डिंडोरी में 150 परिवारों के लोगों ने कलेक्टर से धर्मांतरण की अनुमति मांगी, 7 पीढ़ी से झेल रहे सामाजिक बहिष्कार
डिंडौरी में 150 परिवारों ने कलेक्टर से ईसाई धर्म अपनाने की अनुमति मांगी है। कलेक्टर विकास मिश्रा के पैर छूकर उन्होंने कहा- राठौर समाज ने करीब 150 साल पहले हमारे पूर्वजों को बहिष्कृत कर दिया था।
तब से लेकर आज तक हम समाज से बाहर ही हैं। सामाजिक कार्यों में शामिल होने की कोशिश करने पर ये बेटियों के रिश्ते तुड़वा देते हैं। बच्चों के पैर तोड़ने की धमकी देते हैं।

मंगलवार को धनुआ सागर गांव के ये परिवार बच्चों के साथ जनसुनवाई में पहुंचे। कलेक्टर से बोले- अधिकारियों से शिकायत करते-करते थक चुके हैं। अगर समाज में मिलाप नहीं हुआ तो ईसाई धर्म अपना लेंगे। इसकी जवाबदारी राठौर समाज के पदाधिकारी और जिला प्रशासन की होगी। प्रशासन समाज में नहीं मिलवा सकता तो धर्मांतरण की अनुमति दे।
इस पर कलेक्टर ने कहा- ऐसी सोच रखने वालों को समझना चाहिए कि ये बिल्कुल ठीक नहीं है। इस तरह समाज से किसी को अलग करना गैरकानूनी है। गांव में जाकर दोनों पक्षों को समझाइश दी जाएगी। इसके बाद भी नहीं मानते तो फिर कानूनी कार्रवाई करने का विचार करेंगे।
देर शाम SDM कोर्ट में केस रजिस्टर्ड कर लिया गया। SDM रामबाबू देवांगन ने बताया कि राठौर समाज के तत्कालीन सरपंच राम प्रभा पराशर, सामाजिक पंच चंदू समनापुर, पूर्व अध्यक्ष ओमकार चंदेल, वर्तमान अध्यक्ष कृष्णा परमार, मुकद्दम गुलाब सिंह, कार्यवाहक सरपंच डुले सिंह, पंच दयाराम राठौर को नोटिस जारी किया गया है। अगले मंगलवार से दोनों पक्षों की सुनवाई होगी।

बिहारी लाल ने कलेक्टर को बताया, 'सात पीढ़ी पहले हमारे पूर्वजों ने गलती से समाज से बाहर की महिला को रख लिया था। तभी से हमारा परिवार बहिष्कृत है। काफी मिन्नतें करने पर 13 मार्च 2022 को तत्कालीन सरपंच राम प्रभा और पंचों ने बैठक की। गंगा स्नान, राम कीर्तन, भंडारा, सामाजिक भोज और धर्मशाला के नाम पर दो लाख रुपए दान करने की सहमति बनाकर समाज में शामिल कर लिया।
2023 में कृष्णा परमार जिला अध्यक्ष बने तो उन्होंने फिर बहिष्कार का फरमान सुना दिया। समाज के लोगों ने उनकी बात नहीं मानी। 8 जनवरी 2024 को गांव में हम सुंदर राठौर के यहां कीर्तन कार्यक्रम में पहुंचे। यहां परमार ने माइक से ऐलान कर दिया कि इन 150 परिवारों को जो भी सामाजिक कार्यक्रम में बुलाएगा या इनसे रोटी-बेटी का संबंध रखेगा, उसे भी समाज से अलग कर दिया जाएगा। इसके बाद लोगों ने डर के कारण हमें बुलाना बंद कर दिया।
शुकवारिया बाई ने बताया, 'परमार हमारे रिश्तेदारों को फोन करके धमकी देते हैं कि हमसे संबंध न रखें। गांव में यज्ञ चल रहा है, बच्चे वहां जाते हैं तो उन्हें मारकर भगा दिया जाता हैं। पैर तोड़ने की धमकी देते हैं। बच्चे कार्यक्रम को दूर से देखते रहते हैं।'













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