दुर्ग: पतोरा की महिलाओं ने तोड़ा "पुरुष प्रधान समाज" का मिथक, महिला मुखिया के नाम से जाना जाता है गांव

आज ग्राम पतोरा में 35 महिला समूह अलग अलग आजिविका के कार्य कर रही है। जिससे महिलाएं घर में वास्तविक मुखिया की भूमिका अदा करती है।

दुर्ग, 25 जुलाई। महिला सशक्तिकरण की दिशा में दुर्ग जिले के ग्राम पतोरा ने एक ऐसा कदम बढ़ाया है जिसकी चर्चा दिल्ली तक हो रही है। प्रदेश के किसी गांव में पहली बार घर के बाहर मुखिया का नाम महिला के नाम पर लिखा गया है। यहां पंचायत ने तय किया कि महिला सशक्तिकरण तभी होगा जब महिलाओं के हाथ में जिम्मेदारी होगी। आज ग्राम पतोरा में 35 महिला समूह अलग अलग आजिविका के कार्य कर रही है। जिससे महिलाएं घर में वास्तविक मुखिया की भूमिका अदा करती है।

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समाज पुरुष प्रधान नही अब महिला प्रधान होगा
ग्राम पतोरा में पंचायत द्वारा अभिनव पहल की गई जिससे महिलाओ को पुरुषों की तरह मान सम्मान मिल सके, महिलाएं भी पुरुषों की तरह कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ सके। ग्राम पतोरा ने महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत सन्देश दिया जिससे गांव के लोग काफी गौरवान्वित है। ग्राम पतोरा की महिलाओं ने अब इस बात को नकारा है कि महिलाओं की सीमा सिर्फ घर में चूल्हा चौंका सम्भालने तक ही है। महिलाओं ने सबसे पहले घर के बाहर दरवाजे से पुरुषों का नाम हटाकर गांव के हर घर में महिला मुखिया का नाम इंगित कर महिला सशक्तिकरण का उदाहरण पेश किया ।

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पुरुषों की तरह मिल रहा मान सम्मान
गांव की सरपंच अंजीता साहू ने बताया कि हमने यह निर्णय लिया कि गांव की महिलाओ को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे । स्वाभाविक रूप से इस कदम से महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी। साथ ही इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ हमने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयासों को बढ़ावा देंने का काम शुरु किया। ग्राम पतोरा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए यह अहम है कि मुखिया की जिम्मेदारी महिलाओं को दी जाए, क्योंकि घर के अहम निर्णय में अंतिम रूप से मुखिया की स्वीकृति होती है। स्वाभाविक रूप से पतोरा में जब यह निर्णय लिया गया है, तो इसके परिणाम बहुत अच्छे आ रहें है।

35 महिला समूह कर रहीं है आजीविकामुलक कार्य
आज ग्राम पतोरा में 35 महिला समूह कार्य कर रहें है जिनमे, मशरूम उत्पादन, बड़ी,आचार, पापड़, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण व उसके लिए पैकेट की सिलाई, बाड़ी में सब्जी उत्पादन जैसे कार्य कर रही हैं। नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के तहत महिलाएं सब्जी उत्पादन का कार्य कर रहीं है, और आत्म निर्भर बन रही हैं। महिलाओं के हाथ मजबूत होने से स्वाभाविक रूप से परिवार भी मजबूत होगा और परिवार मजबूत होने से गांव मजबूत होगा। गांव की महिलाओं ने बताया कि स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर ही परिवार का संचालन करते हैं। घर के अधिकतर निर्णय महिलाएं लेती हैं। अब महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। जिससे वे अब खुशहाल जिंदगी जी रही हैं।

महिलाओ ने संभाला सीवरेज ट्रीटमेंट का काम
आम तौर पर शहरों में शिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होते हैं लेकिन महिला समूह के प्रयासों से गांव में भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया जिसका संचालन स्वयं महिलाएं कर रहीं है। बारिश के पानी से लेकर सीवरेज के पानी को बाड़ियों में सब्जी उत्पादन में उपयोग किया जाता है। इसका पूरा सिस्टम तैयार किया गया है।

दिल्ली से पहुंचे स्वच्छ भारत की टीम ने सराहा,
पतोरा गांव में ग्रामीणों के इस नवाचार को देखने दिल्ली से टीम दुर्ग पहुंची थी। दिल्ली की टीम ने इस नवाचार की प्रशंसा की और गांव के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण जनों से बातचीत की। दिल्ली के टीम के सदस्यों ने कहा कि यह पहल बहुत ही महत्वपूर्ण है। नारी सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। दिल्ली की टीम से स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी आनंद शंकर के साथ अधिकारी पहुंचे थे। पतोरा गांव की पंचायत ने ऐसी पहल की है जो पूरे देश के लिए मिसाल बनेगी।

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