दिल्ली हिंसा: 'एक ही मामले में 5 केस नहीं दर्ज कर सकते', पुलिस पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली, 2 सितम्बर। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है पुलिस एक ही घटना के लिए पांच अलग प्राथमिकी या केस दर्ज नहीं कर सकती है। हाईकोर्ट ने उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान एक परिसर में लूटपाट और आग लगाने के मामले में 5 केस दर्ज करने को लेकर ये टिप्पणी की। इसके साथ ही पुलिस ने अन्य चार मामलों को रद्द कर दिया।

Delhi Violence

हाईकोर्ट ने कहा कि एक ही संज्ञेय अपराध के लिए दूसरी प्राथमिकी और नए सिरे से जांच नहीं हो सकती है। यह कानूनों के खिलाफ है। उच्च न्यायालय ने एक प्राथमिकी को बरकरार रखते हुए आरोपी के खिलाफ जाफराबाद पुलिस थाने में दर्ज अन्य चार और उसे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति सुब्रण्यम प्रसाद ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित प्राथमिकी में दायर आरोप पत्रों को देखने से पता चलता है कि यह घटनाएं अलग या अपराध अलग थे। वे कमोबेश एक जैसे हैं और आरोपी भी एक ही हैं। हालांकि वहां ऐसी कोई सामग्री है जो आरोपी के खिलाफ पाई गई है तो उसे प्राथमिकी में रिकॉर्ड में रखा जा सकता है।

एक ही परिवार के लोगों ने किए थे केस
अदालत ने आरोपी अतीर द्वारा दायर चार याचिकाओ पर सुनवाई के बाद ये आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने बताया कि उसे एक ही परिवार के विभिन्न सदस्यों की शिकायत पर दर्ज पांच प्राथमिकी में अभियोजन का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी की शाम को जब वे मौजपुर इलाके में अपने घर पहुंचे तो उनके घर को आग के हवाले कर दिया गया था जिसमें करीब 10 लाख का नुकसान हुआ था।

अतीर के वकील ने कोर्ट से कहा कि सभी प्राथमिकी एक ही घर से संबंधित हैं और परिवार के विभिन्न सदस्यों ने ही दर्ज कराई हैं। यही नहीं फायर ब्रिगेड का एक ही ट्रक भी आग बुझाने के लिए आया था। वकील ने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट किया है कि एक अपराध के लिए एक से अधिक प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती है।

दिल्ली पुलिस का दावा खारिज
वहीं दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि संपत्तियां अलग थीं और जो नुकसान हुआ वह वहां पर रहने वालों का व्यक्तिगत भी था और प्रत्येक प्राथमिकी का विषय दूसरों से अलग है।

मामले को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि सभी पांच प्राथमिकियों की सामग्री समान है और कमोबेश एक दूसरे की नकल है। यह सभी एक ही घटना से संबंधित है।

कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुसार कानून तय है कि एक ही संज्ञेय अपराध या एक ही घटना के संबंध में कोई दूसरी प्राथमिकी और कोई नई जांच नहीं हो सकती है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+