Adipurush Review: रामायण से एक्सपेरिमेंट कर 'आदिपुरुष' का हुआ ऐसा हाल, कहीं लगा 'छक्का' तो कहीं हुए Bold Out
Adipurush Movie Review: साउथ के सुपरस्टार प्रभास और बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन की फिल्म 'आदिपुरुष' आखिरकार आज यानी 16 जून को रिलीज हो गई है। थिएटरों में सुबह से ही लोगों की भीड़ को देखकर ये उम्मीद की जा रही है ये मूवी सुपरहिट साबित हो सकती हैं। हालांकि कुछ लोगों को फिल्म का वीएफएक्स काफी खराब लगा है लेकिन लोगों ने फिल्म के लीड हीरो राघव यानी प्रभास के एक्टिंग की जमकर तारीफ की है। लोगों की मानें तो प्रभु श्रीराम के किरदार में प्रभास और माता सीता के रोल में कृति सेनन ने दमदार एक्टिंग की है। आइए आपको बता दें कि इस फिल्म का रिव्यू कैसा रहा।
रामायण महाकाव्य का मॉर्डन एडेप्टेशन
'राघव ने मुझे पाने के लिए शिव धनुष तोड़ा था,अब उन्हें रावण का घमंड तोड़ना होगा।' माती सीता का ये दमदार डायलॉग लोगों की जुबान पर चढ़ गया है। वहीं हनुमान के किरदार ने भी लोगों को खुश किया है। लोग ट्विटर पर इस फिल्म को लेकर जमकर अपना रिएक्शन दे रहे हैं। फिल्म 'तानाजी' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पा चुके डायरेक्टर ओम राउत ने आज की जनरेशन को ध्यान में रखते हुए इस महाकाव्य को एक मॉर्डन एडेप्टेशन के साथ दर्शकों के सामने पेश किया है। ऐसे में फिल्म के सभी करिदार आज के युग की तरह बातचीत करते नजर आ रहे हैं।

दर्शकों ने फिल्म देखकर कही ये बात
रामायण का ये मॉर्डन एडेप्टेशन जहां कुछ लोगों को खूब पसंद आया है वहीं कुछ लोग इससे नाराज नजर आ रहे हैं। साथी ही कई डायलॉग्स को लेकर सोशल मीडिया पर मीम्स भी बनाए जा रहे हैं। दर्शकों की मानें तो हम जिस रामायण को देखने-सुनने के आदी हैं, उसकी एक बहुत ही मजबूत छवि हमारे दिलों में बसती हैं। ऐसे में उस छवि के साथ एक्सपेरिमेंट्स में सावधानी बरतना बहुत ही जरूरी है और यही पर मेकर्स ने भूल की है।
ये है फिल्म 'आदिपुरुष' की कहानी
फिल्म की कहानी की शुरुआत महर्षि वाल्मीकि की रामायण की तर्ज पर ही होती है, जहां राम सिया राम गीत के माध्यम से बैकड्रॉप में राम और सीता का विवाह, कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से तीन वचन की मांग, राम-सीता-लक्ष्मण का वनवास, छोटे भाई भरत द्वारा बड़े भाई की पादुकाएं ले जाना जैसे सारे प्रसंग एकसाथ दिखाए जाते हैं। इसके बाद दिखाया जाता है कि राघव (प्रभास) अपनी पत्नी जानकी (कृति सेनन) और शेष (सनी सिंह) के साथ पिता के दिए गए वचनों का पालन करने के लिए वनवास काट रहे हैं। उधर लंका में रावण की बहन अपनी कटी हुई नाक लेकर भाई लंकेश (सैफ अली खान) के पास जाकर विलाप करती हैं।
बहन सुर्पनखा ही भाई लंकेश को प्रतिशोध के लिए ब्रह्मांड की सर्वाधिक सुंदरी जानकी का अपहरण कर लंका लाने के लिए उकसाती है। जंगल में जानकी को एक स्वर्ण मृग दिखाई देता है, जिसे लाने के लिए वह राघव से कहती हैं। जानकी की इच्छा को पूरा करने के लिए राघव स्वर्ण मृग के पीछे दौड़ते हैं, इस बात से अंजान कि वह महज रावण का एक छलावा है। वहीं शेष को अपने भाई राघव की मदद की गुहार सुनाई देती है।
शेष भाभी जानकी को लक्ष्मण रेखा पार न करने की हिदायत देकर राघव की सहायता के लिए निकल पड़ता है और इधर रावण भिक्षा लेने के बहाने साधु का वेश धारण करके सीता को हर ले जाता है। इसके बाद राघव द्वारा सुग्रीव और हनुमान की मदद से लंकेश के संहार ही कहानी का इस फिल्म का क्लाइमेक्स है। इसके बीच में जटायु-रावण का युद्ध, शबरी के बेर, बाली-सुग्रीव का मल्ल युद्ध, रामसेतु का बनना, हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी लाना, इंद्रजीत और मेघनाद वध जैसे प्रसंगों को भी जल्दबाजी में समेटा गया है।
ये है 'आदिपुरुष' का रिव्यू
आपको बता दें कि 'आदिपुरुष' के फर्स्ट लुक को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था और उसके बाद इसमें काफी बदलाव किए गएहैं। लेकिन कुछ चीजों के साथ कोई बदलाव नहीं हुआ। फिल्म का वीएफएक्स काफी कमजोर साबित हुआ है। 2डी के मुकाबले फिल्म 3डी में ज्यादा बेहतर लग रही है। फिल्म के स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स ने भी दिक्कतें पैदा की है।
मनोज मुंतशिर के लिखे डायलॉग्स में जहां राघव और रावण के चरित्र बहुत ही शानदार हिंदी जैसे- जानकी में मेरे प्राण बसते हैं, मर्यादा मुझे अपने प्राणों से भी प्यारी है, बोलते नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर बजरंग (देवदत्त) और इंद्रजीत (वत्सल सेठ), तेरी बाप की जलेगी, बुआ का बगीचा समझा है क्या, जैसे टपोरी भाषा के डायलॉग्स बोलकर लोगों के मजाक के पात्र बन गए हैं। डायरेक्टर ओम राउत ने फिल्म को मॉडर्न लुक देने की पूरी कोशिश की है लेकिन इस चक्कर में कई चीजें बिगड़ गई हैं। फिल्म में रावण की लंका को ग्रेइश कैसल लुक दिया है, जो रावण की सोने की चमचमाती लंका के बिल्कुल विपरीत 'हैरी पॉटर' या 'गेम ऑफ थ्रोन्स' के किले की तरह दिख रही है।
फिल्म की कुल अवधि तीन घंटे से ज्यादा है। ऐसे में लोगों को ये फिल्म काफी लंबी लग रही है। फिल्म के फर्स्ट हाफ में बहुत कुछ एकसाथ दिखाया गया है जबकि इंटरवल के बाद इसकी कहानी सिर्फ वीएफएक्स से सजे राम-रावण के युद्ध में सिमटकर रह जाती है। डायरेक्टर ने अहिल्या, मेघनाद वध जैसे रामायण के कई जरूरी प्रसंगों को छोड़ दिया है। बाली और सुग्रीव को वानरों का विशुद्ध रूप दिया है, तो रावण के लुक, कॉस्ट्यूम और उसके शस्त्रों को कुछ ज्यादा ही मॉर्डन करने की कोशिश की गई है।
फिल्म में रावण के अस्त्र-शस्त्र 'गेम ऑफ थ्रोन्स' की याद दिला रहे हैहालांकि संचित-अंकित बल्हारा का बैकग्राउंड स्कोर दमदार है, लेकिन अजय-अतुल म्यूजिक में उतना कमाल नहीं दिखा पाए हैं। जय सियाराम राजाराम गाना लोगों को काफी पसंद आया है। एक्टिंग की बात करें तो प्रभास ने राघव के मर्यादा पुरुषोत्तम वाले रूप को बखूबी निभाया है। रावण के रूप में सैफ अली खान अच्छे लग रहे हैं लेकिन खराब वीएफएक्स ने उनके कैरेक्टर को अजीबोगरीब बना दिया है।
वहीं जानकी के रूप में कृति सेनन अच्छी नजर आई हैं। खूबसूरत लगने के साथ-साथ उन्होंने अच्छी एक्टिंग भी की है। हालांकि उन्हें ज्यादा स्क्रीन स्पेस नहीं दिया गया है। लक्ष्मण के रूप में सनी सिंह लोगों को कुछ खास नहीं लगे। वहीं बजरंग के रूप में देवदत्त ने अपने चरित्र के साथ पूरा न्याय किया है। वहीं बिल्कुल राम भक्त हनुमान की तरह ही प्रतीत होते हैं। मंदोदरी के किरदार में सोनल चौहान केवल दो सीन में ही नजर आई हैं। इंद्रजीत के रोल में वत्सल सेठ को अच्छा-खासा स्क्रीन स्पेस मिला है, जिसे उन्होंने खूबसूरती से निभाया है।












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