Pul Bangash Killing Case Update: 'पूर्व कांग्रेस MP जगदीश टाइटलर के खिलाफ आरोप तय हों', दिल्ली कोर्ट का आदेश
1984 Pul Bangash Killing Case Update: 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद जगदीश टाइटलर के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। यह मामला दिल्ली के पुल बंगश इलाके में सिखों की हत्या से संबंधित है।
कोर्ट ने अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि टाइटलर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या, दंगा और उकसावे सहित कई आरोपों पर आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पिछले साल टाइटलर के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था, जिसमें उन पर दंगों के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप उत्तरी दिल्ली में पुल बंगश गुरुद्वारा के पास तीन लोगों की मौत हो गई थी।

कोर्ट को टाइटलर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 143 (अवैध रूप से एकत्र होना), 147 (दंगा), 188 (लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवज्ञा), 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 (पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना), 436 (घर को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा उत्पात), 451 (घर में अनाधिकार प्रवेश), 380 (घर में चोरी) और 302 (हत्या) के तहत आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत मिले। हालांकि, टाइटलर को धारा 148 (दंगा करना, घातक हथियार से लैस होना) के तहत अपराध से मुक्त कर दिया गया। कोर्ट ने आरोपों की औपचारिक रूपरेखा 13 सितंबर, 2024 के लिए निर्धारित की है, और टाइटलर को सुनवाई में शारीरिक रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे सिख विरोधी दंगे
आपको बता दें कि 1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक हिंसा हुई और पूरे भारत में हजारों सिख मारे गए।
टाइटलर के खिलाफ आरोपपत्र में क्या कहा गया?
सीबीआई द्वारा टाइटलर के खिलाफ दायर आरोपपत्र में कहा गया है कि कांग्रेस नेता ने दंगाइयों को आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में हत्याओं की संख्या की तुलना अन्य स्थानों से की और अपने अनुयायियों से सिखों पर और अधिक हमला करने को कहा।
प्रत्यक्षदर्शी ने बयां किया कांग्रेस नेता का काला सच?
चार्जशीट में दर्ज एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि कांग्रेस नेता अपनी सफेद एंबेसडर कार से बाहर आए और भीड़ को उकसाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शी की दुकान 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दंगों में जला दी गई थी। एक अन्य बयान के अनुसार, तत्कालीन सांसद टाइटलर ने भी दिल्ली के आजाद मार्केट स्थित गुरुद्वारा पुल बंगश में भीड़ को उकसाया था।
टाइटलर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए गुरुद्वारे के सामने मौजूद थे। आरोपपत्र में कहा गया है कि स्थिति को देखने के बाद बस में उनके सह-यात्रियों ने सिख प्रत्यक्षदर्शी को अपनी पगड़ी उतारने और अपने घर वापस जाने की सलाह दी।












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