,स्वर्ण कमल, प्रशस्ति पत्र और शॉल दिए जाते हैं। आशा को इससे पहले साल 1992 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित भी किया जा चुका है।

 करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी

करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी

गौरतलब है कि 70-80 के दशक में हिंदी सिनेमा की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल आशा पारेख ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी। उनकी पहली फिल्म 'आसमान' थी, जो कि साल 1952 में रिलीज हुई थी, उसमें वो बाल कलाकर की भूमिका में थीं।

पहली फिल्म थी 'दिल देके देखो'

पहली फिल्म थी 'दिल देके देखो'

बतौर अभिनेत्री आशा पारेख की पहली फिल्म थी 'दिल देके देखो', थी, उसके बाद उन्होंने 'जब प्यार किसी से होता है', 'घराना', 'भरोसा', 'मेरे सनम', 'तीसरी मंजिल', 'दो बदन', 'उपकार', 'शिकार', 'साजन', 'आन मिलो सजना, 'कारवां' , ' कटी पतंग' और 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' जैसी अनगिनत चर्चित फिल्मों में काम किया है।

फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

साल 1995 में आशा ने अभिनय से संन्यास ले लिया , आशा पारेख को 2002 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। हाल के दिनों में उन्हें कई रियलिटी शो में बतौर गेस्ट देखा गया है, हालांकि वो सोशल प्लेटफार्म से काफी दूर रहती हैं।

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