छ.ग.: मुख्यमंत्री की नरवा योजना से किसानों के चेहरे पर आई मुस्कान, खण्ड वर्षा से सुखे खेतों में लौटी हरियाली
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर इस योजना की शुरुआत के बाद से प्रदेश के सभी पुराने नहरों व नालों का जीर्णोद्धार शुरू किया गया। जिसका लाभ अब स्वयं सीएम के विधानसभा क्षेत्र पाटन के किसानों को मिल रहा है।
दुर्ग, 08 अगस्त। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नरवा योजना का लाभ अब ग्रामीण क्षेत्रों में देखने मिल रहा है। सरकार ने नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के तहत नरवा यानी छोटी नहरों के संरक्षण के लिए योजना तैयार की है। जिससे गांव से अंतिम छोर तक पानी पहुंच सके व सिंचित रकबा बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर इस योजना की शुरुआत के बाद से प्रदेश के सभी पुराने नहरों व नालों का जीर्णोद्धार शुरू किया गया। जिसका लाभ अब स्वयं सीएम के विधानसभा क्षेत्र पाटन के किसानों को मिल रहा है।

पाटन के ग्राम छाटा में खंड वर्षा से परेशान किसानों को मिला लाभ
ये तस्वीरें छाटा गांव से आई हैं। छाटा में इस बार कम बारिश हुई है। छाटा ही नहीं आसपास के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में खंड वर्षा हुई है। लेकिन छाटा गांव में नरवा प्रोजेक्ट के तहत नालों में चेक डेम का निर्माण किया गया था। जिससे बारिश का पानी यहाँ सिचाई के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। इसलिए यहां पर कम बारिश का कोई असर नहीं हुआ। किसान मोटर पंप लगाकर पर्याप्त पानी ले रहें हैं। और खेतों के लिए किसानों के पास पर्याप्त पानी है।

किसानों ने बताया नरवा योजना से दूर हुई परेशानी
छाटा के किसान देवेंद्र पटेल ने बताया कि इस इलाके में खंड वर्षा हुई है। लेकिन शासन ने नरवा योजना में चेक डेम बना दिया और नाले से गाद निकलवा दी है। इसलिए पानी ठहर गया और हमारे सूखे खेतों को पानी की संजीवनी मिल पायी है। गांव के किसान पुनीत ने बताया कि 19 जून को अच्छी बारिश हुई थी। और इससे ही चेक डेम में अच्छा पानी आ गया। यदि चेक डेम नहीं बनता तो पूरा पानी बह जाता।

भूमिगत जल स्तर में हुआ सुधार
इसके साथ ही नरवा कार्य होने से आसपास के खेतों में नमी भी पर्याप्त मात्रा में है, और भूमिगत जल का स्तर अच्छा बढ़ने से किसानों को लाभ हुआ है। जून से अगस्त तक चार बार वर्षा का पानी रोका गया है, और 172 एकड़ खेतों में सिंचाई की जा चुकी है। यह सिंचाई मोटर पंपों के माध्यम से हो रही है। इसके अलावा भूमिगत जल का रिसाव नाले के माध्यम से अच्छा होने से जिन खेतों में बोर है वहां भी भरपूर पानी आ रहा है।
पहले सूख जाते थे नाले, अब अप्रैल तक रहता है पानी
किसानों के अनुसार पहले इस नरवा में पानी का प्रवाह फरवरी तक ही होता था अब अप्रैल तक इसमें पानी रहता है। इससे दोनों फसले लेने के लिए रास्ता खुल गया है। जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन ने बताया कि अभी कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा के साथ नरवा योजना के किनारे के गांवों का निरीक्षण किया और सभी में भूमिगत जल का स्तर काफी बढ़ा है। किसान काफी खुश हैं। खंड वर्षा से होने वाले दुष्प्रभाव से किसान बच गये हैं और अब तक बर्बाद होने वाला पानी अब सुरक्षित रहने लगा है।
पहले चेक डेम था बदहाल
राज्य सरकार के नरवा योजना के तहत बोदल बोहारडीह से सांतरा तक सवा तीन किलोमीटर नाले पर कार्य किया गया है जिससे एक बड़े पैच में कैचमेंट एरिया का पानी भूमिगत जल के रूप में रिस रहा है, और अंततः खेतों तक पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले यहां चेक डेम तो था, लेकिन बदहाल था। इसका उपयोग ही नहीं था। अब मरम्मत हो जाने और नाले में गाद भी निकल गया। इससे बारिश की एक-एक बूंद को हम बचा पाये हैं।












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