Delhi LPG Price: दिल्ली में कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹200 महंगा, बाहर खाना पड़ सकता है महंगा, जानें ताजा रेट
LPG Gas Price Delhi: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अमेरिका-ईरान के बीच रुकी हुई वार्ताओं का सीधा असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और घरेलू बाजार पर दिखने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है।
इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच, भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने आज यानी 27 अप्रैल को रसोई गैस (LPG) के ताजा रेट जारी कर दिए हैं।

Delhi LPG Price को लेकर घरेलू उपभोक्ताओं को मामूली राहत
दिल्ली में आज 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹913 पर स्थिर बनी हुई है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक घरेलू सिलेंडर की कीमतों में केवल एक बार संशोधन किया गया है।
हालांकि, घरेलू मोर्चे पर स्थिरता के बावजूद कमर्शियल (व्यावसायिक) गैस सिलेंडर के दाम आसमान छू रहे हैं। पिछले दो महीनों के भीतर कमर्शियल गैस की दरों में दो बार भारी बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिसका सीधा असर रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है।
पिछले दो महीनों में बदलती कीमतों का गणित
अगर हम पिछले कुछ हफ्तों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मार्च और अप्रैल के महीनों में गैस की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है:
मार्च का झटका: मार्च महीने में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी। वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹144 का इजाफा हुआ था।
अप्रैल की भारी वृद्धि: अप्रैल के मासिक संशोधन के दौरान कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ ₹200 की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
आज यानी 27 अप्रैल को घरेलू सिलेंडर के दाम भले ही नहीं बढ़े हों, लेकिन मार्च में हुई ₹60 की वृद्धि के बाद से आम आदमी की रसोई का बजट पहले से ही बिगड़ा हुआ है।
वेस्ट एशिया युद्ध का रसोई पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा खिंचने और अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल होने से आने वाले समय में एलपीजी की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। चूंकि भारत अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए खाड़ी देशों में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालती है।
फिलहाल, सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर तनाव कम नहीं होता है, तो अगले मासिक संशोधन में घरेलू सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।












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