बालोद: गन्ना उत्पादन से किसानो का मोह हुआ भंग, अंतर राशि की मांग को लेकर आन्दोलन की तैयारी
जिले में गन्ने की पैदावार कम होने से शक्कर कारखाने पर उत्पादन का संकट गहराता जा रहा है। वही किसानों को अब तक प्रबंधन की ओर से अंतर की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। किसानों ने 17 अगस्त को आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
बालोद, 08 अगस्त। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गन्ना उत्पादक किसान अब गन्ने की खेती से मुंह मोड़ रहे हैं।वहीं जिले में गन्ने की पैदावार कम होने से शक्कर कारखाने पर उत्पादन का संकट गहराता जा रहा है। वही किसानों को अब तक प्रबंधन की ओर से अंतर की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। जिसके चलते किसान गन्ना उत्पादन से पीछे हट रहे हैं। अब किसानों ने जिला कलेक्टर को पत्र सौंपते हुए 17 अगस्त को आंदोलन का ऐलान कर दिया है।

क्या है अंतर की राशि
शक्कर कारखाना प्रबंधन के मुताबिक साल 2021-22 पेराई सत्र में लगभग 700 गन्ना उत्पादक किसान थे। जब भुगतान कि बारी आई तो 355 रुपए प्रति क्विंटल के बजाय 275 रुपए की दर से किया है। 80 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान करना बचा है। इस सत्र में अंतर कि राशि 2 करोड़ 78 लाख रुपए है। 2020-21 पेराई सत्र में लगभग 600 किसानों ने गन्ना शक्कर कारखाना में बेचा। इस साल भी 355 की जगह 340 रुपए की दर से भुगतान किया। 2020 -21 पेराई सत्र की अंतर की राशि 46 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया है।

शासन से आने वाली राशि का इंतजार
दंतेश्वरी मैय्या सहकारी शक्कर कारखाना के प्रबंधक राजेंद्र कुमार राठिया ने बताया कि किसानों ने अंतर की राशि को किसानों को दिलाने मांग की है। इसकी जानकारी शासन-प्रशासन को दें दी हैं। शासन को पत्र लिखा गया है राशि आने पर जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा।
किसान संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
दंतेश्वरी मैय्या सहकारी शक्कर कारखाना के अध्यक्ष बलदूराम साहू ने बताया कि किसानों को 2020-21 व 2021-22 में किसानों से खरीदे गए गन्ना की राशि का भुगतान कारखाना प्रबंधन ने किया। लेकिन दोनों साल की अंतर की राशि का भुगतान नही किया गया है। किसानो की ओर से कलेक्टर को मांग पत्र सौंपा गया है।
17 अगस्त को आंदोलन की तैयारी
बालोद के जिला गन्ना उत्पादक संघ ने अब 15 अगस्त तक मुख्यमंत्री व नाम कलेक्टर व एसपी को भी ज्ञापन सौंपकर अंतर की राशि दिलाने की मांग की है। 15 अगस्त तक शेष बचे अंतर की राशि किसानों के खाते में देने की मांग की है। वहीं किसानो ने 17 अगस्त को प्रबन्धन के खिलाफ आंदोलन की तैयारी कर ली है।
भुगतान में देरी से परेशान किसान
अंतर की राशि के भुगतान में देरी से किसानों ने अब गन्ने की पैदावार से दूरी बना ली है। प्रबन्धन की इस लापरवाही से शक्कर कारखाने के उत्पादन पर इसका असर पड़ रहा है। दो साल पहले कई किसानों ने गन्ना की फसल लेना बंद कर दिया है। कई किसानों ने कर्ज लेकर गन्ने खेती की लेकिन अब तक ब्याज दे रहें हैं।












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