दुर्ग : स्कूलों में दम तोड़ती सुचिता, डेढ़ करोड़ की मशीने कबाड़, बेटियों को उन दिनों में संक्रमण का खतरा

स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने, भाजपा सरकार में पूर्व महिला बाल विकास मंत्री रमशीला साहू ने यूनिसेफ के सहयोग से स्कूलों में सुचिता योजना शुरु की थी। लेकिन अब यह सुचिता योजना दम तोड़ रही है।

दुर्ग, 24 जुलाई। छत्तीसगढ़ में पूर्व भाजपा सरकार की महत्वकांक्षी योजनाएं दम तोड़ती नजर आ रही है। वहीं वर्तमान कांग्रेस सरकार भी इस पर कोई रुचि नहीं दिखा रही है। इन्ही योजनाओं में सुचिता योजना भी शामिल है। दरअसल स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने एवं बेटियों को जागरूक करने, भाजपा सरकार में पूर्व महिला बाल विकास मंत्री रमशीला साहू ने यूनिसेफ के सहयोग से स्कूलों में सुचिता योजना शुरु की थी। प्रदेशभर के लगभग 2000 स्कूलों में वेंडिंग व भस्मक मशीने लगाई गई थी। सरकार को इसका अच्छा रिजल्ट भी मिल रहा था। लेकिन मेंटेनेंस के अभाव में योजना ने दम तोड़ दिया।

suchita

क्या है, सुचिता योजना
प्रदेश के शासकीय स्कूलों और कॉलेजों में पीरिड्स के दिनों में भी बेटियां स्कूल आ सकें और अपनी पढ़ाई जारी रख सकें, इसके लिए भाजपा शासनकाल में 6 साल पहले हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में सेनेटरी पैड की वेंडिंग मशीन लगाई थी। जिस पर एक रुपए का सिक्का डालकर एक सेनेटरी पैड छात्राएं प्राप्त करती थी। जो अब कबाड़ हो गई है। इस ओर किसी जिम्मेदार का ध्यान नहीं हैं। विभाग के अफसर भी उदासीन बने हुए हैं।

भस्मक मशीन भी हो चुकी खराब
सेनेटरी वेंडींग मशीन के साथ ही सरकार ने भस्मक मशीन इंस्टॉल किया था। जिससे सेनेटरी पैड के इस्तेमाल के बाद छात्राएं मशीन के अंदर इसे डाल कर नष्ट कर सकें। सेनेटरी वेंडिंग मशीन के साथ ही भस्मक मशीनें भी स्कूलों में कबाड़ हो चुकी हैं। इनके रिपेयर के लिए भी जिला शिक्षा विभाग व महिला बाल विकास विभाग कोई कदम नहीं उठा रहा है

स्कूलों में एक्सपाइयरी नैपकीन वितरित
दुर्ग जिले के रुआबांधा हायरसेकंडरी स्कूल में मशीन तो पहले ही कबाड़ हो चुकी है। उसमें फीड करने पैड पहुंचे थे। वह भी एक्सपाइयरी होने लगे हैं। तो अब टीचर्स उन पैड को छात्राओं को हांथो से ही बांट रहे हैं। लेकिन इससे बालिकाओं में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वहीं खुले में रखे सैनेटरी पैड मौसम के नमी से खराब हो चुके हैं। जिसका वितरण बालिकाओं को किया जा रहा है।

छात्राओं की उपस्थिति हो रही कम
जिले के 209 स्कूलों में एक करोड़ 60 लाख रुपए की लागत से सेंनेटरी पैड वेंडिंग मशीने लगाई गई थी। जो अब किसी काम की नहीं रही। अब बेटियां पीरिड्स के दिनों में स्कूल आने से कतराती हैं। वही उनकी उपस्थिति पर भी लगातार असर पड़ रहा है। साथ ही बच्चे स्कूलों में शिक्षकों से पैड मांगने से झिझक महसूस करती हैं।
शिक्षिकाओं से मांगने, महसूस होती है झिझक
सेक्टर-9 हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राओं ने बताया कि यहां जब मशीन लगी थी, तब वे मिडिल स्कूल में थी। अब हायर सेंकडरी में पहुंच गई। जब से मशीन लगी तब से खराब ही है। अब छात्राओं को स्कूल के शिक्षिकाओं से पैड मांगने में झिझक होती है। वे सार्वजनिकता से अकेले में टीचर से बात करने का इंतजार करतीं हैं। प्राचार्य ने बताया कि छात्राओं के लिए स्टॉक में कुछ नैपकीन मार्केट से मंगा रखा है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बांटा जा सकें।

मशीनों के मेंटनेश में अधिकारी भी नही दिखा रहे रुचि
दुर्ग के जिला शिक्षा अधिकारी अभय जयसवाल का कहना है कि स्कूलों में वेंडिंग मशीने 2016 में लगाई गई थी, अब वह कबाड़ में फेंकने लायक है। इसके मेंटनेस को लेकर कुछ भी काम नहीं हुआ था। लेकिन छात्राओं की दिक्कत को देख जल्द ही नई मशीन लगाने प्रस्ताव बनाया जाएगा।

यूनिसेफ के सहयोग से हुई थी योजना की शुरुआत
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी विपिन जैन का कहना है। एक निजी संस्था द्वारा जिले के सिमरिया स्कूल में वेंडिंग मशीन लगाई गई थी जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने राष्ट्रीय बालिका दिवस पर घोषणा कर सुचिता योजना के तहत सभी स्कूलों और कॉलेजों में लगाने की घोषणा की थी। स्कूलों में महिला एवं बाल विकास विभाग ने यूनिसेफ के सहयोग से बरसों पहले मशीन लगाई थी, पर मेंटेनेस की जिम्मेदारी विभाग की नहीं थी। मशीनों का क्या हाल है यह शिक्षा विभाग के जरिए ही पता चलेगा, लेकिन बेटियों के लिए यह सुविधा जरूरी है।

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