दिल्ली हाईकोर्ट में SpiceJet का बयान, कलानिधि मारन को ब्याज देने से छूट की मांग को लेकर बताई बड़ी वजह
स्पाइसजेट की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में एक सिंगल जज की बेंच को आदेश को चुनौती दी गई थी। जिसमें एयरलाइंस कंपनी ने पूर्व मालिक कलानिधि मारन के ब्याज को रद्द करने की मांग की थी। कंपनी अदालत की इसकी बड़ी वजह भी बताई।
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Cout) के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने के बाद भी स्पाइजेट को निराशा हाथ लगी है। हाईकोर्ट ने एयरलाइंस कंपनी स्पाइसजेट (SpiceJet) की याचिका को रद्द करते हुए कलानिधि मारन के ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। हालांकि अपनी याचिका में स्पाइसजेट ने ब्याज भुगतान करने में असमर्थतता जताई थी।
स्पाइसजेट की ओर दायर याचिका में कहा गया कि कंपनी उड्डययन क्षेत्र में बने रहने के लिए संघर्ष कर रही है। पिछले काफी समय से आर्थिक संकट की स्थिति है। ऐसे में कंपनी के पूर्व मालिक के राशि पर ब्याज पर भुगतान से राहत दी जाय।

दरअसल, स्पाइसजेट ने 10 दिनों के भीतर 750 मिलियन रुपये जमा करने की पेशकश की थी। जबकि न्यायाधीश ने एयरलाइन को 10 सितंबर तक 1 बिलियन रुपये ($12 मिलियन) का भुगतान करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर स्पाइसजेट बकाया ब्याज देने में असफल होती है तो कंपनी की संपत्ति जब्त करने पर विचार किया जा सकता है।
इस आदेशके बाद स्पाइसजेट ने एक बयान में कहा कि वह अदालत के आदेश का सम्मान करेगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर बकाया ब्याज का भुगतान कर देगी।
बता दें कि काल एयरवेज और इसके प्रोमोटर कलानिधि मारन को मुकदमे के दौरान पेंडिंग अमाउंट पर 12% ब्याज मिलना है। जबकि फाइनल डेट के बाद स्पाइसजेट और चेयरपर्सन अजय सिंह को 18% ब्याज चुकाना होगा। ये रकम भी स्पाइसजेट को अवार्ड डेट के दो महीने के भीतर चुकानी होगी।












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