'मैंने आदिवासी परंपराओं को करीब से देखा और जिया,' आदि महोत्सव में बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में 'आदि महोत्सव' का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को भी पुष्पांजलि अर्पित की।

Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार यानी आज दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में 'आदि महोत्सव' का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को भी पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही देशवासियों को 'आदि महोत्सव' की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
आदिवासी समाज की प्रथाओं से सीखा बहुत कुछ सीखा- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि, 'ऐसा लग रहा है कि जैसे भारत की अनेकता और भव्यता आज एक साथ खड़ी हो गई हैं। यह भारत के उस अनंत आकाश की तरह है जिसमें उसकी विविधताएं इंद्रधनुष की तरह उभर कर सामने आ जाती हैं।' पीएम मोदी ने कहा कि, 'जब विविधताओं को एक भारत श्रेष्ठ भारत के धागे में पिरोया जाता है, तो भारत की भव्यता दुनिया के सामने उभरती है। यह आदि महोत्सव इस भावना को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने आदिवासी समाज की प्रथाओं से सीखा है।
'सबका साथ सबका विकास' के दर्शन पर काम कर रहा नया भारत
इस कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम ने कहा कि, 'मैं उनके उत्पादों के माध्यम से विभिन्न कलाओं, कलाकृतियों, संगीत और सांस्कृतिक प्रदर्शन को देखकर प्रसन्न होता हूं। मुझे लगता है कि भारत की विविधता और इसकी भव्यता एक साथ आ गई है और आज इसकी परंपरा को उजागर कर रही है।' उन्होंने कहा कि, '21वीं सदी का नया भारत 'सबका साथ सबका विकास' के दर्शन पर काम कर रहा है। सरकार उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जो लंबे समय से इससे दूर हैं।' पिछले 8-9 वर्षों के दौरान, 'आदि महोत्सव' जैसे आयोजन देश के लिए एक आंदोलन बन गए हैं।
आदिवासी समाज का कल्याण व्यक्तिगत होने के साथ भावनात्मक विषय भी
पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि, 'मैं भी कई आयोजनों में भाग लेता हूं, मैं ऐसा इसलिए करता हूं क्योंकि आदिवासी समाज का कल्याण व्यक्तिगत होने के साथ-साथ एक भावनात्मक विषय भी है।' उन्होंने कहा, "जब भी हम सतत विकास के बारे में बात करते हैं, मैं हमेशा दुनिया को भारत में जनजातीय जीवन शैली देखने के लिए कहता हूं, जिसमें जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का जवाब है। जनजातीय कलाकृतियों को हमेशा विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को उपहार के रूप में चुना जाता है।'
देशभर में काम कर रहे 80 लाख से ज्यादा सेल्फ हेल्फ ग्रुप
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि, 80 लाख से ज्यादा सेल्फ हेल्फ ग्रुप आज अलग-अलग राज्यों में काम कर रहे हैं, जिसमें सवा करोड़ से ज्यादा सदस्य हमारे जनजातीय भाई-बहन हैं और इनमें भी बड़ी संख्या हमारी माताओं-बहनों की है। आदि महोत्सव के जरिए जनजातीय संस्कृति, शिल्प, व्यंजन, वाणिज्य और पारंपरिक कला की भावना का जश्न मनाया जाता है। यह कार्यक्रम जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (TRIFED) की एक वार्षिक पहल है।
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27 फरवरी तक चलेगा आदि महोत्सव
आदि महोत्सव कार्यक्रम स्थल पर 200 से अधिक स्टॉलों पर देशभर की जनजातियों की समृद्ध और विविध विरासत को प्रदर्शित किया गया है। इस अभ्यास में लगभग 1,000 आदिवासी कारीगर भाग लेंगे। दरअसल, आदि महोत्सव के जरिए संस्कृति, शिल्प, खानपान, वाणिज्य और पारंपरिक कला समेत जनजातीय भावना का जश्न मनाया जा रहा है, यह महोत्सव 27 फरवरी तक चलेगा।












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