CG : पेंट और ब्रिक्स के बाद अब गोबर से बने गणेश, Kamdhenu University ने बनाई Eco-Friendly Ganesha
दुर्ज जिले में स्थित दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा इस बार नया प्रयोग किया जा रहा है। इस बार गोबर से भगवान गणेश की प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है।
दुर्ग 26 अगस्त। छत्तीसगढ़ में गोबर से कईतरह के प्रयोग किये जा रहें हैं। गोबर से पेंट, ब्रिक्स और वर्मी कम्पोस्ट तैयार किये जा रहें हैं। अब दुर्ज जिले में स्थित दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग के अंतर्गत संचालित कामधेनु एवं पंचगव्य अनुसंधान एवं विस्तार केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा इस बार नया प्रयोग किया जा रहा है। वैज्ञानिकों ने पंचगव्य में से एक गोबर से भगवान गणेश की प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। यह प्रतिमा विशुद्ध गोबर से निर्मित हो रही है।

रसायनों से मुक्त है ये प्रतिमाएं
खासतौर पर गोबर से बनने वाले इन प्रतिमाओं की विशेषता यह है। कि यह किसी भी प्रकार की रसायनिक पदार्थो से रहित है। इस मूर्ति के विभिन्न पहलुओं पर परीक्षण कर इसे जन समान्य के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इन मूर्तियों ने रासायनिक रंगों और अन्य प्रकार के प्लास्टिक सजावटी चीजों का इस्तेमाल नही किया जा रहा है, इसमें प्रकृतिक रंगों का इस्तेमाल कर सजाया जा रहा है।

देशी गाय के गोबर से है निर्मित
यह मूर्ति पूर्ण रुप से शुद्ध देसी गाय के गोबर से निर्मित है तथा पूरी तरह से इकोफ्रेंडली है। इस मूर्ति को स्थापना व पूजा के बाद अपने घर में ही किसी टब या बाल्टी में विसर्जित कर सकते हैं। यह 1 घंटे से भी कम समय में पानी में पूर्ण रूप से घुल जाती है। इस पानी से अपने घर के पौधों को सिंचित कर सकते हैं। रसायन मुक्त होने के कारण इससे पौधों को कोई नुकसान भी नहीं होगा। कामधेनु विश्वविद्यालय ने इस अनुसंधान को लेकर कहा है कि आगे भी इस तरह के प्रयास जारी रहेंगे। कामधेनु एवं पंचगव्य अनुसंधान विस्तार केंद्र के निदेशक डॉ.के.एम.कोले सतत रूप से पंचगव्य के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य करते रहते हैं और इस अनुसंधान से काफी आशान्वित हैं।

विश्विद्यालय ने वेटनरी कॉम्प्लेक्स में लगाई प्रदर्शनी
गोबर से निर्मित भगवान गणेश के इन प्रतिमाओं की जीवंत प्रदर्शनी का उद्घाटन पूर्व विधायक , कार्यपरिषद के सदस्य प्रतिमा चंद्राकर एवं विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा पद्मनाभपुर स्थित पशु चिकित्सालय, दुर्ग में किया गया। यह प्रदर्शनी आम नागरिकों के लिए सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक टीचिंग वेटरनरी क्लीनिकल कंपलेक्स समृद्धि बाजार के बाजू में दुर्ग में लगाई गई है । इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.आर.के.सोनवाने, निदेशक पंचगव्य डॉ.के.एम. कोले, निदेशक शिक्षण डॉ.एस.पी.इंगोले, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.संजय शाक्य, अधिष्ठाता पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा डॉ.एस.के. तिवारी, निदेशकगण, प्राध्यापक/ विभागाध्यक्ष एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

गोधन न्याय योजना के तहत वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश में मुख्यमन्त्री भूपेश बघेल की महत्वकांक्षी नरवा गरवा घुरवा बाड़ी योजना के तहत गोधन न्याय योजना संचालित कर रही है। जिसके माध्यम से पशुपालकों से ₹2 किलो में गोबर व ₹4 किलो में गोमूत्र खरीदे जा रहे हैं। इस योजना के माध्यम से किसान आर्थिक रूप से सक्षम हो रहे हैं। वहीं महिला स्व सहायता समूहें गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इस योजना के माध्यम से बने वर्मी कंपोस्ट किसानों को ₹6 किलो में बेचे जा रहे हैं जिससे रासायनिक खादों के उपयोग में कमी आई है।

आप भी खरीद सकतें है ये प्रतिमाएं
जो श्रद्धालु इन प्रतिमाओं को इस वर्ष गणेश उत्सव में अपने घरों में स्थापित करना चाहते हैं। वे इन प्रतिमाओं को प्रदर्शनी स्थल अथवा अंजोरा स्थित कामधेनु पंचगव्य संस्थान में आकर मूर्तियां क्रय कर सकते हैं। प्रदर्शनी 25 अगस्त से 30 अगस्त तक रहेगी। यह प्रतिमाएं बाजारों से बहुत ही कम कीमत पर वेटनरी कॉम्प्लेक्स में उपलब्ध है।












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