किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए छलका अनुपम खेर का दर्द! आंदोलन को लेकर बोली ये बड़ी बात
हिंदी सिनेमा के शानदार कलाकारों में से एक हैं अनुपम खेर। जल्द ही एक्टर फिल्म कागज 2 में नजर आने वाले हैं। इसी पर बात करते हुए हाल ही में एक्टर ने किसान आंदोलन का भी जिक्र किया।
अनुपम खेर ने कहा कि किसी भी कलाकार को एक कार्यकर्ता के रूप में काम नहीं करना चाहिए। एक्टर बोले कि उन्होंने व्यक्तिगत क्षमता से विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया है। उनकी फिल्म कागज 2 भी प्रदर्शनों और रैलियों के नेगेटिव इम्पेक्ट के विषय पर आधारित है। वीके प्रकाश के निर्देशन में बनी ये फिल्म रैलियों के कारण आम इंसान को होने वाली दिक्कतों को लेकर है।

एक्टर ने आगे कहा कि मनोरंज जगत से जुड़े लोगों को योद्धा नहीं माना जाता। मैंने पर्सनली हर उस चीज के बारे में आवाज उठाई है, जिसने मुझे परेशान किया। मगर मैंने इसके परिणाम भी भुगते। इसकी वजह से ही मैं लोगों के बीच अलोकप्रिय भी हुआ। मगर सच कहूं तो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
एक्टर ने आगे कहा कि मैं अपने विचारों के साथ शांति से सोता हूं। कई मुद्दों को हल करने का आदर्श तरीका बातचीत है। हम भारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन का परिणाम हैं मगर उस समय सभी देशवासी एक साथ थे, ये सभी के लिए था न कि सिर्फ कुछ लोगों की मदद के लिए।
इसके बाद किसान आंदोलन के बारे में बात करते हुए खेर ने कहा कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार है मगर इससे आम लोगों की जिंदगी पर असर नहीं पड़ना चाहिए। एक्टर बोले कि हर किसी को घूमने-फिरने की आजादी और अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार है। मगर किसी को भी किसी दूसरे को असुविधा पहुंचाने का कोई हक नहीं है।
हमारे देश में आजकल ऐसा ही हो रहा है। मुझे नहीं लगता कि पूरे देश का किसान इस विरोध प्रदर्शन से सहमत होगा। मुझे लगता है कि हम जो कर चुकाते हैं, वो भी देश की वृद्धि में ही योगदान कर रहे हैं। मुझे लगता है कि आम लोगों की जिंदगी को ऐसा दयनीय बनाना सही नहीं है।












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