कॉलेज ब्रेकिंग : सेमेस्टर सिस्टम से अब कॉलेज की पढ़ाई, साल में दो बार देना होगा एग्जाम, 4 साल में ऑनर्स

राज्य के कॉलेज छात्रों को नए सिस्टम में एडमिशन लेना होगा। अब कॉलेजों में वार्षिक पद्धति की जगह 6-6 माह के सेमेस्टर सिस्टम से पढ़ाई होगी । छात्रों को साल में दो बार एग्जाम देना पड़ेगा।

दुर्ग, 18 जुलाई। छत्तीसगढ़ का उच्च शिक्षा विभाग ने अब कॉलेजों में एक नया प्रयोग करने की तैयारी में हैं कॉलेजों में शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ाने कुछ शिक्षा विभाग लगातार नए प्रयोग कर रहा है। इसी के तहत इसी सत्र से राज्य के कॉलेज छात्रों को नए सिस्टम में एडमिशन लेना होगा। अब कॉलेजों में वार्षिक पद्धति की जगह 6-6 माह के सेमेस्टर सिस्टम से पढ़ाई होगी । छात्रों को साल में दो बार एग्जाम देना पड़ेगा। इसके लिए अब बीए, बीएससी और बीकॉम का कोर्स तीन की जगह चार साल का बनाया जा रहा है जिसमें छात्रों को चौथे साल में ऑनर्स की डिग्री मिलेगी। सेमेस्टर एग्जाम जून और दिसंबर में होंगे।

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इसी सत्र में एडमिशन लेने की तैयारी
दुर्ग साइंस कॉलेज समेत राज्य के 8 स्वशासी महाविद्यालयों में 1 अगस्त से चार वर्षीय बीए, बीकॉम और बीएससी ऑनर्स कोर्स शुरू हो रहा है। बताया जा रहा है कि नए पाठ्यक्रम के तहत हर साल के लिए अलग-अलग कोर्स तैयार किया जा रहा है। इसमें विद्यार्थियों को मूल विषय के साथ ही एडिशनल कोर्स के तहत एनसीसी, एनएसएस, योग और स्पोर्ट्स में से किसी एक विषय को लेना अनिवार्य होगा।

छात्रों को हर साल मिलेगा सर्टिफिकेट
पुराने सिस्टम के अनुसार कोर्स करने वाला छात्र यदि तीन साल का कोर्स करने से पहले पढ़ाई छोड़ दे तो उसे डिग्री नहीं मिलती थी। ऑनर्स कोर्स में ऐसा नहीं होगा। नए नियम के तहत प्रथम वर्ष की पढ़ाई करने पर विद्यार्थी को सर्टिफिकेट इन बीए, बीकॉम या बीएससी, सेकंड ईयर में डिप्लोमा और तीसरे साल में में डिग्री का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। चौथे साल कोर्स पूरा करने के बाद उसे ऑनर्स बीए, बीकॉम और बीएससी की डिग्री दी जाएगी। इसके साथ ही छात्रों को स्पेसिफिक कोर्स के तहत अंग्रेजी या हिंदी भाषा पढ़नी होगी। द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को स्पेसिफिक कोर्स में पर्यावरण पढ़ना होगा। बीएससी फाइनल ईयर के विद्यार्थियों को मैथ्स व साइंस सब्जेक्ट के मुताबिक वैदिक गणित, केमिकल एनालिसिस, और इलेक्ट्रॉनिक्स विषय भी पढ़ना होगा। पीएचडी करने के लिए

एक साल का होगा पोस्ट-ग्रेजुएशन
इस नए कोर्स के अनुसार 4 साल का ऑनर्स करने वाले छात्र को सिर्फ 1 साल पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करनी होगी, जिसके बाद वे पीजी का सर्टिफिकेट ले सकेंगे, वहीं छात्र अगर चाहे तो ग्रेजुएशन के 3 साल में ही अपनी पढ़ाई छोड़ सकता है, लेकिन उन्हें 2 साल पोस्ट ग्रेजुएशन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही ऑनर्स के छात्रों को सीधे पीएचडी करके डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करने का मौका मिलेगा ।

राज्य के 8 ऑटोनोमस कॉलेजों में शुरु होगा पायलट प्रोजेक्ट
उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त शारदा वर्मा ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राज्य के 8 स्वशासी( Autonomus) महाविद्यालयों का चयन किया गया है। उसमें दुर्ग संभाग से साइंस कॉलेज और दिग्विजय कॉलेज राजनांदगांव शामिल हैं। इसके अलावा 6 अन्य में रायपुर के 3, बिलासपुर के 2 और अंबिकापुर का एक कॉलेज शामिल है। इन महाविद्यालयों में सीटों की संख्या पहले की तरह ही रहेगी।
इसलिए बनाया गया कोर्स
इस कोर्स को लागू करने का मुख्य उद्देश्य स्नातक करने वाले युवाओं को हुनरमंद बनाना है। ऑनर्स कोर्स पढ़कर निकलने के बाद विद्यार्थी को रोजगार की समस्या नहीं होगी। उनकी अंक सूचियों में सभी विषयों का उल्लेख होगा। उनकी पढ़ाई के आधार पर उन्हें क्रेडिट भी दिया जाएगा।

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