दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस को झटका, HC का निचली अदालत के फैसले पर रोक से इनकार
नई दिल्ली, 28 जुलाई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को प्राथमिकी दर्ज करने में विफल रहने के लिए दिल्ली पुलिस की आलोचना वाले निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए जुर्माने की 25,000 रुपये की रकम को अगली तारीख तक जमा करने से छूट दी जा सकती है। जस्टिस सुब्रण्यम प्रसाद ने कहा कि हम आपकी बात सुनने के बाद सख्ती हटा सकते हैं।

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घोंडा निवासी मोहम्मद नासिर की शिकायत पर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने 21 अक्टूबर 2020 को दिल्ली पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के खिलाफ जांच एजेंसी की अपील को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने खारिज कर दिया था। दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत के दोनों आदेशों को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
क्या था मामला?
मोहम्मद नासिर ने पिछले साल 19 मार्च को पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा था कि 24 फरवरी को उनके आवास के पास उन पर गोलियां चलाई गईं जिससे उनकी बायीं आंख में गोली लग गई। नासिर ने मामले में नरेश त्यागी, सुभाष त्यागी, उत्तम त्यागी, सुशील, नरेश गौर और अन्य का नाम लिया। शिकायत के मुताबिक नासिर को अलग समुदाय से होने के चलते गोली मारी गई।
शिकायत के बाद 'कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई' जिसके बाद नासिर ने निचली अदालत का रुख किया। जवाब में पुलिस ने अदालत को बताया कि दंगे की घटना के संबंध में एक प्राथमिकी पहले से ही दर्ज की गई थी जिसमें इस बात का उल्लेख है कि उस तारीख पर नासिर और छह अन्य लोगों को बंदूक की गोली लगी थी। पुलिस ने निचली अदालत को यह भी बताया कि नासिर द्वारा नामित व्यक्तियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है।
एएसजे यादव ने 13 जुलाई को अपने आदेश में कहा कि पुलिस अधिकारी मामले में अपने वैधानिक कर्तव्यों में "बुरी तरह विफल" रहे हैं। निचली अदालत ने परिस्थितियों को बहुत ही चौंकाने वाला पाते हुए भजनपुरा पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी और उनके पर्यवेक्षण अधिकारियों पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
13 सितम्बर को अगली सुनवाई
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी जिससे कोर्ट ने इनकार कर दिया। अदालत ने पुलिस की ओर से दायर याचिका में नासिर को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को तय की है।
नासिर की ओर से पेश अधिवक्ता महमूद प्राचा ने अगली सुनवाई के लिए छोटी तारीख की मांग करते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं और अन्य को धमकी दी जा रही है। प्राचा ने कहा, "हम इन सभी याचिकाओं को वापस लेने के लिए जबरदस्त दबाव में हैं।"












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