क्या है दिल्ली सरकार कई नई आबकारी नीति, जिसपर हो रहा है विवाद
नई दिल्ली, 22 जुलाई। दिल्ली सरकार की अपनी नई आबकारी नीति के चलते मुश्किल में घिरती नजर आ रही है। दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने इस नई नीति की सीबीआई जांच की सिफारिश की है। दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में खामियों को लेकर एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है। एलजी ने यह सिफारिश दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर की है। आरोप है कि दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के जरिए जो कथित टेंडर निकाला गया उसमे शराब बेचने के लाइसेंसधारियों को गलत तरह से वित्तीय लाभ दिया गया है, जिसकी वजह से बड़ा वित्तीय घाटा हुआ है।

मनीष सिसोदिया पर गिरफ्तारी की तलवार
वहीं अब मनीष सिसोदियों पर इस नीति को लेकर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। खुद अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आने वाले दिनों में मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया जा सकता है और यह मुझे पहले से ही पता है। देश में यह नई व्यवस्था है, पहले तय किया जाता है कि किसे जेल भेजना है उसके बाद उसके खिलाफ केस तैयार किया जाता है।

मुख्य सचिव की रिपोर्ट में संगीन आरोप
दिल्ली के मुख्य सचिव ने 8 जुलाई 2022 को अपनी जो रिपोर्ट पेश की है उसमे कहा गया है कि प्रथम दृष्टया जीएनसीटीडी एक्ट 1991 का उल्लंघन सामने आया है। टेंडर में लाइसेंसधारियों को गलत तरह से लाभ पहुंचाया गया है। मुख्य सचिव की रिपोर्ट को एलजी और मुख्यमंत्री दोनों को भेजा गया है। जिसमे कहा गया है कि शीर्ष राजनीतिक स्तर पर वित्यी लेनदेनके संकेत मिले हैं, जिसे आबकारी विभाग के प्रभारी मंत्री मनीष सिसोदिया लिया, उन्होंने इसमे अहम फैसले लिए, नियमों का उल्लंघन किया गया, जिसके बड़े वित्तीय असर हुए हैं।

लाइसेंसधारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टेंडर दिए जाने के काफी समय बाद मनीष सिसोदिया ने गलत तरह से शराब के लाइसेंसधारियों को वित्तीय मदद पहुंचाई, जिसकी वजह से एक्स चेकर्स को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ है। बता दें कि दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति को कोरोना काल के में लेकर आई थी जब देश डेल्टा की लहर थी। इस नीति का धार्मिक संगठनों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों ने विरोध किया था।

रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया पर आरोप
चीफ सेक्रेटरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नीति सिर्फ इसलिए लाई गई ताकि प्राइवेट शराब बेचने वालों को लाभ दिया जा सक। ऐसा केवल आबकारी और वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व वाली सरकार के उच्च स्तर पर बैठे व्यक्तियों को लाभ पहु्चाने के लिए किया गया, ताकि इसके बादले में शराब व्यवसायिों को लाभान्वित किया जा सके। यही नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि जब प्रदेश में होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, जिम, स्कूल बंद थे तो आबकारी विभाग ने मनीष सिसोदिया के निर्देश पर 144.36 करोड़ रुपए का कर्ज शराब व्यापारियों का माफ किया, इन लोगों को कोरोना के नाम पर टेंडर लाइसेंस से छूट दी गई।

क्या है नई आबकारी नीति
आबकारी नीति की बात करें तो इसमे दूकानदारों को कहा गया था कि वह शराब 18 साल से कम उम्र के बच्चों को ना बेचें, उनकी आईडी को चेक करें। खुले में शराब पीने से रोकने के लिए शराब की दुकान के बाहर स्नैक्स और चखने की दुकान पर पाबंदी रहेगी। ग्राहकों को किसी खास ब्रांड की शराब खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। दुकान के बाहर किसी भी तरह की कोई ब्रांडिंग नहीं होनी चाहिए। एक वार्ड में अधिकतम 27 दुकानें हो सकती हैं। इसके साथ ही टेंडर ई-टेंडरिंग के जरिए दिए जाएंगे।

32 जोन में बांटे गए
नई आबकारी नीति में आपत्तियों की बात करें नई नीति के तहत दिल्ली को 32 जोन में बांटा गया है। बाजार में सिर्फ 16 खिलाड़ी ही उतर सकते हैं, जिससे किसी एकाधिकार को बढ़ावा नहीं मिले। बड़े वेंडर्स के आने की वजह से छोटे व्यापारियों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। बड़े स्टोर्स पर मिल रही भारी छूट के चलते छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। वहीं कोर्ट में वकीलों की दलील है कि हमे थोक विक्रय के दाम पता हैं लेकिन दुकान पर किस दाम में बेची जाएगी इसपर स्थिति साफ नहीं है।

ई टेंडरिंग को चुनौती
कोर्ट में इस नीति के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है जिसमे कहा गया है कि देसी और विदेशी शराब की बिक्री के लिए 31 संभागीय लाइसेंस बांटे गए हैं जोकि अवैध है। हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नई आबकारी नीति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट में ई-टेंडर को भी चुनौती दी गई है। कोर्ट ने कहा कि सबकुछ अनिश्चितता पर नहीं छोड़ा जा सकता है। कॉन्ट्रैक्टर को पता होना चाहिए कि उसे क्या मिलेगा। कोर्ट ने ई-टेंडर की नियम व शर्तों पर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
वहीं दिल्ली सरकार का कहना है कि नई नीति का मकसद शराब व्यापार में उचित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है।
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