Russia Ukraine War: पुतिन का सबसे बड़ा सरेंडर! पहली बार कैमरे पर माना- 'यूक्रेन ने हमें तेल के लिए तरसा दिया'

Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पहली बार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने माना है कि यूक्रेन के लगातार हमलों से रूस के ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचा है और कुछ इलाकों में फ्यूल की कमी भी देखने को मिल रही है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब क्रीमिया में तेल-गैस संकट और बिजली कटौती के चलते इमरजेंसी घोषित की गई है।

वहीं, पुतिन ने बातचीत के लिए तैयार होने का संकेत भी दिया, लेकिन साथ ही यूक्रेन के चार क्षेत्रों पर कब्जे का लक्ष्य दोहराया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या युद्ध खत्म होने की शुरुआत हो चुकी है?

Russia Ukraine War

पहली बार पुतिन ने माना, हमलों से हुआ नुकसान

अब तक रूस यूक्रेन के हमलों के असर को कम करके दिखाता रहा था। लेकिन इस बार पुतिन ने खुद स्वीकार किया कि ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों से फ्यूल सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि उन्होंने कहा कि स्थिति बहुत गंभीर नहीं है। इसके बावजूद यह बयान दिखाता है कि यूक्रेन के ड्रोन और मिसाइल हमले अब रूस के अंदर तक असर डाल रहे हैं और युद्ध का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

क्रीमिया में संकट ने बढ़ाई रूस की चिंता

रूस के कब्जे वाले क्रीमिया में तेल-गैस की कमी और बिजली कटौती के बाद इमरजेंसी घोषित की गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सप्लाई रूट और ऊर्जा सुविधाओं पर हुए हमलों की वजह से यह संकट पैदा हुआ। क्रीमिया रूस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। ऐसे में वहां पैदा हुई मुश्किलें मॉस्को के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।

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बातचीत की बात, लेकिन युद्ध का लक्ष्य वही

पुतिन ने इंटरव्यू में कहा कि वह अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं और उम्मीद करते हैं कि वार्ता जल्द शुरू होगी। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि रूस यूक्रेन के चार क्षेत्रों पर पूरा कब्जा करने के अपने सैन्य लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। यानी बातचीत के संकेत जरूर हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर रूस अपनी रणनीति बदलने के मूड में नजर नहीं आ रहा।

यूक्रेन क्यों कर रहा है ऊर्जा ठिकानों पर हमले?

यूक्रेन का कहना है कि रूस पिछले कई वर्षों से उसके शहरों और ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमले कर रहा है। इसी वजह से उसने रूस के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू किया। कीव का दावा है कि इससे रूस की सैन्य सप्लाई और युद्ध क्षमता कमजोर होगी। यही कारण है कि अब रूस के अंदर भी युद्ध का असर साफ दिखाई देने लगा है।

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क्या अब खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध?

पुतिन के बयान के बाद युद्ध खत्म होने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि मौजूदा हालात बताते हैं कि शांति की राह अभी आसान नहीं है। एक तरफ बातचीत की संभावना बन रही है, तो दूसरी तरफ दोनों देश अपने-अपने सैन्य लक्ष्य छोड़ने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में निकट भविष्य में युद्धविराम की उम्मीद तो बन सकती है, लेकिन स्थायी शांति के लिए दोनों पक्षों को बड़े समझौते करने होंगे।

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