Malviya Nagar Fire: 21 लोगों को मरते छोड़ने वाला होटल का मालिक Lavkesh Bajaj कौन? पत्नी के खिलाफ भी LOC जारी
Malviya Nagar Fire: मालवीय नगर में एक दिन पहले हुए भीषण अग्निकांड ने राजधानी को फिर झकझोर दिया है। 3 जून 2026 (बुधवार) सुबह हुई इस आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अब इस हादसे में नई ट्विस्ट सामने आ रहा है। दिल्ली पुलिस ने होटल बिल्डिंग के मालिक लवकेश बजाज (Lavkesh Bajaj) और उनकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया है।
यह कदम इसलिए उठाया गया है, ताकि दोनों आरोपी देश छोड़कर भाग न सकें। पुलिस की कई टीमें उन्हें तलाश रही हैं। फरार मालिक पर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) समेत भारतीय न्याय संहिता के अन्य गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। यह मामला अब सिर्फ एक अग्निकांड नहीं, बल्कि लापरवाही, अवैध निर्माण और सिस्टेमिक फेलियर की बड़ी कहानी बनता जा रहा है।

क्या हुआ था उस सुबह?
3 जून 2026, सुबह करीब 8:30 बजे। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित फ्लोरिश स्टे B&B होटल की पांच मंजिला इमारत में आग लग गई। आग ग्राउंड फ्लोर पर स्थित लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट से शुरू हुई और तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई।
इमारत संकरी गली में थी। आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था। मुख्य दरवाजा सेंसर-आधारित (इलेक्ट्रॉनिक) था, जो बिजली गुल होते ही लॉक हो गया। खिड़कियां जालीदार और बंद थीं। नतीजा ये है कि अंदर फंसे लोग बाहर निकल ही नहीं पाए। धुआं और आग की लपटों ने 21 जिंदगियां छीन लीं।
पुलिस और फायर विभाग ने 58 लोगों को सुरक्षित निकाला और अस्पताल पहुंचाया। 21 में से 10 भारतीय और 11 विदेशी थे, इनमें 9 अफ्रीकी देशों के नागरिक और तुर्कमेनिस्तान के 2 व्यक्ति शामिल हैं। कई घायल अभी भी गंभीर हालत में मैक्स हॉस्पिटल और अन्य ट्रॉमा सेंटर्स में जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं।
मालिक फरार, LOC क्यों जारी?
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि लवकेश बजाज और उनकी पत्नी घटना के तुरंत बाद से फरार हैं। LOC जारी करने का मकसद स्पष्ट है कि विदेश भागने की आशंका को रोकना। पुलिस की टीम उनके ठिकानों, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि होटल दिल्ली सरकार की 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' नीति के तहत सिर्फ 6 कमरों की अनुमति लेकर चला रहा था। लेकिन आरोप है कि यह 25 कमरों तक चला रहा था, जिनमें बेसमेंट के कमरे भी शामिल थे। इमारत में बिना सूचना के अतिरिक्त मंजिलें बनाई गईं। सबसे गंभीर बात ये है कि फायर सेफ्टी NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) तक नहीं लिया गया था। ये सब लापरवाहियां अब 21 मौतों की वजह बन गई हैं।
लापरवाही के सबूत
प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं:
- इमारत में केवल एक एग्जिट, कोई बैकअप या इमरजेंसी गेट नहीं।
- बेसमेंट में भी कमरे बनाकर किराए पर दिए गए, जहां लोग ठहरे हुए थे।
- स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म और हाइड्रेंट नाकाफी या गैर-कार्यशील।
- क्षमता से चार गुना ज्यादा लोग ठहराए जा रहे थे।
- अस्पताल के पास होने के कारण विदेशी मरीजों के परिजन और पर्यटक यहां ठहरते थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले कई सालों से यह होटल नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए चल रहा था। MCD, फायर विभाग और अन्य एजेंसियों की नाकामी भी अब सवालों के घेरे में है।
FIR में क्या-क्या धाराएं?
दिल्ली पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या (Section 304 IPC/BNS), सबूत नष्ट करने, लापरवाही से जानमाल को खतरे में डालने और अन्य संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है। अगर मालिक दोषी पाए गए तो उन्हें सख्त सजा हो सकती है।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में बड़े मालिक अक्सर बच निकलते हैं, जबकि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हो जाती है। इस बार पुलिस और प्रशासन पर दबाव है कि ऊपर तक कार्रवाई हो।
मालवीय नगर: विकास की चमक, सुरक्षा का अंधेरा
मालवीय नगर दक्षिण दिल्ली का मध्यम वर्गीय और व्यावसायिक इलाका है। मदन मोहन मालवीय के नाम पर बसा यह क्षेत्र विभाजन के बाद शरणार्थियों द्वारा बसाया गया था। आज यहां सेलेक्ट सिटीवॉक, डीएलएफ एवेन्यू जैसे मॉल, मेट्रो स्टेशन और अच्छी कॉलोनियां हैं। लेकिन इसी इलाके की संकरी गलियों में अवैध होटल और रेस्टोरेंट फल-फूल रहे हैं। मैक्स हॉस्पिटल के पास होने की वजह से यहां विदेशी और मरीजों के परिजन ठहरते हैं। इससे होटल बिजनेस बढ़ा, लेकिन नियमन की कमी घातक साबित हुई।
दिल्ली के अग्निकांड: बार-बार दोहराती त्रासदी
यह पहला मामला नहीं है।
- 1997: उपहार सिनेमा- 59 मौतें
- 2019: अनाज मंडी- 43 मौतें
- 2022: मुंडका- 27 मौतें
हर बार यही पैटर्न है कि एक एग्जिट, अवैध निर्माण, फायर NOC की अनदेखी। हर बार जांच, मुआवजा, गिरफ्तारी के ऐलान... और फिर भूल जाना। मालवीय नगर का हादसा उसी श्रृंखला की नई कड़ी है।
21 परिवार टूट गए हैं। 11 विदेशी परिवारों में शोक है। अब वक्त है जवाबदेही तय करने का। LOC सिर्फ शुरुआत है। असली न्याय तब मिलेगा, जब कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले।













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