Chhattisgarh की खुशहाली के लिए CM Bhupesh ने सहा सोटे का प्रहार, जानिए क्या है इसकी मान्यता
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी सहजता और सरलता के साथ आम नागरिकों से मिलने के लिए जाने जाते हैं । दीपावली पर्व पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अपने प्रोटोकोल को भुलाकर आम जनता के बीच पहुंचते हैं। कुछ इस तरह आज दुर्ग जिले के ग्राम जंजगिरी और कुम्हारी में मुख्यमंत्री गौरा-गौरी पूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे जहां उन्होंने 18 सालों से चली आ रही सोटा लेने की परम्परा का निर्वहन किया।
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CM को बीरेंद्र ने मारा सोटा, सालों से चली आ रही परम्परा
इस मौके पर गोंड समाज से बीरेंद्र ठाकुर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों में सोटे का इस तरह प्रहार किया कि लोग देखकर हैरान रह गए हैं। दरअसल यह परंपरा लगभग 18 सालों से चली आ रही है। मुख्यमंत्री हर साल इस तरह सोटा लेने जंजगिरी पहुंचते हैं। बैगा बीरेंद्र ठाकुर ने मुख्यमंत्री के हाथों में चार बार पैरा डोरी से बना चाबुक नुमा सोटा चलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने लोगों के साथ गौरा गौरी की पूजा का आनंद और भी बढ़ जाता है। ग्रामीण महिलाएं गौरा गौरी के साथ भ्रमण करते हैं। यह कितनी सुंदर परंपरा है। त्योहार की खुशियों के साथ आप सबके जीवन में हमेशा सुख समृद्धि रहे, यही कामना करता हूँ।

गौरा-गौरी पूजा कर प्रदेश के खुशहाली की कामना
हर साल दीपावली पर्व के दूसरे दिन गौरा गौरी पूजन का आयोजन, गोंड समाज द्वारा किया जाता है। छत्तीसगढ़ के गोंड़ आदिवासी समाज की ओर से भगवान शंकर और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर गौरा-गौरी के रूप में पूजन किया जाता है। हर साल मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस पूजन कार्यक्रम में शामिल होते हैं, और गौरा-गौरी की पूजा कर भगवान शिव माता पार्वती से प्रदेश की खुशहाली की कामना करते हैं। इस बार भी मुख्यमंत्री पाटन ब्लाक के ग्राम जंजगिरी और कुम्हारी में गौरा गौरी पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां उन्होंने ग्रामीणों को दीपावली पर्व की शुभकामनाएं दी।

जनता के प्यार के आगे सीएम भूल जाते हैं प्रोटोकॉल
दरअसल किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री को इतनी सख्त सुरक्षा दिया जाता है, कि कोई सीएम को कोई टच भी नहीं कर सकता, लेकिन छत्तीसगढ़ में सीएम भूपेश बघेल इस तरह के सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनता के प्यार के आगे अपने प्रोटोकोल तक को भूल जाते हैं। वे सहज ही लोगों से मेल मुलाकात करने लगते हैं। इस तरह आज भी सीएम भूपेश बघेल ने ग्राम जंजगिरी और कुम्हारी पहुंचे। जहां वे आम लोगों से सहजता से मिलते नजर आए और जिन्हें वे निजी रूप से जानते हैं। उन्हें उनके नाम से सम्बोधित भी करते हैं। सीएम भूपेश की स्मरण क्षमता के ग्रामीण और उनके बचपन के साथी भी मुरीद हैं।

जानिए क्या है सोटा लेने के मान्यता
सोटा लेने की परंपरा के पीछे की मान्यता को बताते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि, गौरा गौरी पूजा के मौके पर हर साले मैं यहां पहुंचता हूं, और मुझे ग्रामीणों को बीच पहुंचकर खुशी मिलती है। दिवाली का आनंद इन सभी से साझा कर मुझे भी खुशी मिलती है।सीएम बताते हैं कि सोटा लेने से आपके अंदर पवित्रता का भाव आता है। इसके प्रहार से हमारे सभी पाप नष्ट होते है। इसके साथ साथ जो इसके प्रहार को सहता है उसके सभी अनिष्ट टल जाते हैं। इसलिए मुख्यमंत्री प्रदेश की खुशहाली की कामना के लिए हर साल इस लोक अनुष्ठान में हिस्सा लेते हैं।












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