'...जिम्मेदारी नहीं निभाई तो होगी सख्त कार्रवाई', मंत्री सौरभ भारद्वाज ने चिकित्सा संस्थानों को किया आगाह

दिल्ली अस्पतालों में मरीजों को एडिमिट करने और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता में देरी पर स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अधिकारियों को फटकार लगाई है। इसके साथ ही उन्होंने जिम्मेदारी से काम ना करने वाले चिकित्सा संस्थानों को भी आगाह किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने शुक्रवार को कहा की जो अस्पताल जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार (19 जनवरी) को चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। जिसमें EWS से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान मंत्री ने अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं को सभी मरीजों के लिए पारदर्शी तरीके से उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा।

Minister Saurabh Bhardwaj warned hospitals

बैठक के बाद एक्स पर एक पोस्ट में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "सरकार प्रतिबद्ध है कोई भी गरीब इलाज से वंचित ना रहे। सभी जानते हैं EWS के तहत गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रख रहे मरीजो का प्राइवेट अस्पताल में मुफ्त इलाज कराया जाता हैं। इसलिए केजरीवाल सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय कि इस बैठक में तय किया गया, जो अस्पताल ईडब्ल्यूएस के तहत जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं, उनको प्रशंसा प्रमाण पत्र दिया जाएगा और जो अस्पताल जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ।"

दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री चिकित्सा अधिकारियों के साथ ये अहम बैठक ऐसे वक्त में ली है, जब तीन दिन पहले कथित रूप से ये सामने आया कि दिल्ली के अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने से मरे 47 साल के युवक की मौत हो गई। उक्त मामले में स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने दिल्ली सरकार द्वारा संचालित तीन अस्पतालों से रिपोर्ट मांगी थी। दरअसल, आरोप है कि इन अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने की वजह से युवक की मौत हो गई। युवक की जान बचाई जा सकती थी क्योंकि दिल्ली के फरिश्ते योजना चल रही थी।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री ने मामले को लेकर दिल्ली के एलजी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 'दिल्ली के फरिश्ते' योजना पूरी तरह से चल रही होती तो शायद युवक को मौत से बचाया जा सकता था। मंत्री ने दावा किया कि युवक को योजना के तहत किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया जाता तो उसकी जान बच जाती।

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