पचास रुपये में कैसे करें गुजारा, रसोइया संघ की अनिश्चित कालीन हड़ताल, बच्चे भूखे पेट कर रहे पढ़ाई
छत्तीसगढ़ में स्कूल रसोईया संघ के हड़ताल पर जाने से सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन पकाने को लेकर माथापच्ची जारी है। बालोद जिले में भी स्कूल रसोईया संघ अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर है।
बालोद, 13 जुलाई। छत्तीसगढ़ में स्कूल रसोईया संघ के हड़ताल पर जाने से सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था चरमरा गई है। बालोद जिले में भी स्कूल रसोईया संघ अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर है। स्कूल रसोईया संघ ने बालोद के बस स्टैंड के सामने टेंट लगाकर प्रदर्शन मंगलवार से शुरू कर दिया है। वहीं बच्चों को भूखे पेट ही पढ़ाई करना पड़ रहा है। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों में स्व-सहायता समूह को भोजन पकाने की जिम्मेदारी दी है। लेकिन फिलहाल स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी इस काम से अपना हाथ खींच रही है।

मध्यान्ह भोजन प्रभारी रजनी वैष्णव ने बताया कि वे स्वयं स्कूलों का जायजा करने के लिए पहुंचे थे। पाया कि कई जगह पर समूह भोजन पकाने से मना कर रहे। कई जगह पर भोजन नहीं बना था। बच्चों को लंच की छुट्टी दे दी गई। वह घर जाकर खाना खाकर आए हैं। वैकल्पिक व्यवस्था बनाने कहा गया है पर वे तैयार नहीं हो रहे हैं। उनका कहना कि 50 रुपए में खाना बनाने के लिए कोई नही आता है। कम से कम 150 रुपए दिया जाना चाहिए। लेकिन हम भी शासन के निर्देश के अनुसार भुगतान कर सकते हैं।

इस हड़ताल से बच्चों की प्रभावित होती पढ़ाई को देखते हुए डीईओ प्रवास बघेल ने स्पष्ट आदेश दिया कि भोजन पकाने की जिम्मेदारी स्व सहायता समूह की है। रसोईया नहीं आ रहे हैं, तो भोजन स्व सहायता समूह वालों को ही पकाना है। शिक्षकों को इससे दूर रहने की नसीहत दी गई है। ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो। इधर 12 जुलाई से शुरू हो गई रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से व्यवस्था मानो लड़खड़ा गई है। आधे से ज्यादा स्कूलों में मध्यान्ह भोजन नहीं बन पाया। स्वयं जब शिक्षा विभाग के अफसर स्कूलों का जायजा लेने के लिए पहुंचे तो भोजन नहीं पाया गया। बालोद ब्लॉक के कई स्कूलों में बच्चों को भूखे पेट रहकर पढ़ाई करनी पड़ी।
बारिश के बावजूद छाता लेकर धरना स्थल पर डटी रही महिलाएं
वहीं बालोद के बस स्टैंड में अनिश्चित कालीन हड़ताल के पहले दिन भी जिले भर के रसोइयों ने धरना दिया, आगे भी रसोइये घर में रहकर हड़ताल करेंगे. जिले के रसोइयों ने अपनी 3 सूत्रीय मांगों को लेकर 12 जुलाई मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। संघ की तीन मांगे हैं कि उनके कार्य का समय निर्धारित किया जाए। समान वेतन लागू किया जाए। इस महंगाई में 50 रुपये में गुजारा नहीं हो सकता। संघ की महिलाओं की मांग है कि रसोइयों को कोर्ट द्वारा तय 9780 के हिसाब से प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। रसोइयों की नियुक्ति व हटाने का अधिकार शासन स्तर पर दी जाए।
सरकार दे रही 50 रुपये मानदेय, कैसे चले गुजारा
रसोइयों को प्रतिदिन 50 रुपए के हिसाब से मानदेय मिल रहा था। रसोईया संघ की मांग है कि उन्हें सम्मानजनक मानदेय दिया जाए जिन से अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। । लेकिन 50 रुपए में कोई खाना बनाने को तैयार नहीं होता है। अस्थाई मजदूर या रसोइए 150 रुपए की मांग करते हैं। क्योंकि महिलाओं को गांवों में ही खेती किसानी में प्रतिदिन के डेढ़ सौ रुपए मिल जाते है। पर जहां शासन से रसोइयों को 50 के हिसाब से 1500 रुपए मानदेय तय किया है। ऐसे में 50 रुपये में कोई खाना बनाने को तैयार नहीं हो रहे हैं।












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