बौद्ध तीर्थ के रूप मे विकसित हो रहा छत्तीसगढ़ का प्रज्ञागिरी पर्वत, बुद्ध की 30 फिट ऊंची प्रतिमा स्थापित
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ पहाड़ी पर बसी मां बमलेश्वरी के दर्शन करने देशभर के लोग यहां पहुंचते हैं। लेकिन इस धर्मनगरी में अब एक और तीर्थ स्थल का नाम जुड़ गया है।प्रज्ञागिरी बौद्ध तीर्थ के नाम से जाना जाएगा।
राजनांदगांव, 19 जुलाई। तीर्थ स्थलों की सूची में छत्तीसगढ़ में अब एक और तीर्थ स्थल का नाम जुड़ गया है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ पहाड़ी पर बसी मां बमलेश्वरी के दर्शन करने देशभर के लोग यहां पहुंचते हैं। लेकिन इस धर्मनगरी में अब एक और तीर्थ स्थल का नाम जुड़ गया है। जिसे प्रज्ञागिरी बौद्ध तीर्थ के नाम से जाना जाएगा। इस तीर्थ स्थल को केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के माध्यम से विकसित करने का काम किया जा रहा है।

प्रज्ञागिरी पहाड़ी पर हर साल होता है, बौद्ध धम्म सम्मेलन
प्रज्ञागिरी विकसित होने के बाद बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाएगा। प्रज्ञागिरी ट्रस्ट समिति के माध्यम से इसका संचालन किया जा रहा है। प्रज्ञागिरी बौद्ध तीर्थ स्थल में हर साल छह फरवरी को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धम्म सम्मेलन होता है। यहां पर हर साल भारत ही नहीं बल्कि जापान, थाईलैंड, तिब्बत, नेपाल , वियतनाम, कंबोडिया जैसे बुद्धिस्ट देशों से भी पर्यटक आते हैं। समिति के सचिव शैलेंद्र डोंगरे ने बताया कि इसे विकसित करने पर प्रज्ञागिरी बौद्ध तीर्थ में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।

प्रज्ञागिरी पहाड़ी पर स्थित 50 फीट ऊंची दो चट्टानों के मध्य 22 फीट ऊंचे चबूतरे पर निर्मित 30 फीट ऊंची भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा ध्यान मुद्रा में स्थापित की गई है। इतनी ऊंची पहाड़ी पर प्रतिमा संपूर्ण भारत में अपनी एक अलग पहचान रखती है यहां आसपास अनेक पेड़-पौधे हैं जो एक अनुकूल वातावरण बनाते हैं जिससे पर्यटकों को प्रज्ञागिरी तीर्थ जाने से अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है।
केंद्र की प्रसाद योजना के तहत बौद्ध तीर्थ का विकास
केंद्र सरकार की प्रसाद योजना व प्रज्ञागिरी ट्रस्ट के सहयोग से प्रज्ञागिरी बौद्ध तीर्थ में पर्यटन के रूप में विकसित करने कई निर्माण कार्य किये जा रहें हैं। जिसमें कैफेटेरिया हॉल, मेडिटेशन सेंटर, पार्किंग व गार्ड रूम, वाटर कूलर, वाटर टैंक, सीढ़ियों का जीर्णोद्धार व रेलिंग, स्टोन साइन सेनीटेशन फिटिंग, सोलर लाइट, सीसीटीवी फायर फाइटिंग अलार्म और ट्रांसफार्म सहित अन्य काम चल रहा है। कार्य जल्द ही पूरा होने के बाद बौद्ध तीर्थ के रूप में प्रज्ञागिरी विकसित हो जाएगा।












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