केजरीवाल के बचाव में आए जेठमलानी, कहा फ्री में लड़ूंगा उनका केस

राम जेठमलानी ने कहा कि अरुण जेटली उनके सवालों से डर गए हैं और इसीलिए जेटली ने यह सारा विवाद खड़ा किया है।

नई दिल्ली। वरिष्ठ वकील और सांसद राम जेठमलानी ने उनकी फीस को लेकर छिड़े ताजा विवाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का बचाव किया है। जेठमलानी ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी या अरविंद केजरीवाल उनकी फीस नहीं चुका सकते तो वे उनका केस फ्री में लड़ने को भी तैयार हैं।

'मेरे सवालों से डर गए हैं जेटली'

'मेरे सवालों से डर गए हैं जेटली'

आपको बता दें कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का केस किया हुआ है। इस मामले में राम जेठमलानी अरविंद केजरीवाल की तरफ से केस लड़ रहे हैं। केजरीवाल पर भाजपा ने आरोप लगाया है कि उनकी सरकार जनता के पैसे से इस बिल का भुगतान करना चाहती है। इस मामले में मंगलवार को राम जेठमलानी ने कहा कि अरुण जेटली उनके सवालों से डर गए हैं और इसीलिए जेटली ने यह सारा विवाद खड़ा किया है।

'फ्री लड़ूंगा केजरीवाल का केस'

'फ्री लड़ूंगा केजरीवाल का केस'

वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने कहा कि सभी लोग जानते हैं कि वो केवल धनी क्लाइंट्स से ही अपनी फीस के पैसे लेते हैं। गरीब क्लाइंट्स का केस वो फ्री में लड़ते हैं। मीडिया से बात करते हुए जेठमलानी ने कहा, 'अगर अरविंद केजरीवाल या उनकी सरकार मेरी फीस नहीं चुका सकती तो मैं उनका केस फ्री में लड़ूंगा। मैं उन्हें अपने किसी गरीब क्लाइंट की तरह ही मानकर उनके मुकदमे की पैरवी करूंगा।'

क्या है पूरा मामला?

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि राम जेठमलानी की ओर से अपनी फीस का बिल 1 दिसंबर 2016 को भेजा गया था, जिसमें 1 करोड़ रुपए बतौर रिटेनरशिप और 22 लाख रुपए हर बार कोर्ट में पेश होने की एवज में लिए गए हैं। जेठमलानी 11 बार केजरीवाल के केस के सिलसिले में कोर्ट में मौजूद रहे, इस तरह कुल बिल 3.42 करोड़ रुपए हुआ। यह केस अभी भी कोर्ट में है। इस बिल को लेकर ही विवाद छिड़ा हुआ है।

बिल का भुगतान सरकारी खजाने से!

बिल का भुगतान सरकारी खजाने से!

डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, 6 दिसंबर 2016 को दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने प्रशासनिक विभाग को लिखे नोट में बिल का भुगतान सरकारी खजाने से करने को कहा था। इस मामले में 7 दिसंबर को दिल्ली सरकार के कानून विभाग ने अप्रूवल देने से मना कर दिया था और कहा था कि इसके लिए उपराज्यपाल की स्वीकृति होनी जरूरी है। कानून विभाग को एक बार फिर सिसोदिया ने नोट भेजा जिसमें लिखा था कि इसके लिए एलजी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। ये भी पढ़ें- आम जनता के पैसों में हेर-फेर, फिर घिरी केजरीवाल सरकार

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