Delhi News: 'भरत की तरह शासन निभाने का वादा', दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही क्या बोलीं आतिशी
Delhi News: दिल्ली की नई मुख्यमंत्री आतिशी ने सोमवार को पदभार संभाल लिया और अपने शासन में भगवान राम की अनुपस्थिति में भरत की निष्ठा का अनुसरण करने का संकल्प लिया। यह बदलाव अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद हुआ। जिन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया था। आतिशी ने भरत की तरह केजरीवाल द्वारा स्थापित मूल्यों और आदर्शों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
43 वर्षीय आतिशी ने आम आदमी पार्टी के निर्णय के बाद पदभार संभाला और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह बदलाव उनके नेतृत्व में एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कार्यकाल की ओर संकेत करता है। फरवरी 2024 में होने वाले इन चुनावों के मद्देनजर, आतिशी के सामने कई लंबित योजनाओं और परियोजनाओं को पूरा करने की चुनौती है।

आतिशी के कैबिनेट में कोई बड़े फेरबदल नहीं हुए हैं। सौरभ भारद्वाज, गोपाल राय और कैलाश गहलोत जैसे वरिष्ठ मंत्री अपने पदों पर बने हुए हैं। जबकि मुकेश अहलावत को एक नए मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। जो श्रम और रोजगार से जुड़े मुद्दों को संभालेंगे। मंत्रिमंडल में अनुभव और नई ऊर्जा का यह मिश्रण दिल्ली के विकास के लिए अहम साबित हो सकता है।
आतिशी के नेतृत्व में नई प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं। जिनमें शिक्षा, राजस्व, वित्त और लोक निर्माण विभाग पर विशेष जोर दिया गया है। हालांकि आतिशी ने केजरीवाल की कुर्सी का इस्तेमाल न करने का निर्णय लिया है। जो उनके पूर्ववर्ती के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
आतिशी की सरकार विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में दिल्ली के नागरिकों के लिए रोजगार, एससी/एसटी मुद्दों और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए मंत्रियों की नियुक्ति और योजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन से सरकार आगामी चुनावी चुनौती के लिए तैयार हो रही है।
अपने पहले भाषण में आतिशी ने केजरीवाल की राजनीति के उच्च आदर्शों की सराहना की और कहा कि वह भरत के समर्पण की तरह शासन करेंगी। भाजपा द्वारा केजरीवाल पर लगातार हमलों के बावजूद उन्होंने दिल्ली की जनता के लिए उनकी सिद्धांतवादी राजनीति को आगे बढ़ाने का वादा किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में आतिशी का कार्यकाल एक ऐसे दौर की शुरुआत है। जहां वह अरविंद केजरीवाल द्वारा स्थापित मूल्यों को बनाए रखते हुए विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगी। नई दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य में आतिशी की यह नई भूमिका आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। क्योंकि वह अपनी टीम के साथ दिल्ली के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।












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